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आरामदायक प्रसव के लिए मैडिटेशन के फायदे

Neha Gupta Mittal
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Created by Neha Gupta Mittal
Updated on Aug 18, 2017

आरामदायक प्रसव के लिए मैडिटेशन के फायदे

भूख ज्यादा लगना, जी मिचलाना, वजन बढ़ना, कब्ज, बेचैनी, त्वचा में पीलापन .... हारमोनल बदलावों की बाढ़, तरह-तरह की बातें सोचना, अजीब-अजीब अहसास और दिमागी उतार-चढ़ाव।

ये सब क्या है? मैं कितनी बदल गई हूँ!! क्या मैं फिर से सामान्य हो पाउंगी? मुझे कब तक यह सब बर्दाश्त करना होगा? और फिर इस तरह के बहुत से अनचाहे बदलावों के बाद आप एक नन्हीं सी जान को जन्म देती हैं, उस पर अपना प्यार लुटाने, उसे पाल-पोस कर बड़ा करने और एक अच्छा इन्सान बनाने के लिए।

हर गर्भावस्था की तरह हर गर्भवती महिला भी अलग होती है, इसलिए हमारे पास कोई भी ऐसी तयशुदा विधि या तौर-तरीके नहीं हैं जो उपर लिखे बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में इस्तेमाल किए जा सकें। हालांकि, इस सम्बन्ध में की गई जांचें, विशेषज्ञों की सलाह और मेरा निजी तर्जुबा ये कहता है कि मैडिटेशन (ध्यान लगाना) गर्भावस्था में काफी हद तक सकारात्मक असर करता है।
 

मैडिटेशन (ध्यान लगाना) क्या है?

सरल शब्दों में मैडिटेशन का मतलब है अपने मन और विचारों को गति को शांत करना। जब आप ध्यान लगाने की पूर्णता पर पंहुचते हैं तो आपको अपनी अवस्था परिवर्तन और कुछ पलों के लिए आस-पास के माहौल और हालातों से अलगाव का एहसास होता है। जी हाँ, यही वह जादूई पल होते हैं जहाँ मैडिटेशन आपको इस काबिल बना देता है कि बजाय अपनी गर्भावस्था की परेशानियों में जकड़ने के आप अपने मिजाज पर काबू पा सकें। इसी समय, हमारी आत्मा, हमारे दिमाग को शांत होने और कुछ पलों तक गहरी सांस लेने-छोड़ने का संदेश देती है जिससे हमारे सोचने-समझने का ढंग बेहतर हो सके। 
 

ध्यान लगाने की लिए सही जगह का चुनाव कैसे करें?

ध्यान लगाने की तकनीक की चर्चा से पहले, मैं आपके साथ कुछ जरूरी बातें साझा करना चाहती हूँ। नीचे जो भी तकनीक बताई गई हैं, उसके अनुसार अगर आप जमीन पर बैठना चाहती हैं तो दीवार से अपनी पीठ सटा लें। आपकी रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा दीवार को छू रहा हो और पालथी मार कर सीधा तन कर बैठें। अगर आप कुर्सी पर बैठती हैं तो भी सीधा तन कर बैठें। पैर नीचे होने चाहिए, रीढ़ की हड्डी का निचला भाग पीछे की ओर कुर्सी को छूना चाहिए। बैठने के लिए आपके पास एक छोटा बिछौना या चटाई होनी चाहिए। आस-पास का माहौल शांत और साफ-सुथरा होना चाहिए। ध्यान लगाने में लगभग 15-20 मिनट का समय लगता है, तो अगर आप कमरे का दरवाजा बंद भी कर लें तो चलेगा।

अगर आपके परिवार में बच्चे है तों उन्हें यह बताना जरूरी है कि आपके ध्यान लगाने के समय आपको परेशान न किया जाए। परिवार को दूसरे सदस्यों को भी बताना बेहतर है कि आप मैडिटेशन करने जा रही हैं, इसलिए कुछ समय तक आप उनसे दूर रहेंगी। यहाँ तक कि, अपने आॅफिस में भी ध्यान लगाने का अभ्यास करने के लिए कोई शांत जगह चुनें और शुरू हो जाएं। और हाँ, इस बात की बिल्कुल परवाह न करें कि आपको आँखे बंद कर, अकेला बैठा देखकर दूसरे लोग क्या सोचेंगे। यह आप अपने खुद के लिए कर रही हैं न कि दूसरों के लिए।
 

मैडिटेशन कब करना चाहिए?

किसी भी तरह का मैडिटेशन अपने रोजाना कामकाज को शुरू करने से पहले - एकबार सुबह के समय, एक बार आधादिन बीत जाने पर या दोपहर में, एक बार शाम/रात में या सोने जाने से पहले करना चाहिए। सबसे जरूरी बात ये है कि इसे करते समय आपका पेट बिल्कुल खाली न हो और न ही पेट ज्यादा भरा हुआ हो। दिन में तीन बार मैडिटेशन किया जाना बेहतर होता है पर शुरूआत में एक या दो बार करने पर भी आपको इससे होने वाले फायदों का आसानी से अहसास हो जाएगा। मैडिटेशन  एक ऐसा काम है जिसे किए जाने को लेकर कोई बंधन नहीं है; हम में हर कोई इसे अपने ढंग से करता है और बैठक पूरी करने के बाद इससे मिलने वाली शांति का अहसास भी हर किसी के लिए अलग-अलग होता है।

गर्भावस्था में होने वाली दिमागी उथल-पुथल और समस्याएं के बावजूद आपके लिए रोजाना और नियम से मैडिटेशन किया जाना जरूरी होना चाहिए वरना इसके फायदे बेअसर हो जाते हैं। 
 

मैडिटेशन कैसे करें?

मैडिटेशन या ध्यान लगाना एक कला है और आमतौर पर सभी लोगों का मैडिटेशन करने का अपना ढंग होता है पर जिन लोगों को मैडिटेशन करने का तर्जुबा नहीं है, उनके लिए नीचे दी जा रही सलाह बहुत काम आएगी।
 

1. किसी हल्के गीत-संगीत का चुनाव करेंः आस-पास के माहौल के अनुरूप और मन को सुकून देने वाला। यह कोई भजन या मंत्र भी हो सकता है, जिसे याद रखा जा सके और गुनगुनाया जा सके .... पर आपको इसके उच्चारण पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

अपनी आँखें बंद करें, गहरी सांस लें और 15-20 बार इसे बोलें। हर बार एक गहरी सांस लेकर इसे शुरू करें। इसे बोलना खत्म करने के बाद जब आप धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलते हैं तो अपने-आप को पूरे ब्रम्हांड और इसकी अनंत सीमाओं से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
 

2. \ का जाप करेंः ऊँ को मौलिक ध्वनि के तौर पर मान्यता दी गई है। ऐसा माना जाता है कि संसार के अस्तित्व में आने से पहले एक गुंजायमान प्राकृतिक ऊर्जा उपस्थित थी और ऊँ शब्द के उच्चारण से होने वाला गुंजन उसी ऊर्जापिंड का रूप है। ऊँ शब्द का 21 बार जाप करने का तरीका है कि पहले गहरी सांस लें और फिर सांस छोड़ते हुए ऊँ शब्द बोलें।

पहले 7 बार तक ‘ओ’ अक्षर के उच्चारण को लम्बा खीचें और ‘म’ अक्षर का उच्चारण छोटा रखें। अगले 7 बार तक ‘ओ’ और ‘म’ दोनों अक्षरों के उच्चारण में समानता रखें और आखिरी 7 बार में ‘ओ’ अक्षर के उच्चारण को कम और ‘म’ अक्षर के उच्चारण को लम्बा खीचें।

याद रहे कि हर बार शुरू करने से पहले एक गहरी सांस लेना है और ऊँ का उच्चारण करते हुए सांस छोड़ना है। मैंने भी इसी तकनीक को अपनाया और मुझे महसूस हुआ कि मैं अपने अंदर पल रहे शिशु से जुड़ रही हूँ बल्कि मैंने अपने पेट पर हाथ रखकर अपने षिषु तक यह बात पंहुचाना शुरू किया कि मैं ‘ऊँ’ का जाप शुरू करने जा रही हूँ और उसे भी मेरे साथ यह करना है।
 

3. अनुलोम-विलोम, प्राणायाम का अभ्यास करनाः 10-15 मिनट तक अनुलोम-विलोम करना भी काफी असरदार होता है। अनुलोम-विलोम, प्राणायाम करने की ही एक तकनीक है। 10-15 बार इसे करना आपको तरोताजा कर देता है और आपकी शारिरिक वायु और ऊर्जा को काबू में रखता है। इसे करने की तकनीक जानने के लिए किसी योग्य योगा गुरू से जानकारी लें।
 

4. मैडिटेशन सीखने के लिए जानकारी पानाः योगा सीडी की मदद से आप जान सकती हैं कि मैडिटेशन करने का क्रमवार तरीका क्या है। यह बिल्कुल एक योगगुरू के जरिये मैडिटेशन सीखने जैसा ही है और उन लोगों के लिए काफी मददगार है जो इसे करने के लिए बिल्कुल नए हैं। यहाँ तक कि, यह उन लोगों के लिए भी कारगर है जो ठीक से मैडिटेशन कर ही नहीं पाते या ऐसा करते हुए बार-बार उनकी लय टूटती है।
 

मैडिटेशन क्यों करें?

i) अपने भ्रूण से अच्छा संबंध बनाने के लिए

ii) अपने दिमागी उतार-चढ़ाव पर काबू रखने के लिए

iii) यह प्रसव से पहले और बाद होने वाली चिंताओं को खत्म करने का काम करता है

iv) अपने शारीर में होने वाले बदलावों को लेकर आप पूरी तरह जानकार रहती हैं

v) आप पूरा खाना खाती हैं और आपका हाजमा दुरूस्त रहता है

vi) गर्भावस्था की वजह से होने बेचैनी के बावजूद आप पूरी और अच्छी नींद लेती हैं

vii) अपनी परेशानियों और उलझनों के बजाय एक नये जीव को जन्म देने को लेकर आपको पुरजोश और खुश होने का एहसास होता है।

 

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