पेरेंटिंग

कामकाजी अभिभावक और बच्चे का लालन-पोषण

Priya Garg
3 से 7 वर्ष

Priya Garg के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 22, 2018

कामकाजी अभिभावक और बच्चे का लालन पोषण

आज के समय में माता और पिता दोनों का नौकरी करना बहुत ही सामान्य बात है। ऐसे में अपने बच्चे को पालने की ज़िम्मेदारी उनके लिए भारी होती है। नौकरीशुदा होकर बच्चों की उचित परवरिश कर पाना, उनके लालन-पालन पर पूरा ध्यान दे पाना थोड़ा से कठिन हो जाता है क्योंकि बाहर के काम और ऑफिस की जिम्मेदारियाँ बहुत से समय ले लेती है। दोनों कार्यों में संतुलन बनाना एक कठिन कार्य है परंतु कुछ छोटी-छोटी चीजों को ध्यान में रखकर उसको आसान बनाया जा सकता है।

कामकाजी अभिभावकों के लिए कुछ सुझाव यहाँ दिए गए हैं जिसके मदद से काम और बच्चे के पालन-पोषण में संतुलन बनाया जा सकता है।

 

पहले से बनाएँ अगले दिन की योजना- कामकाजी माता-पिता के पास अक्सर ही समय का अभाव होता है। इस अभाव का सबसे बड़ा कारण चीज़ों या कामों का पहले से निर्धारित और नियोजित न होना है। समय का सही इस्तेमाल करने का सबसे सही तरीका है अपने अगले दिन की योजना बनाना। अपने अगले दिन के सभी कामों की एक सूची बना लें और उन कामों को उनकी आवश्यकता और जरूरत के हिसाब से क्रम में लगा लें। इसकी मदद से बचा हुआ समय अपने बच्चे के साथ बिताएँ। यदि संभव हो तो बच्चों को भी अपनी योजना में शामिल करें। उनसे जानें की उन्हें आपके साथ किस समय सबसे ज़्यादा मज़ा आता है। इस तरह की बातें जहाँ एक ओर बच्चों की आपका काम समझने में मदद करता है वहीं दूसरी तरफ उन्हें ये एहसास दिलाता है की वह आपकी दिन की योजना में महत्वपूर्ण है और आप उनके लिए यह कर रहे हैं।    

 

घर का समय केवल बच्चों के लिए- कामकाजी अभिभावकों अक्सर दफ्तर से घर आते ही घर के कामों में लग जाते हैं। माता-पिता का यह काम अक्सर बच्चों को निराश कर देता है क्योंकि उन्हे लगता है की उनके माता-पिता के पास उनके लिए समय ही नहीं है, वे उन्हें प्यार नहीं करते, उनके लिए ऑफिस और घर के काम ज़्यादा ज़रूरी है। ये नकारात्मक भाव बच्चों में गुस्से, द्वेष और जलन जैसे भावों को पैदा करते हैं। इस समस्या के समाधान का सबसे बेहतरीन तरीका तरीका बच्चों को घर के कामों में अपने साथ शामिल करना है। जैसे- सब्जी काटते समय उनकी मदद सब्जी धोने में ली जा सकती है। इससे बच्चों को माता-पिता के साथ बिताने के लिए समय भी मिल जाता है और वे कुछ अच्छी आदतें भी सीखते हैं। बच्चों को ये कभी भी महसूस ना होने दें की घर या ऑफिस का काम उनसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

 

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अपना गुस्सा और परेशानी बच्चों से रखें दूर- अक्सर ऑफिस के कामों या अन्य कारणों से हुई खीज, गुस्सा या परेशानी लोग घर तक ले आते हैं और अपनी इस खीज बच्चों पर चिल्लाकर निकालते हैं। ये सब आपके गुस्से को तो बढ़ाता ही है साथ-ही-साथ आपके बच्चे के मन में डर भी पैदा करता है और बच्चों को भावनात्मक रूप से माता-पिता से दूर करता है। कोशिश करें की ऑफिस की परेशानियों को आप ऑफिस तक ही छोडकर आएं। घर में बच्चों से मुसकुराते हुए मिले। आपके बच्चे ने पूरा दिन आपके घर आने का इंतज़ार किया है, उनके इंतज़ार का सम्मान करें।

 

बाटें दिन भर की बातें- अक्सर लोगों को घर आकर ऑफिस में हुई बातों को किसी के साथ बांटना अच्छा लगता है। ऐसा ही बच्चे के साथ भी होता है। उन्हें अपना दिन और उसमें हुई चीजों के बारे में बताना बहुत पसंद आता है। इसलिए जब भी समय मिलें तो बच्चे के साथ बैठ कर उनके दिन के बारे में जाने, उनके साथ अपनी ऑफिस की छोटी-छोटी बातें बाटें। ऐसा भी कहा जाता है की परिवार के साथ में बैठकर भोजन करने से रिश्ते मज़बूत होते हैं। ज़्यादातर माता-पिता कामकाज़ी होने के कारण दिन में बच्चों के साथ खाना खाने का समय नहीं निकाल पाते पर कोशिश करें की आप रात का भोजन अपने बच्चों के साथ ही खाएँ। इस तरह से एक-दूसरे की दिनचर्या को जानना, व्यक्ति और उसके स्वभाव की समझने में मदद करता है और अभिभावकों और बच्चों के बीच के रिश्ते को मज़बूत करता है।

 

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