Parenting

कैसे करें बच्चों को प्रोत्साहित

Parentune Support
3 to 7 years

Created by Parentune Support
Updated on Feb 03, 2017

कैसे करें बच्चों को प्रोत्साहित

सभी माता-पिता अपने बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहते है। पर बच्चों को प्रोत्साहित करने का सही तरीका क्या है?

ये सवाल जितना मुश्किल दिखता है उतना है नहीं। बच्चों को प्रोत्साहित करने के कुछ आसान तरीके नीचे दिए गए है:

उनकी कोशिश का सम्मान करें- यहाँ सम्मान से मतलब केवल ‘अच्छा’ या ‘बहुत अच्छा’ बोलना नहीं है अपितु यहाँ उनकी होसलावज़ाई करने से है। जैसे- यदि बच्चा सुबह जल्दी उठता है तो आप कह सकते है- ‘अरे वाह! आज आप इतनी जल्दी उठ गए। पता है जब मैं छोटा था/छोटी थी तो मम्मी/पापा मुझे बहुत मुश्किल से उठाते थे।’ इसी तरह उनके छोटे-बड़े कामों पर उन्हें अलग अलग तरह से प्रोत्साहित करें। उन्हे एहसास दिलवाए की जो उन्हे किया है वह कितना ज़रूरी और मुश्किल है। उनके प्रयास/कोशिशों का सम्मान करें।

रोज़ किए जाने वाले कामों को सीखने का जरिया बनाए- बच्चे रोज़ बहुत से काम करते है। बच्चों के कामों को देखें, उनसे सीखने और सिखाने की कोशिश करें। उनके कामों के बारे में बातचीत करें। उनसे काम करने के तरीके, उसमें आई मुश्किल, आदि के बारे में बातचीत करें।

उनके कौशल/काबिलियत की कद्र करें- सोचिए, कैसा हो अगर आपको कुछ ऐसा काम करने को कहा जाए जो आप कर ही नहीं सकते? चलिए इस सवाल को थोड़ा आसान बना देते है। क्या हो अगर आपको उड़ने के लिए कहा जाए और इसके बदले मे आपको वो सब चीज़ें दी जाए जो आपको पसंद है? क्या हुआ? सोच मे पड़ गए।

दरअसल यही हम अपने बच्चों के साथ करते हैं। हम उन्हें ऐसे काम करने के लिए कहते है जो शायद उनकी क्षमता से बाहर है। साथ-ही-साथ वो काम न कर पाने पर हम उन्हें सज़ा भी देते है।

ज़रूरी है की बच्चे की कौशल/काबिलियत की कद्र की जाए। उन्हें एक हद तक अलग-अलग कार्यों का अनुभव देना ज़रूरी है पर वह केवल तब तक जब तक उन्हे उससे कोई तकलीफ़ न हो। हो सकता है अनुभव लेने के बाद बच्चा वह काम करना पसंद न करें। ऐसे में उन्हें अपनी पसंद का कार्य चुनने दें। इस अवस्था में वे उस कार्य को और दिल से कर पाएँगे और उसके परिणाम भी उच्च होंगे।

बच्चों के साथ बातचीत करें- आज के समय में ज़रूरी है की बच्चों के साथ बातचीत की जाए। उन्हें समझा जाए और समझाया जाए। इसकी अहमियत एक उदाहरण की मदद से समझते हैं। हम ज्यादातर देखते हैं की हम बच्चों को अपना कमरा और अपनी चीज़ें साफ़ रखने के लिए कहते हैं। जब बच्चा ये काम करता है तो उसे एक टॉफी या चॉक्लेट दे दी जाती है और जब वह यह काम नहीं करता है तो उसे डांट दिया जाता है।

अब सोचिए की टॉफी या चॉक्लेट दिए जाने के वावजूद बच्चा वह काम करना (इस उदाहरण से सफाई करना) क्यों छोड़ देता है। दरअसल बात ये की हमने बच्चे को किसी चीज़/उपहार का लालच तो दे दिया पर उसको इस काम की अहमियत नहीं समझाई। ऐसे में जब बच्चा उस चीज़/उपहार से बोर हो गया तो उसने वह कार्य करना छोड़ दिया। इसलिए ज़रूरी है की बच्चों को किसी काम को करने की ज़रूरत और फायदे के बारे में बताया जाए।

उनका आदर्श बनें- ये कहावत बहुत पुरानी है- “जैसा व्यवहार आप स्वयं के साथ करवाना चाहते है वैसा ही आप दूसरों के साथ करें।”

ये कहावत बच्चों के पक्ष में भी सही साबित होती है। जैसा व्यवहार आप चाहते हैं की बच्चे करें आप उनके साथ और उनके सामने वैसा ही व्यवहार करें। जैसे- ‘आप’ बोल के बात करना, अपनी बात को आराम से कहना, गलती करने पर समझना, बैठ कर किताब पढ़ना, कमरे को साफ़ रखना, खाना खाने से पहले/खाना खाने के बाद हाथ धोना, किताबें पढ़ना, फोन का कम-से-कम इस्तेमाल करना, आदि।

आदर्श बनना बच्चों को अच्छी आदतें सीखने और उन्हे प्रोत्साहित करने का सबसे आसान और सरल तरीका है। 

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Comments()
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| Jul 20, 2017

I will take care

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| Feb 13, 2017

Ek dum sahi likha h. Jaisa behaviour apka hoga ..same bacche bhi karenge. Pahle mai kuch galti karne p apne bacchon p shout karti thi... then same type se meri elder daughter apni choti sisters p shout karti thi. I realize my fault nd maine apne ko change kiya. Ab meri beti bhi nahi karti aisa. Really parents ko apne behaviour p dhyan dena chahiye.

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