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क्या आप अपने बच्चों के रिजल्ट को हौआ बना रहे है...

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Created by Parentune Support
Updated on Sep 29, 2017

क्या आप अपने बच्चों के रिजल्ट को हौआ बना रहे है

बच्चे को अच्छे स्कूल/काॅलेज में पढ़ाने, उसके लिए अच्छे ट्यूशन/कोचिंग और पढ़ने-लिखने की सभी सहूलियतों का इंतजाम होने के बावजूद जब हमारे बच्चे परीक्षाओं में अच्छा नहीं करते तो मायूस होना स्वाभाविक है!! पर बात यहीं खत्म नहीं होती .... परीक्षाएं चलने वाले पूरे समय के दौरान बच्चों की सेहत की देखभाल और उनके खाने-पीने का ध्यान रखना, यह सब भी माता-पिता की ही जिम्मेदारी होती है।

जाहिर है, इतना सब करने के बाद अपने बच्चे के रिजल्ट को लेकर चिंतित होना जायज है पर आपने कभी सोचा है कि आपकी इस चिंता का बच्चे के ऊपर क्या असर होता है? क्या आप जानते हैं कि अपनी परीक्षाओं के नतीजों को लेकर बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है?

हो सकता है कि यह बात आपको अजीब लगे, लेकिन बच्चों को रिजल्ट का तनाव देने वाले उनके मात-पिता ही होते हैं। इस बारे में की गई जांचे बताती हैं कि बच्चों के रिजल्ट को लेकर माता-पिता की चिंता और और इसका दबाव बच्चे पूरे भविष्य प्रभावित कर सकता है और कई बार ज्यादा दबाब में आने पर बच्चे धैर्य खोने लगते हैं और गलत कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं।

एक अभिभावक के रूप में इन हालातों को निपटने के लिए सबसे पहली जिम्मेदारी आपकी ही होती है, क्योंकि यह समय बच्चों की हिम्मत बढ़ाने और उनका साथ देने का होता है न कि आपनी चिंताओं की वजह से उन पर दबाब बनाने का।

क्या करें रिजल्ट के तनाव को कम करने के लिए

  • अगर आप बच्चे के नतीजों को लेकर चिंतित होंगे, बच्चा अपने-आप तनाव में आ जाएगा इसलिए सबसे पहले अपनी भावनाओं पर काबू करें। घर के माहौल को खुशनुमा रखें। बच्चों के साथ मौज-मस्ती, हल्के-फुल्के मजाक करें या कोई गेम खेलें।
     
  • परीक्षाओं के नतीजों को लेकर होने वाला तनाव सभी बच्चों में एक जैसा होता है, फिर चाहे बच्चा पढ़ने-लिखने में तेज हो या कमजोर, इसलिए रिजल्ट आने से पहले या बाद में यदि बच्चे के हाव-भाव में किसी तरह का बदलाव महसूस करें, तो इसकी अनदेखी न करें।
     
  • ‘फेल हो जाओ तो मुंह मत दिखाना।’ बच्चे को ताने मारने से हमेशा बचें। माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य द्वारा कही गई इस तरह की बातें भावनात्मक तौर पर कमजोर बच्चे के दिलो-दिमाग पर बड़ी जल्दी असर करती हैं। इसके अलावा यदि बच्चा रिजल्ट के खराब होने पर किसी अप्रिय बात जैसे आत्महत्या करने या घर से भाग जाने की बात कहे तो इसे भूल कर भी मजाक में न लें। बच्चे को समझाएं और उसकी हिम्मत बढ़ाएं।
     
  • बच्चों को यह बात जरूर समझाएं कि अच्छे नतीजे जीवन में हर सफलता की गारंटी नहीं होते। कई बार हम कामयाब होते हैं और कई बार नाकामयाबी हाथ लगती है। नतीजा कुछ भी हो, ईमानदारी से मेहनत करना मायने रखता है।
     
  • बच्चे के रिजल्ट को लेकर अपने मन में उम्मीदों का पहाड़ न खड़ा करें। अपने बच्चे की काबलियत और क्षमताओं को पहचाने और बच्चे से उतनी ही अपेक्षा करें।
     

अगर आपको लगता है कि बच्चे के रिजल्ट को लेकर केवल आप ही तनाव में होती हैं तो यह आपकी गलतफहमी है। रिजल्ट का तनाव आपसे ज्यादा बच्चे पर होता है पर अपने साथ-साथ बच्चे को तनावमुक्त रखना केवल और केवल माता-पिता के हाथ में होता है इसलिए बच्चे के रिजल्ट को अपने मान-सम्मान का मुद्दा न बनाएं और न ही इसे बच्चे के लिए किए गए अपने त्याग के बदले मिलने वाली सौगात समझें... ऐसा करना बड़ी आसानी से आपके तनाव को दूर कर देगा। 

  • 3
Comments()
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| Oct 05, 2017

very informative..

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| Sep 28, 2017

मैं पूरी तरह सहमत हूं कि इन परीक्षाओं का बच्चे की बाद कि jinadagi से कोई लेना देना नही है।यह जरूरी नही है कि जो बच्चे गणित या भूगोल मे अच्छे अंक नही ला पा रहे है वो भाविष्य में आगे चलकर कुछ भी नही कर पायेगा।। हाँ अगर हम बच्चे के अंको को लेकर कोसते रहेंगे तो शायद हो सकता है वो खुद पर भरोसा खो बैठे और आत्मविशवास की कमी की वजह से आगे चलकर एक नाकामयाब इंसान बन जाएं। इस ब्लॉग को शेयर करने के लिऐ बहुत बहुत धन्यवाद। उम्मीद करती हूं माता पिता अंको की जगह बच्चे पर ध्यान देंगें।

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| Sep 28, 2017

True always motivate ur kids,never discourage them, it will definately effect their feelings,thinking. Thanx for wonderful information.

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