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पेरेंटिंग

क्या आप एडॉप्शन के बारें में सोच रहे है ? इसे पढ़ना न भूले

Priya Garg
1 से 3 वर्ष

Priya Garg के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Dec 07, 2019

क्या आप एडॉप्शन के बारें में सोच रहे है इसे पढ़ना न भूले
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

वह समय गया जब बच्चा केवल तब गोद लिया जाता जब माता या पिता में से कोई एक इसमें सक्षम नहीं होता था। आज कल सिंगल पेरेंट जैसे विचार बढ़ते का रहे हैं। अब कुछ ऐसे दंपति भी है जो अपनी इच्छा से बच्चे को गोद लेना चाहते हैं। एक बच्चे को गोद लेने का मतलब परिवार में एक सदस्य को जोड़ना है। इसके लिए बहुत-सी बातों को ध्यान रखना ज़रूरी हैं, ये जानने के लिए नीचे दी गई चीज़ें पढ़िए-

गोद लेने से पहले खुद को तैयार करें- बच्चा गोद लेने का मतलब होता है किसी और के बच्चे को अपना बनाना, उसे अपनाना और उसे अपने परिवार का हिस्सा बनाना। इसके लिए जो सबसे ज़रूरी है कि जो भी बच्चा गोद ले रहा है वह खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लें। इसके साथ ही अपने परिवार को भी तैयार करने की ज़िम्मेदारी लें। यदि आपके पहले से भी कोई बच्चा है तो उसे भी यह समझाएँ की आने वाला उसका भाई-बहन उसे भी प्यार करेगा। ज़रूरी है की परिवार में एक नए सदस्यों को शामिल करने से पहले खुद को और अपने परिवार को मानसिक रूप से तैयार कर लें।

संस्थान कि करें जाँच-पड़ताल- आज कल बहुत-सी ऐसी संस्थाएँ खुल गई हैं जहाँ चोरी या अगवा किए हुए बच्चे को कम दामों या कम कागज़ी कार्यवाही के साथ बच्चों को गोद दिया जाता है। लेकिन ऐसी संस्था से बच्चा गोद लेने के बहुत से नुकसान उठाने पड़ सकते हैं ऐसा भी हो सकता है कि आपको अपने बच्चे को वापिस देना पड़े। किसी भी संस्था को चुनने से पहले यह जाँच करलें की उनके पास संस्था का और बच्चा गोद देने का लाईसेंस हो।

कागजात रखें तैयार- हर संस्था का बच्चा गोद देने का कोई नियम होता है। कुछ ज़रूरी कागजात होते हैं जिनका होना ज़रूरी होता है। अच्छा होगा कि आप ऐसे ज़रूरी कागज़ के पहले में पहले ही जानकारी जमा कर लें। गोद लेने की फ़ार्मैलिटि शुरू होने से पहले ही वे सब ज़रूरी कागज़ तैयार करके रख लें। ये ज़रूरी कागज़ परिवार की फोटो, शादी का प्रमाणपत्र, सिंगल पेरेंट होने का सबूत, घर का पता, आदि हो सकता है।

इन सभी औपचारिकता के बाद परिवार में एक नया सदस्य शामिल होता है। परंतु संस्था के साथ संबंध इसके बाद भी बना रहता है। जब बच्चा अपने घरपहुँच जाता है तो संस्था के लोग निरंतर उससे मिलने आते रहते हैं। इन सभी बातों के साथ-साथ यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है की इन्फैंट बेबी/ नवजात शिशु सिर्फ 25 से 39 वर्ष तक की उम्र के अभिभावकों  को दिए जाते हैं. इस से अधिक आयु के बच्चे 40 से 46 उम्र के व्यक्ति को गोद दिए जाते हैं. जिन अभिभावकों के पास पहले से ही 2 बच्चे होते हैं उन्हें किसी एक अभिभावक की जिम्मेदारी पर बच्चा दिया जाता है. अगर आप शादीशुदा हैं तो शादी के कम से कम 2 साल पूरे होने के बाद ही बच्चा गोद ले सकते हैं। गोद लेने के बाद बच्चे का मूल जन्म प्रमाणपत्र लेना न भूलें. अगर बच्चा उसके माता-पिता से ही  से गोद  लिया जा रहा है तो इस बात का भी खयाल रखें कि पहले वाले माता-पिता के पेरैंटल राइट खत्म करवाने के बाद ही बच्चे को गोद लें. अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप कानून के जानकार से मदद लेना न भूलें.

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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