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क्या हर मसाले आपके शिशु के लिए सुरक्षित हैं ?

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क्या हर मसाले आपके शिशु के लिए सुरक्षित हैं

मसाले हमारी रसोई का अभिन्‍न अंग है। हम अपनी रसोई में कई तरह के मसालों का इस्‍तेमाल करते हैं, जैसे हल्दी, धनिया, जीरा, मेथी, अजवाइन, हींग आदि रोजाना के खाने में शामिल होते है। लेकिन यह मसाले खाने को सुगंधित और लजीज ही नहीं बनाते बल्कि सेहत को भी दुरुस्त रखते हैं। आपने सुना होगा कि हर खाने पीने की चीज की एक तासीर होती है। इनका सही तरीके से इस्तेमाल हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है और रोजाना के ज्‍यादातर मसालों के औषधीय गुणों के बारे में हमें जानकारी ही नहीं होती।
 

जायफल : यूं तो जायफल को सर्दियों में उपयोगी माना जाता है लेकिन इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में इसे साल भर उपयोगी माना जाता है। यह वातनाशक और कृमिनाशक होता है। जायफल भोजन में स्वाद व खुशबू के लिए डाला जाता है। इसके औषधीय गुण भी कम नहीं हैं। बच्चों को दस्त, जुकाम व खांसी होने पर जायफल को गर्म  पानी में घिसकर चटाया जाता है। इससे आपके बच्चे की भूख बढ़ेगी और खाना भी ठीक से पचेगा।  हमेशा इस बात की सावधानी बरतें कि जायफल बहुत कम मात्रा में ही उपयोग किया जाता है।
 

हींग : छोटे बच्चों के पेट में गैस बनना आम बात है। 6 महीने का बच्चा बहुत छोटा होता है। बच्चा कई बार जरूरत से ज्यादा दूध पी लेता है जिससे उसे पचाने में परेशानी होती है। मां के दूध के अलावा बच्चे को डिब्बा बंद दूध पिलाने से भी पेट से जुडी दिक्कतें हो सकती हैं। बच्चे की डाइट में आए बदलाव के कारण उनको कब्ज की शिकायत भी हो जाती है। छोटे बच्चों को जरा-सी बात के लिए दवाई देना भी ठीक नहीं है। इसके लिए कुछ छोटे-छोटे उपाय अपना कर भी बच्चे को आराम दिलाया जा सकता है। । पेट में गैस बनने पर थोडी सी हींग को पानी में डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बच्चे की नाभि के आसपास लगाएं। इससे गैस की दर्द से बच्चे को राहत मिलेगी। अगर बच्चे को निमोनिया हो जाए तो उसको हींग का पानी थोड़ी-थोड़ी देर पर पिलाते रहें, जल्द ही निमोनिया से राहत मिल जाएगी। पसलियों में दर्द होने पर आप पानी में हींग घोलकर वह पानी पसलियों पर लगाएं। जल्द ही पसलियों के दर्द में राहत महसूस होगी।
 

काली मिर्च : काली मिर्च न केवल खाने का स्वाद बढ़ाने में उपयोगी है। पेट के रोग और सभी तरह के बुखार को दूर करने में इसका विशेष प्रयोग होता है। यह भूख बढ़ाती है। कालीमिर्च को गाय के दही में घिसकर आंखों में लगाने से रतौंधी मिटती है। कालीमिर्च चूर्ण व शहद चाटने से सर्दी, खांसी में लाभ होता है। याद रखें, काली मिर्च बच्चों की पहुँच से दूर रखें, यह उनकी त्वचा, आँखों आदि के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
 

हल्दी : हल्दी पूरी तरह से एंटीबायोटिक होती है। हल्दी के सेवन से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बीमारी होने की आशंका कम रहती है। हल्दी के इस्तेंमाल से सर्दी जुकाम भी ठीक हो जाता है। दूध में हल्दी मिलाकर पीने से शरीर के जख्म जल्दी भर जाते हैं । लेकिन यह ध्यान देने योग्य बात है कि बच्चों के लिए बहुत कम मात्रा में हल्दी का प्रयोग किया जाए, अन्यथा उन्हें नुकसान हो सकता है।
 

मेथी : वैसे तो मेथी देखने में छोटी होती है लेकिन यह कई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी गुणों से भरपूर होती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, नियासिन, पोटेशियम और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसका सेवन करने से पाचन क्रिया पर सकारात्मक असर पड़ता है और कब्ज, गैस जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। अगर आपके घर में किसी बच्चे के पेट में कीड़े हो गए हैं तो हरी मेथी का इस्तेमाल करना काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए मेथी का रस बच्चे को पिलाएं। इससे उसके पेट के कीड़े मर जाएगे।
 

यद्यपि ये सभी मसाले शिशुओं के लिए काफी फायदेमंद हैं लेकिन जरा सी असावधानी से लाभ के बजाय बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि आप अपने बच्चे की किसी भी समस्या के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें, और अपेक्षित लाभ न मिलने की दशा में अपने चिकित्सक से जल्द से जल्द संपर्क करें। 

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