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छुट्टियों में कैसे रखें बच्चों को व्यस्त - 5 तरीके

Parentune Support
3 से 7 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 10, 2018

छुट्टियों में कैसे रखें बच्चों को व्यस्त 5 तरीके

छुट्टियां समय होता है खुल कर सोचने और कुछ नया करने का। छुट्टियां हमें रोज-रोज एक ही काम को करने से होने वाली बोरियत को खत्म करने और नयी-नयी चीजों के बारे में जानकारी हासिल करने का मौका देती हैं। यह कितना मजेदार होगा कि अगर आप समझदारी से अपने शिशु को इन छुट्टियों के दिनों में व्यस्त रख सकें। अपने छोटे षिषु के साथ एक अच्छा समय गुजारने पर आपको आपसी तालमेल के बढ़ने और संतुष्टि का एहसास होता है।

दीवाली का छुट्टियां आने ही वाली हैं और ये रहे वो 5 तरीके जो आपके शिशु को कुछ नया सीखने और करने में व्यस्त रखेंगेः

1. पढ़ना और पढ़ाना

जब अपने शिशु के लिये पढ़ते हैं या वह खुद पढ़ता है तो उसकी मदद करते हैं तो यह उसे बहुत अच्छा लगता है। पढ़ना अच्छी तरह से ध्यान लगाना सिखाता है, उसे बोलचाल करना और गौर से सोचना सिखाता है। वहीं दूसरी ओर छोटी और एक लय वाली कविताऐं उनकी सूझ-बूझ और अंदाजा लगाना बढ़ाती हैं क्योंकि शिशु उन कविताओं की लय और शब्दों को पहले से जान लेता है। शिशु के लिये पढ़ना और उसे पढ़ाना दोनो भाषा सीखने में सहायता करते हैं। आप किताबें खरीद सकते हैं, किराये पर ले सकते हैं या पढ़ने वाली रोचक किस्से/कहानियां डाउनलोड कर उन्हें छाप सकते हैं। हालांकि यह पक्का कर लें कि यह सब आपके पास पहले से तैयार रहे जिससे छुट्टी वाले दिनों में इसे तुरंत शुरू करने में आसानी हो।

2. मैदानी खेल

मंहगे एयरकंडीशन माॅल और इसमें बने गेम्स जोन का आदी होने की वजह से बच्चा किसी पार्क, बगीचे या मैदान में खोेया-खोया सा महसूस करता है। आप छुट्यिों में उन्हें बाहर जाकर खेलने के लिये उनका हौसला बढ़ा सकती हैं। यह बच्चों को सभी प्रकार की मोटर-गाड़ियों की जानकारी बढ़ाने के लिये सबसे सटीक जगह होती है। अच्छे से गेंद संभालने का अभ्यास जैसे गेंद पकड़ना, लपकना और फेंकना; सावधानी से करने वाले कामों ध्यान से करने का अभ्यास जैसे झूले में धक्का देना, गाड़ी को खींचना और चलने-फिरने वाली चीजों को उठाना और ले जाना ये सभी खुली जगह पर ही अच्छी तरह से बढायी जा सकती है। वास्तव में जब आप अपने शिशु के साथ खेलते हैं आप अपना बचपन फिर से जी रहे होते हैं।

3. कला और शिल्प

अपने पहले स्कूल जाने वाले शिशु के लिये चित्र बनाना उसकी सोच और अहसास को जाहिर करने के सबसे असरदार तरीकों में से है। सब्जियों के चित्रों में रंग भरना, उंगलियों से रंग भरना, खाचों की तर्ज पर लिखना, चित्रों का काट कर चिपकाना, बधाई कार्ड बनाना, रूई को चिपका कर चित्र बनाना, मोम के रंगों से रंग भरना, स्केच पैन से लकीरें खींचना जैसे बहुत से तरीके हैं। ‘औरीगेमी’ या कागज को मोड़ कर या मिट्टी से आकृति बनाना जैसी चीजें भी बच्चों को व्यस्त रखती हैं। और आखिरी में शिशु के बनाये हुए चित्र और वस्तुओं को परिवार के लोगों को दिखाना जिससे वह एक इनके बनाने पर गर्व महसूस कर सके।

4. फिल्में और नाटक

चूंकि शुरूआती सालों में देखने वाली फिल्मों से शिशु के सोचने-समझने पर असर होता है और उनसे उसका उत्साह बढ़ता हैं इसलिये उसके मनोरंजन के लिये फिल्मों और नाटक का चुनाव बड़ी सावधानी से करें और इसके साथ यह भी ध्यान रखें कि एक मजेदार तरीका शिशु के मनोविज्ञान को बढ़ानें में असरदार होता है। जिंदगी के बुनियादी सबक खास बच्चे के हौसले पर खत्म होने वाली फिल्मों में होते हैं। यह भी यह एक आसान और साधारण तरीका है जहाँ आपको केवल उसके बगल में बैठना है, बस पाॅपकार्न और और चिप्स लेकर।

5. खाना पकाना

क्या आप चाहती हैं कि शिशु बड़ा और जिम्मेदार महसूस करे तो उन्हें खाने-पकाने वाले कामों में शामिल करें, आप उनकी दिलचस्पी और काम देखकर आप दंग रह जायेंगी। यह तरकीब उनमें जोश भरती है और वे आपकी हिदायत लेना और उस पर चलना शुरू करते हैं। शिशु के साथ मिलकर बनाया हुआ खाना परोसने और खाने की तारीफ की वास्तविक खुशी आपकी यादों में बस जाती है। आप इंटरनेट की सहायता से छोटे बच्चों को खाना बनाना सिखाने की विधि पता कर सकती हैं, विश्वास कीजिये, आपको इसके लिये वहाँ बहुत कुछ मिलेगा।

इन मजेदार तरीकों से आने वाली छुट्टियों को शिशु के लिये नई-नई बाते जानने और उसकी सोच-समझ को बढ़ाने वाली पहल में बदलें। इसमें आप अपने जीवनसाथी और परिवार के दूसरे सदस्यों को शामिल कर सकते हैं। इससे न केवल आपके शिशु बल्कि आपका भी सम्मान बढ़ेगा और आप अगर इसे उत्साह और रूचि से इसे कर पाये तो अगली बार का इंतजार करें।

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