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दूषित हवा आपके बच्चे पर कैसे असर करती है

Parentune Support
3 to 7 years

Created by Parentune Support
Updated on Feb 02, 2017

दूषित हवा आपके बच्चे पर कैसे असर करती है

मैं गुड़गांव में रहता हूँ जो एक ‘मिलेनियम सिटी’है। यहाँ की हवा लगातार इमारतों के बनने और व्यापार का गढ़ होने की वजह से जानलेवा हद तक खराब हो चुकी है।

इसलिये मैने रोजमर्रा की चीजों के बारे में पढ़ना शुरू किया जिन्हे हवा में प्रदूषण को कम करने और इसमें सुधार लाने के लिये मैं कर सकता हूँ, खासकर अपने घर में क्योंकि हम बाहर के लिये बहुत कुछ नहीं कर सकते।

उनमें से ये बातें ज्यादा काम की हैं।

खराब हवा कई तरह से बड़ों और बच्चों, दोनों की सेहत पर असर करती है। पिछले कई सालों में बीमारी की दर तेजी से बढ़ी है, खासकर बड़े शहरों में। शायद इस समय दमा सबसे आम बीमारी है जो एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और सांस की नली में संक्रमण की वजह से होती है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर इस दूषित हवा का असर दूसरों की तुलना में ज्यादा जल्दी होता है।

दूषित हवा से बड़ों की तुलना में बच्चों को ज्यादा ख़तरा क्यों होता है?

1. जन्म के समय बच्चे के फेफड़े और उसके शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत कम होती है और यह युवा होने तक धीरे-धीरे बढ़ती है। बच्चे के बढ़ते अंग और जहरीली हवा और अन्य दूषित चीजों को झेल पाने के लिये नाजु़क होते हैं इसलिये बच्चे बड़ी जल्दी इनके प्रभाव में आ जाते हैं और लम्बे समय तक इसका असर उनके शरीर में बना रहता है।

2. उनके सांस लेने वाले हिस्से की कोषिका की पतली परतें किसी भी चीज को वहाँ से निकलने देती हैं।

3. बच्चे के फेफड़ों की सतह का हिस्सा उनके वजन की तुलना में अधिक बड़ा भी होता है जिससे वे अपने वजन के हिसाब से हर किलो 50 प्रतिषत हवा सांस में लेते हैं।

4. बच्चे के सांस लेने की दर भी बड़ो से ज्यादा होता है।

5. बच्चे नाक के बजाय अपने मुंह से ज्यादा सांस लेता है जो सांस के साथ जाने वाले कणों को फेफड़ों तक पंहुचने से पहले छान देता है।

6. बच्चे अपना ज्याद समय (स्कूल या खेल के मैदान में) बाहर बिताते हैं जिसकी वजह से वे बड़ों की तुलना में बाहरी हवा में ज्यादा सांस लेते हैं जहाँ गाड़ियों और अन्य चीजों से होने वाला प्रदूषण सामान्य से ज्यादा घना होता है।

किस दूषित हवा का बच्चेओं की सेहत पर ज्यादा असर होता है?

हवा को दूषित करने वाली चीजें - इसमें पर्टिक्युलेट मैटर और ओजोन का सबसे अधिक चलन है।

फाईन पर्टिक्युलेट मैटर 2.5 - कई जगहों से आती है जैसे डीज़ल इंजन, जंगल की आग का धुआं, खेत का कचरा जलाने पर और इमारतें बनने वाली जगह से। यह हमारे शरीर के रक्षा कवच को आसानी से पार कर लेती हैं और फेफड़ों में गहराई तक अंदर जाती हैं। पर्टिक्युलेट मैटर से खांसी और सांस लेने की समस्या होती है और यह दमें की बीमारी को और बिगाड़ देती हैं। कई जांचों से पता चला है कि इस दूषित हवा में ज्यादा देर तक रहने से बच्चे के फेफड़ों के बढ़ने और उनके काम करने पर बुरा असर पड़ता है।

जमीनी स्तर ओजोन - को ओ3 के नाम से भी जाना जाता है। यह सूर्य की किरणों से होने वाले रासायनिक असर की वजह से, गाडियों से निकलने वाले धुऐं, कारखाने और उद्योगों से निकलती हैं। ओजोन सांस की समस्याओं की सबसे बड़ी वजह है जिससे फेफड़ों में सूजन, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, घबराहट, खांसी और दमा जैसी समस्याऐं होती हैं। इस दूषित हवा में ज्यादा देर तक रहने से हमारे फेफडों के काम करने पर बुरा असर पड़ता है।

हवा को दूषित करने में नाइट्रोजन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, लीड और सल्फर डाइआक्साइड भी शामिल हैं। जब भी हम तेल, गैस, डीज़ल, लकड़ी या कोयले को ईंघन के लिये जलाते हैं तो यह सब हवा में मिल जाती हैं।

हवा का प्रदूषण बच्चे के बढ़ने और उसकी सेहत पर क्या असर डालता है।

दूषित हवा में सांस लेने से बच्चे के बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि उसके सांस लेने वाले अंग की बीमारी और अनजान कणों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है।

  • दमे को और बिगाड़ देता है।
  • सांस के संक्रमण को बढ़ाता है।
  • फेफड़ों के ठीक से काम करने में कमी कर देता है।
  • एलर्जी करने वाली चीजों को बर्दाष्त करने के लिये बच्चे को और नाज़ुक बना देता है।

दूषित हवा के असर से अपने बच्चे को बचाने के लिये हम क्या कर सकते हैं?

1. घर के फर्ष को साफ रखें - अगर हो सके तो दो बार पोछा लगायें। कीटाणु खत्म करने वाला अच्छा पोछा लगाने से आप एलर्जी करने वाले कणों और और धूल को बाहर निकाल सकते हैं।

2. पैरदान - घर के मुख्य दरवाजे के साथ-साथ घर के हर कमरे के बाहर एक बड़ा और अच्छा पैरदान रखें। पैरदान घर में आने वाली धूल, कीटनाषक और अन्य दूषित चीजों को कम करता है।

3. बाहर से घर के अंदर आने वाली धूल और गंदगी को कम करने के लिये जूते-चप्पल घर के बाहर उतारने का ध्यान रखें।

4. कालीन और आसन का इस्तेमान कम करें खासकर अपने बच्चे के कमरे में क्योंकि इनमें गंदगी जमती है।

5. पर्दे की जगह खिड़कियों पर स्क्रिीन लगायें क्योंकि उनमें धूल कम जमती है।

6. पंख झाड़न के बजाय गीले कपड़े से धूल हटायें। छत के पंखे और फ्रिज का ऊपरी हिस्सा जरूर साफ करें।

7. घर में नमी का स्तर सेहत के लिये अच्छा होना चाहिये। नमी धूल के कणों को अपनी ओर खींचती है। घर में नमी का स्तर ठीक रख कर आप धूल और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले कणों को दूर रख सकते हैं।

8. घर की नमी से छुटकारा पाने के लिये यह करें - खाना बनाते समय, हवा बाहर फेंकने वाले पंखे का इस्तेमाल करें। पौधों को ज्यादा पानी न दें। कपड़े घर के भीतर न सुखायें। टपकने वाले नलों को सुधारें। एयरकंडीषन से पानी टपकने वाले हिस्से को सुखायें।

9. बनावटी खुष्बू वाल चीजों का कम इस्तेमाल करे - कपडों को धोने, कोमल बनाने और साफ करने वाले डिटर्जेंट, बालों और शरीर की बदबू मिटाने वाले स्प्रे से दर्जनों नुकसानदायक रसायन निकलते हैं जिससे हवा दूषित होती है। इसलिये प्राकृतिक और खुद सुगंध देने वाली चीजों का इस्तेमाल करें।

10. एलर्जी का खतरा कम करने के लिये तकिये के खोल, चादरें और अन्य इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को नियम से धोयें।

11. घर में सिगरेट-बीड़ी न पीने दें, इस पर रोक लगायें। तंबाखू की चीजों में तेजी से प्रदूषण बढ़ाने वाले हजारों कण होते हैं जो घर के अन्दर के माहौल को दूषित करते है।

12. ऐसे पौधे लगायें जो घर के अंदर पनप सकें। यह जीवित लोगों के जैसे हवा को साफ करते हैं और हवा में मौजूद रसायन कणों को सोख लेते हैं। मनीप्लांट, ऐलोवेरा, बांस या सुपारी का झाड़, स्पाईडर प्लांट, रबर प्लांट, खजूर और इंग्लिष आईवी कुछ ऐसे पौधे हैं जो हवा को साफ रखने में मदद करते हैं।

13. हिमालय नमक का दीपक - यह हिमालय नमक की सिल्ली से बना हुआ दीपक है जिसमें एक बल्ब लगा होता है। यह दीपक घर के अंदर हवा को साफ रखने और एलर्जी वाली चीजों को कम करने में मदद करता है।

अच्छी चीजें खरीदें -

  • समय के अनुकूल कम ऊर्जा लेने वाले घरेलू उपकरण और एयरकंडीषन खरीदें।
  • ऊर्जा की कम खपत वाले बल्ब और अन्य बिजली के उपकरण इस्तेमाल करें और जरूरत न होने पर बंद रखें।
  • गाड़ी खरीदते समय ईंघन की कम खपत वाली गाड़ी को चुनें।
  • ऐसी चीजें खरीदें जिन पर ज्यादा पैकिंग न हो और वह दुबारा इस्तेमाल की जा सके।

बच्चों के लिये बातें -

  • घर के बाहर के कामों को सुबह-सुबह करने की कोषिष करें।
  • ज्यादा भीड़-भाड़ वाले समय और ज्यादा वाहन चलने वाली जगह (वहाँ प्रदूषण बहुत ज्यादा होता है) पर जाने से बचें।
  • घर के अंदर खेले जा सकने वाले खेलों की योजना बनायें और एक शांत, खुली और हवादार जगह पर खेलें।
  • बच्चे के रोज के कामों में सांस लेने की कसरत शामिल करें।
  • विटामिन-डी का स्तर रोज जांचे।
  • बच्चे का टीकाकरण करायें और टीकाकरण भूलें नहीं।

बच्चे का पोषण बढ़ाने में मदद करने वाली बातें

  • ज्यादा प्रोटीन वाला खाना दें
  • वसा और कार्बोहाइड्रेट्स ठीक से दें, न कम न ज्यादा
  • नमकीन चीजें देना सीमित करें
  • तरल पदार्थ खूब पीने दें
  • मल्टीविटामिन और कैल्सियम की खुराक दें (बच्चे के डाक्टर से सलाह के बाद)
  • पेट में गैस बढ़ाने वाली चीजों से बचें।

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