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पेरेंटिंग

बात-बात पर ‘न’ कहने की आदत से छुटकारा पाने के तरीके

Jasmeet Kaur Deep
3 से 7 वर्ष

Jasmeet Kaur Deep के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Dec 04, 2019

बात बात पर न कहने की आदत से छुटकारा पाने के तरीके
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

‘हाँ’... ‘हाँ’ केवल एक शब्द नहीं है, ये एक अहसास, एक सोच है। यह आपके अंदर सकारात्मकता पैदा करने वाला मनोभाव है। आपने गौर किया होगा कि जब किसी सवाल का जवाब ‘हाँ’ में मिलता है, तो आपको खुशी होती है तो अपने बच्चे में इस खुशी और विश्वास देने वाले अहसास को जगाने के बारे में जरा सोचिए, ये वो अहसास है जो आगे आने वाले पूरे समय में उसे मानसिक तौर पर मज़बूत बनाए रखेगा।

तो चलिए, पहले देखते हैं कि ‘न’ बोले जाने पर क्या होता है?

‘न’ बोलने का बच्चे पर असर

जैसे ही आपका शिशु घुटनों पर चलना शुरू करता है, उसके मुंह से निकलने वाला ‘न’ माता-पिता का सबसे पसंदीदा शब्द होता हैः ‘नहीं, उसे मत छुओ’, ‘नहीं, ऐसा मत करो’, ‘नहीं, वहां नहीं जाते’, ‘नहीं, इसे मुंह में मत डालो’, ‘नहीं, ये मत खाओ’, ‘नहीं, शैतानी मत करो’, ‘नहीं, दौड़ो मत’, कूदो मत’- बस न, न, न!!!! कल्पना कीजिये कि अगर आपको हर उस बात के लिये ‘न’ कहा जाए जो आप करना चाहते हैं, जैसे- आपका अधिकारी आपको ‘न’ कहे, आपके माता-पिता ‘न’ कहे और यहाँ तक कि आपका जीवनसाथी भी आपको ‘न’ कहे तो कितना गुस्सा आयेगा .... तो अपने बच्चे के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जाए।

याद रखिएः आप जितना ज्यादा ‘न’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं, बच्चे का आत्मविश्वास उतना ही कमजोर होता है। उसे अपने कामों और खुद को लेकर भरोसे की कमी का एहसास होता है। हर बार जब आप ‘न’ कहते हैं, तो इससे बच्चे में उसके आस-पास की चीजों के बारे में जानने और पता लगाने की दिलचस्पी और जोश कम होता है, और धीरे-धीरे बच्चा इंकार किये जाने के डर से किसी चीज को लेकर पहल करना बंद कर देता है।

ऐसा करने पर कई बार बच्चे बागी भी होने लगते हैं - और हर बात पर ‘न’ कहने वाले माँ-बाप को उनकी बात का जवाब भी ‘न’ में ही मिलता है।

मिसाल के तौर पर - मेरी एक खास दोस्त ने शिकायत की कि उनकी बेटी उसकी (मेरी दोस्त की) हर बात पर ‘न’ बोलती है... किसी से नमस्ते करने के लिये कहा जाये या बैठक के कमरे से खिलौने उठाने के लिये।

इसका वजह सीधी सी है - मेरी दोस्त को भी हर बात पर ‘न’ कहने की आदत है, तो उसकी बेटी में भी अपनी माँ के इस बर्ताव की छाप दिखती है। इसलिए मैंने अपनी दोस्त को सीधे शब्दों में बता दिया कि जब हर बात पर ‘न’ कहने की शुरूआत तुमने खुद की है तो उसे दोष देने से क्या होगा?

माता-पिता होने के नाते आपको क्या करना चाहिए?

आप बेशक जानना चाहेंगेः क्या ऐसा मुमकिन है कि हर बात का जवाब ‘हाँ’ में दिया जाए? हमें ‘हाँ’ या ‘न’ में जवाब देने के लिये कहाँ फर्क करने की जरूरत है। क्या मुझसे उस समय ‘हाँ’ कहने की उम्मीद की जानी चाहिए जब मेरे बेटे की नाक बह रही हो वह आईसक्रीम खाने के लिये कहे?

यहाँ आपको ध्यान रखना है कि जब मैं आपसे एक ‘हाँ’ कहने वाले माता-पिता बनने का आग्रह करती हूँ तो इसका मतलब ये नहीं कि आपको अपने बच्चे की हर इच्छा को पूरा करना है। मैं आपसे ये नहीं कह रही कि आप अपने बच्चे को चाकू या आग से खेलने के लिए भी न मना करें पर यहाँ आपको ‘न’ कहने का वो तरीका जानना है जहाँ मनाही को हिदायत के तौर पर कहा जाए जिससे आपके ‘न’ कहने के बावजूद उसमें कठोरता का अहसास न हो और इसके लिये आपको यह करना चाहिएः

ध्याना हटानाः एक तरीका जो सबसे कारगर है वो है बच्चे का ध्यान भटकाना। अगर आपका बच्चा टेबल पीट रहा है या चीजों को यहाँ-वहाँ फेंक रहा है तो गुस्सा होने और चिल्ला कर ‘न’ कहने से अच्छा है कि उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करें। उसे वहाँ से हटाएं और किसी और जगह ले जाकर उसे कोई जिम्मेदारी दें।

चीजों का तर्जुबा लेने देंः अगर आपका बच्चा छुरी-कांटे से खेलने की जिद करे तो उसे ऐसा करने दें जिससे वह इन चीजों का तर्जुबा ले सके पर यह सब अपनी निगरानी में होना चाहिए। इसके साथ-साथ उसे बड़े प्यार और समझदारी से यह भी बतायें कि क्यों और कैसे इन चीजों के साथ खेलना खतरनाक है। 

उनकी बातों को टालनाः यह तरीका उन बच्चों के साथ बहुत कारगर होता है जिनकी उम्र 4 साल से ज्यादा है। आमतौर पर 3 साल से कम के बच्चों की समझ कमजोर होती है लेकिन जहाँ तक हो सके झूठे वादे करने से बचें। वो क्या चाहते हैं इसे पूरे ध्यान से सुनें और फिर उनसे समझदारी से बात करें - उनकी हर मांग बेमतलब नहीं होती। पता करें कि आपका बच्चा क्या चाह रहा है, इस बारे में खुल कर बात करने की कोशिश करें और समय दें  - ऐसा करने से आप बच्चे के साथ सेहतमंद बातचीत कर पाएंगी और हो सकता है कि आपको कोई कहानी बनाने का मौका मिल जाए और बजाय सीधे-सीधे यह कहने के ‘तुम्हे वो चीज नहीं मिल सकती जो तुम चाहते हो’ कहने से आप बच जायें। ये तरीका वाकई में मददगार है! आपका बच्चा खुद से आपकी बात सुनेगा अगर आप पूरे मन से कोई बात उसे समझाएंगी।

जिद से निपटनाः पहली बात जो आपको हमेशा याद रखनी है कि बच्चे को दूसरे लोगों के सामने बेइज्ज़त न करें। अपनी एक छात्रा से क्लास में सभी बच्चों के सामने उससे कुछ कहने के बजाय मैंने उसे बाहर ले जाकर या अकेले में बात करना शुरू किया और ऐसा करने के बाद मैंने उसमें असाधारण बदलाव देखा है। तो आपका बच्चा भी अगर किसी चीज को लेकर जिद करे जो उसे अकेले में या दूसरे कमरे में ले जायें और वह क्या चाहता है इस बारे में बात करें। उसे प्यार से गले लगायें और समझायें कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिये और फिर उसके बर्ताव में आने वाले बदलाव को देखें।

याद रहेः अगर आप चाहती हैं कि दूसरे लोग आपके बच्चे के साथ प्यार और इज्ज़त से पेश आयें तो आपको भी उसके साथ इसी तरह पेश आना होगा।

तो माता-पिता होते हुये क्या आप ‘हाँ’ कहने की अहमियत को जानकर इस अपनाने के लिये तैयार हैं? हमारे इस सुझाव पर चलने की कोशिश कीजिए और हमें बताइए कि ऐसा करने से आपको क्या मदद मिली। 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

  • 17
कमैंट्स ()
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| Jul 21, 2017

very nice.

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| Jul 21, 2017

Exquisite. Really we should implement it.

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| Jul 24, 2017

Amazing facts Sayad Itna Socha hi nai main apne bacche ko Hamesha na me hi ans Karti hoo but after ur blog I say yes n treats him well

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| Jul 24, 2017

Thanks

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| Sep 11, 2017

Thanks a lot for that.

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| Sep 12, 2017

nice post

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| Sep 12, 2017

It's really helpful thanks

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| Sep 12, 2017

nice

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| Sep 14, 2017

Thnx a lot........

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| Sep 14, 2017

Thanks

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| Sep 16, 2017

Superb

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| Sep 18, 2017

Thanks a lot

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| Jul 11, 2018

very nice

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| Sep 22, 2018

Ab mera beta bahut kam jid krta hai thank you

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| Nov 17, 2018

thanks aise jruri jankari hme dete rhne k liy. muje bhi ab apni glti ka ahsas ho gya h. mera beta bhi hr bat m n khta h. muje pta nhi tha uske is behavior ka karn hm hi h.

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| Nov 17, 2018

thanks aise jruri jankari hme dete rhne k liy. muje bhi ab apni glti ka ahsas ho gya h. mera beta bhi hr bat m n khta h. muje pta nhi tha uske is behavior ka karn hm hi h.

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| Nov 20, 2019

Meri beti 5 year ki ab 30 Nov ok hogi bhut TV dekhti h padai m bhi acchi h but kab kya bolna h nahi samzti abhi jyada aise ho gai h kuch khte h to kahti h aap kar lo aap rakh do kuch chiz ka mna kiya to rone lagti h kya karu kuch samz nahi aata

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