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बड़े शहरों में त्योहारों के महत्त्व का गिरता स्तर और आपके बच्चे पर होने वाले प्रभाव

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11 से 16 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 10, 2018

बड़े शहरों में त्योहारों के महत्त्व का गिरता स्तर और आपके बच्चे पर होने वाले प्रभाव

भारत एक त्यौहारों का देश है और साल भर देश के किसी न किसी हिस्से में कोई न कोई त्यौहार मनाया ही जाता है।

बदलते समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली में बड़े बदलाव आए हैं और लोगों की जरूरतें भी बदली हैं। इन बदलावों का असर हमारे तीज-त्यौहारों पर भी पड़ा है जिससे त्यौहार मनाने के तौर-तरीकों के साथ त्यौहार मनाने के पीछे की वास्तविक सोच भी बदल चुकी है। आज त्यौहार व्यापार का जरिया बन चुके हैं और यही वजह है कि समाज में त्यौहारों की अहमियत धीरे-धीरे कम हो रही है। 

 

क्यों मनाते हैं त्यौहार?

त्यौहार हमारे जीवन में उमंग और खुशी लेकर आते हैं व रिश्तों को मजबूत बनाने में एक अटूट कड़ी का किरदार अदा करते हैं। अपने जीवन की जिम्मेदारियों का पालन करते-करते हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि जीवन में नीरसता आने लगती है। ऐसे में त्यौहार और रस्म-रिवाज न केवल हमारे जीवन में रंग भरते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को एक-दूसरे से जोड़ने का काम बड़ी खूबसूरती से करते हैं। त्यौहार हमारे जीवन को नई ताजगी देते हैं और जीवन को उत्साह और जोश से भरते हैं जिस से जीने का हौसला दोगुना हो जाता है।

 

बड़े शहरों में त्यौहारों के महत्व का गिरता स्तर 

आज अपने जीवन को आधुनिक और सभी सुविधाओं से युक्त बनाने की धुन त्यौहारों को मनाने की हमारी रूचि को धीरे-धीरे कम कर रही है और त्यौहार महज् खानापूरी करने वाले रीति-रिवाज बनते जा रहे हैं और त्यौहारों पर एक दूसरे से मेल-मिलाप का रिवाज भी घट रहा है। ऐसा होने के पीछे क्या वजह है, आइए जानें-

 

1) परिवारों का बिखराव- आजकल बड़ें शहरों में एकल परिवार का अधिक चलन है। ऐसा परिवार जिसमें केवल तीन या चार लोग हों, माता-पिता और एक या दो बच्चे। पहले परिवार में दादा-दादी, चाचा-चाची सब एक साथ होते थे तो त्यौहारों से जुड़े सभी संस्कार और पूजा-पाठ करना आसान था पर आजकल के एकल परिवारों के लिए उन सभी संस्कारों का पालन करना कठिन होता जा रहा है।
 

2) काम का बोझ- हमारी जीवनशैली में व्यस्तता बढ़ गई है क्योंकि यही समय की मांग है। काम का बोझ हमारे जीवन को तनावपूर्ण बना रहा है। लोग घर पर बैठ कर आपस में बात करने से ज्यादा समय सड़कों पर चलते यानि आॅफिस से घर और घर से आॅफिस आते हुए बिता देते हैं। बेशक यह बात भी लोगों में त्यौहार मनाने की रूचि को कम कर रही है।
 

3) इंटरनेट और सोशल मीडिया का चलन- त्यौहार मनाने की उमंग को फीका करने की वजहों में इंटरनेट और सोशल मीडिया का जिक्र करना भी जरूरी है। यह इंटरनेट का ही असर है जो लोगों को ज्यादातर समय व्यस्त रखता है और उन्हें सामाजिक जीवन के रीति-रिवाजों से दूर कर रहा है
 

4) बढ़ती मंहगाई- हमे यह बात भी स्वीकार करनी चाहिए कि आजकल हर बात की अहमियत पैसे से जुड़ी हुई है। जितना पैसा, उतना ही खुशहाल जीवन और ज्यादा पैसा कमाने के लिए जरूरी है ज्यादा काम। आज हम देखते हैं कि जवान लड़के-लड़कियां त्यौहारों पर अपने परिवार के साथ समय बिताने के बजाय काम करना पसंद करते हैं।

 

त्यौहारों मे दिलदस्पी कम होने का बच्चों पर असर
 

पहले घर के सभी लोग एक त्यौहार मनाते थे। बाजार जाया करते थे और त्यौहार मनाने के लिए अपना मनपसन्द सामान खरीदते थे। जब परिवार के सभी सदस्य एकसाथ घर को सजाते थे तो उसका आनन्द ही कुछ और था। अब बच्चों के साथ बाजार जाने के माँ-बाप के पास समय ही नहीं होता और आजकल ज्यादातर लोग त्यौहार केवल इसलिए मनाते हैं क्योंकि उन्हे ये करना होता है पर त्यौहार की उमंग और जोश नदारद रहता है।

आइए जानें कैसे त्यौहारों के प्रति रूचि कम होना बच्चों पर कैसे असर करता है-

 

1) रिश्तों की अहमियत नहीं समझते - त्यौहार ही वह मौका होता है जब पूरा परिवार एक जगह इकठ्ठा होता है और एक साथ समय बिताता है लेकिन बच्चों के लिए त्यौहार बड़े खास होते हैं क्योंकि उन्हें अपने चचेरे, ममेरे भाईयों-बहनों के साथ परिवार के दूसरें बड़ों के साथ मिलता है जो उनसे बहुत दूर रहते हैं। इस तरह का मेल-मिलाप उनके जीवन में रिश्तों की अहमियत को समझने में मदद करता हैं।
 

2) भारतीय संस्कृति से अनजान रहते हैं- त्यौहार बच्चों को अपने रीति-रिवाज की जानकारी देने का सबसे अच्छा जरिया होते हैं। त्यौहार के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी बच्चों के अंदर त्यौहार के प्रति दिलचस्पी पैदा करती है और यह बच्चों को संस्कार देने का सबसे अच्छा तरीका होता है।
 

3) सामाजिक संस्कारों के प्रति सहनशीलता में कमी- बच्चे को हर संस्कार के बारे में और कैसे यह हमारे जीवन में सौभाग्य लाते हैं, की जानकारी देना बहुत जरूरी है। भले ही उसे यह समझने में समय लगे पर बड़ा होने पर यह जानकारी उसे इन रीति-रिवाजों अपनाने में मदद करेगी और वह ऐसा खुद करेगा न कि इसलिए कि आपने उसे ऐसा करने के लिए बताया है।

 

याद रखिये, त्यौहार हमारी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं इसलिए इनका बरकरार होना बहुत जरूरी है। त्यौहारों के प्रति बच्चों में उत्साह जगाने के लिए आप क्या कर सकते हैं, आइए जानें-
 

1) बच्चे को कोई टास्क दें और शर्त रखें कि यदि वह इसे पूरा करेगा तो उसे आने वाले त्यौहार पर उसकी मनपसंद ड्रेस, खिलौना, पटाखें या कोई खाने-पीने की चीज मिलेगी। यह त्यौहार के प्रति उसके जोश को बढ़ाएगा।
 

2) बच्चे को त्यौहार से जुड़े मुखौटे जैसे दशहरे पर रावण का मुखौटा और त्यौहार के मुताबिक ही पोशाक पहनने के लिए दें जैसे गरबा ड्रेस या कुछ और। त्यौहार से जुड़ा कोई सवाल पूछें जैसे यह त्यौहार क्यों मनाया जाता है वगैरह। यह मजेदार होने के साथ बच्चे के अंदर त्यौहार के प्रति दिलचस्पी पैदा करता है।
 

3) जब सभी लोग खाने की टेबल पर इकठ्ठे हों, तो पास आ रहे त्यौहार के बारे में हमेशा बातचीत करें। जैसे त्यौहार पर बनने वाले पकवान कब तक तैयार हो जाएंगे, किसे, कौन सी ड्रेस चाहिए और उस दिन किस रिश्तेदार के यहाँ सभी लोग इकठ्ठे होंगे। यह अपने-आप बच्चे के अंदर त्यौहार की दिलचस्पी पैदा कर देगा।
 

त्यौहारों का मतलब केवल छुट्टियां और पैसा खर्च करना नहीं है बल्कि यह आपसी मनमुटाव, दुश्मनी को भुलाकर आपसी बंधन को मजबूत करने और एकसाथ अच्छा समय बिताने का मौका होता है इसलिए त्यौहारों को खुशी, मौज-मस्ती और भरपूर अंदाज से मनाएं।

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  • 1
कमैंट्स()
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| Aug 29, 2017

बहुत ही अच्छा लिखा है

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