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सिंगल पैरेंटिंग क्या भारतीय समाज में अपनाई जा सकती है?

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सिंगल पैरेंटिंग क्या भारतीय समाज में अपनाई जा सकती है

करियर, लिव इन रिलेशनशिप, तलाक के बढ़ते केस व आपसी मनमुटाव की वजह से आज भारत में सिंगल पैरेंट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अकेले रहना बुरा नहीं है, लेकिन सिंगल पैरेंट्स बनकर आगे का सफर थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इससे न सिर्फ पैरेंट्स के सामने कई दिक्कतें आती हैं, बल्कि बच्चे भी सिंगल पैरेंटिंग में कई समस्याओं से जूझते रहते हैं।
 

सिंगल पैरेंट्स की समस्याएं

  1. अतीत से जंग – सिंगल पैरेंट्स को अपने अतीत से उबरने में, अतीत को भुलाने में तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रोजाना अतीत को भुलाने में जंग लड़नी पड़ती है। इससे बच्चे की तरफ ठीक से ध्यान नहीं जा पाता।
     
  2. वित्तीय संकट – अधिकतर सिंगल पैरेंट्स परिवार की वित्तीय व अन्य जरूरतों के लिए लंबे समय तक काम करते हैं। यह परिवार चलाने और बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। 
     

  अन्य समस्याओं  तथा समाधानों को पढ़ने के लिए कृपया पूरा ब्लॉग पढ़े | 


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