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पैरेंट्स के झगड़े का बच्चे पर असर

Deepak Pratihast
1 से 3 वर्ष

Deepak Pratihast के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Apr 15, 2021

पैरेंट्स के झगड़े का बच्चे पर असर
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

भागती-दौड़ती जिंदगी और एकल परिवार सिस्टम की वजह से आजकल पति-पत्नी के बीच तकरार आम बात हो गई है। यही वजह है कि अब तलाक के मामले भी बढ़ गए हैं। छोटी-छोटी बातों पर कपल्स में असहमति, मनमुटाव ल लड़ाई झगड़ा (Fight) हो जाता है, हालांकि अधिकतर मामलों में कुछ देर बाद दोनों में सुलह भी हो जाती है। पर इस तरह के झगड़ों की वजह से उन घरों में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है, जहां बच्चे (kids) भी होते हैं। दरअसल मम्मी-पापा के झगड़े में बच्चे पिस जाते हैं। बच्चों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है। कई रिसर्च में ये सामने आ चुका है कि माता-पिता के झगड़ों का टीनेजर्स, बड़े बच्चों व छोटे बच्चों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर मम्मी-पापा के झगड़े का बच्चे पर क्या असर होता है।

कई रिसर्च में आ चुकी है बुरे असर की बात

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि मम्मी-पापा के झगड़े का असर 6 महीने के बच्चे पर भी पड़ता है। इसके अलावा कुछ रिसर्च में यह भी आया है कि माता-पिता का झगड़ा 19 साल के तक के किशोर को भी प्रभावित करता है। 2002 में यूसीएलए (UCLA) के शोधकर्ताओं रेन रेपेती, शैली टेलर और टेरेसा सेमन ने 47 ऐसे अध्ययनों को देखा, जो खराब पारिवारिक वातावरण में बड़े हुए। उन्होंने इस अध्ययन में पाया कि जो बच्चे घर में बहुत अधिक झगड़े वाले माहौल में बड़े हुए हैं, वे दूसरे बच्चों की तुलना में बहुत अधिक शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं, भावनात्मक समस्याओं व सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। व्यस्क होने पर इनमें वाहिकाओं से संबंधित, कमजोर इम्यून सिस्टम से संबंधित समस्याएं, अवसाद, अकेलापन व अन्य कई शारीरिक समस्याओं के होने की आशंका रहती है।

मम्मी-पाता के झगड़े का बच्चों पर असर

मम्मी-पापा के झगड़े का बच्चों पर कई तरह का असर पड़ता है। यह असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य (mental health) को भी खराब कर देता है। आइए एक-एक करके जानते हैं कि बच्चों पर इसका क्या असर होता है।

  1. मम्मी-पापा में से एक को समझने लगते हैं गलत – बच्चे जब घर में अपने सामने मम्मी-पापा को झगड़ते देखते हैं, वह अपने मन व मस्तिष्क में दोनों में से किसी एक को गलत समझने लगते हैं।
     
  2. खुद को अकेला महसूस करते हैं – माता-पिता को लड़ते देख बच्चे भावनात्मक रूप से खुद असहाय और कमजोर महसूस करने लगते हैं। वे घर पर व बाहर खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं।
     
  3. चिल्लाकर बात करना – झगड़े के दौरान बच्चा मां-बाप को अपना पक्ष रखते वक्त जिस तरह चिल्लाते हुए देखता है, वैसा ही खुद भी सीख जाता है। बच्चा भी चिल्लाकर बात करने लगता है। उसे लगता है कि अपनी बात रखने का यही तरीका होता है।
     
  4. स्वभाव में चिड़चिड़ापन व झगड़ालू हो जाना – मम्मी-पापा के निरंतर होने वाले झगड़े से बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है। इसके अलावा वे झगड़ालू भी हो जाते हैं और छोटी-छोटी बातों पर झगड़ने लगते हैं।
     
  5. स्वास्थ्य में दिक्कत – मम्मी-पापा का झगड़ा बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। घर के खराब माहौल व टेंशन की वजह से बच्चे ठीक से खा नहीं पाते। इसके अलावा टेंशन में उनकी नींद भी प्रभावित होती है। इन सब वजहों से उनका स्वास्थ्य खराब होने लगता है।
     
  6. रिश्तों से भरोसा उठना – बच्चे जब अक्सर मां-बाप को झगड़ते देखते हैं, तो इससे उनका रिश्तों से भरोसा उठने लगता है। उन्हें हर रिश्ता नीरस लगने लगता है। वे किसी रिश्ते पर भरोसा करना छोड़ देते हैं। अगर कोई उन्हें प्यार भी करता है, तो उन्हें इस पर संदेह होने लगता है। वह इसे दिखाबा मानने लगते हैं। बच्चे घर के रिश्तों जैसे भाई, बहन या अन्य के साथ भी ठीक से रिश्ता नहीं निभाते। सिबलिंग के साथ खूब लड़ाई होती है।
     
  7. नहीं रहता है कॉन्फिडेंस, आ जाती है हीन भावना – घर में अगर बच्चे माता-पिता के बीच अक्सर झगड़ा देखते हैं और बाहर जाकर दोस्तों के घरों में वह उनके मां-बाप के बीच प्यार देखते हैं, तो उनके अंदर हीन भावना भी आ जाती है। अंदर ही अंदर उनका कॉन्फिडेंस कम होने लगता है। आइडेंटिटि क्राइसिस उनके अंदर झूठ बोलने की आदत लगा देती है। वह दोस्तों के बीच, अपने घरों में व दोस्तों में झूठ बोलने लगते हैं। 
     
  8. हो सकता है डिप्रेशन का शिकार – मम्मी-पापा के झगड़ों से बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर 2012 में अमेरिकन जरनल चाइल्ड डिवेलपमेंट में एक रिपोर्ट छपी थी। इसके अनुसार, जो बच्चे केजी से ही अपने अभिभावकों को लड़ते देखते हैं, उनमें 7वीं क्लास तक जाते-जाते डिप्रेशन, एंजायटी और व्यवहार संबंधी समस्याएं आने लगती हैं।
     
  9. सीखने व पढ़ने की क्षमता होती है प्रभावित – मम्मी-पापा के झगड़ों की वजह से बच्चों की सीखने की क्षमता सामान्य परिवार के बच्चों की तुलना में कम होती है। एक्सपर्ट इसके पीछे का कारण बताते हुए कहते हैं कि ऐसे बच्चों के दिमाग में पैरेंट्स के झगड़े की बात चलती रहती है। इस वजह से उनकी एकाग्रता क्षमता कमजोर होती है। वह इमोशनली इतने ज्यादा डिस्टर्ब होते हैं कि पढ़ने-लिखने में उनका मन ही नहीं लगता।
     
  10.  गलत संगत व नशे की लत – रिसर्च में यह भी पाया गया है कि अगर बच्चे ऐसे माहौल में रहें जहां आएदिन मम्मी-पापा का झगड़ा हो तो वे गलत संगत व नशे की लत में फंस जाते हैं।

पैरेंट्स को देना चाहिए इस पर ध्यान

ऊपर हमने आपको बताया कि मम्मी-पापा के झगड़े का बच्चे पर क्या असर होता है। इस स्थिति में पैरेंट्स को कुछ समझदारी दिखाने की जरूरत है। आइए अब जानते हैं कि उन माता-पिता को क्या करना चाहिए, जो अक्सर बच्चे के सामने झगड़ते हैं।

  • सबसे पहले तो इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों के सामने कभी भी झगड़ा न करें। अगर स्थिति हाथ से निकलने की वजह से झगड़ा हो भी गया हो, तो आपको फौरन पैचअप की कोशिश करनी चाहिए। किसी एक को आगे बढ़कर चीजों को खत्म करने की पहल करनी चाहिए। यह सारी पहल बच्चे के सामने हो तो और बेहतर।
     
  • बच्चे के सामने एक-दूसरे का सम्मान करें। अपने जीवनसाथी का अपमान या उसे भला-बुरा बच्चों के सामने न कहें।
     
  • अगर वैचारिक मतभेद या कुछ बहस भी हो रही है, तो बच्चे के सामने खराब शब्दों का व गाली-गलौज का इस्तेमाल न करें। उनके सामने बहस से भी बचना चाहिए।
     
  • अगर आपने बच्चे के सामने झगड़ा किया है तो उस झगड़े को बच्चे के सामने ही खत्म भी करें। उन्हें अहसास दिलाएं कि अब भी आप लोग एक-दूसरे से प्यार करते हैं। इससे बच्चा परिपक्व होगा, वह सीखेगा कि किस तरह चीजों को मैनेज करते हैं।

आजकल पति-पत्नी के बीच मनमुटाव या झगड़ा आम बात है। पर इस तरह के झगड़ों की वजह से उन घरों में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है, जहां बच्चे भी होते हैं। दरअसल मम्मी-पापा के झगड़े में बच्चे पिस जाते हैं। बच्चों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है। कई रिसर्च में ये सामने आ चुका है कि माता-पिता के झगड़ों का टीनेजर्स, बड़े बच्चों व छोटे बच्चों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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