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स्वास्थ्य खाना और पोषण

किशोरावस्था में बच्चों के पोषण से संबंधित 10 महत्वपूर्ण बातें

Parentune Support
11 से 16 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Feb 04, 2021

किशोरावस्था में बच्चों के पोषण से संबंधित 10 महत्वपूर्ण बातें
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

 हरेक मातापिता की यह कोशिश रहती है कि वे अपने बच्चे को वो सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराए, जो उसके विकास में सहायक हों. बावजूद इसके कई बार कुछ महत्वपूर्ण बातों पर हमारा ध्यान नहीं जा पाता है. जबकि किशोरावस्था में बच्चे के मानसिक और शारिरिक विकास के लिए जरूरी है कि उसे सभी तरह के पोषक तत्व मिलते रहें. इसमें दो राय नहीं की बदलते समय के साथ बच्चों की फ़ूड हैबिट्स (Food Habits) भी बदलती जा रही हैं. वे स्ट्रीट फूड (Street Food), और जंक फूड (Junk Food) पर ज्यादा निर्भर हने लगे हैं. ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उनके खानपान की ओर पहले से ज्यादा ध्यान दें. इस ब्लॉग में आज हम बात करेंगे किशोरावस्था में होने वाली पोषक तत्वों की कमी को कैसे पूरा किया जा सकता है.

किशोरों के लिए पोषक तत्व/ Nutritions for Adolescence: Nutrition Value for Adolescence In Hindi-

यूनिसेफ इंडिया (Unisef India) के अनुसार भारत में 40 प्रतिशत लड़कियां और 18 प्रतिशत लड़के एनीमिक (Anaemic) हैं. उनमें माइक्रोन्यूट्रियंट्स (Micronutrients) जैसे विटामिन डी, विटामिन ए, विटामिन बी 12, आयरन, फॉलेट और जिंक की कमी है. इस नूट्रिशंस डेफिशिएंसी (Nutrition defeciency) का सबसे बड़ा कारण है किशोरावस्था में आवश्यक पोषक तत्वों का न मिलना. जबकि इस वक्त बच्चे में प्यूबर्टी चेंजिस (Puberty Changes) होते हैं, इसलिए मातापिता को चाहिए कि बच्चे खानपान में डाइट्री फूड (Dietary Food) और हाई प्रोटीन (High Protine) को शामिल करें. किशोर और किशोरी, दोनों के शरीर में होने वाले इन हार्मोनल बदलाव (Hormonal Changes) को इस तरह समझा जा सकता है कि लड़कियों के स्तनों में उभार आने लगता है. कुछेक को इसी उम्र में पीरियड्स हो जाते हैं. ऐसे में उन्हें मेंटल सपोर्ट के अलावा कैल्शियम और आयरन भी चाहिए. ताकि ब्लीडिंग के वक्त उन्हें किसी तरह की कमजोरी न हो. वहीं लड़कों में सेक्स हॉर्मोन, एण्ड्रोजन का रिसाव होने लगता है.  इस वक्त उन्हें प्रोटीन युक्त भोजन लेना चाहिए.

किशोरावस्था में पोषण संबंधित 10 महतवपूर्ण बातें/ 10 Important things about Adolescence Nutritions: Impt Nutritions Factors-

  1. डाईट चार्ट  (Diet Chart) बनाएं- किशोरावस्था की देहलीज में पांव रखते ही बच्चे थोड़े आक्रामक हो जाते हैं. कुछ बहुत शांत हो जाते हैं. ऐसे में उन्हें जरूरत होती है सही दिशा निर्देशन की. यह वो पड़ाव होता है जब बच्चों में सोचने, समझने और परखने की क्षमता भी बढ़ रही होती है. वे पहले की तुलना में ज्यादा व्यावहारिक हो जाते हैं और भावुक भी. ऐसे में मातापिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों का ऐसा डाइट प्लान बनाएं, जोकि उनकी इन सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करता हो. चार्ट में रोजाना कुछ बदलाव रखें, ताकि बच्चा एक ही तरह का खाना खाते-खाते बोर न हो.
     
  2. हाई कैलोरी फूड- क्या आप जानते हैं कि आपकी किशोरी बेटी को एक दिन में कितने कैलोरीज चाहिए होती हैं. लगभग 2200 के आसपास कैलोरी उसके शरीर को चाहिए. वहीँ इस उम्र के लड़के को रोजाना 2500 से 3000 कैलोरी चाहिए. उन्हें बिना यह चिंता किए कि आपके बच्चे का वजन बढेगा उसे घी-दूध खिलाएं. गाय का घी सर्वोत्तम है. यह माइंड वेलनेस के लिए बहुत अच्छा होता है.
     
  3. मंचिंग हैबिट (Munching Habit) अच्छी नहीं- बच्चों में मंचिंग हैबिट्स होती है. उन्हें बार-बार कुछ खाने के लिए चाहिए. खासतौर पर जब वे पढ़ाई कर रहे होते हैं. चिप्स, बर्गर और नूडल्स की जगह उन्हें नट्स जैसे अखरोट, बादाम, अंजीर, मुनक्के और रोस्टेड मखाने खाने को दें. यह बच्चों में ओबेसिटी (Obesity) की समस्या को बढ़ने से रोकते हैं. यह खाने में तो टेस्टी होते ही हैं, बल्कि शरीर को पोषक तत्व भी देते हैं.
     
  4. नींद में कोताही नहीं- भरपूर नींद लेने से बच्चों की दिनभर की थकान दूर होती है. वे फ्रेश महसूस करते हैं. पढ़ाई करने से जी नहीं चुराते हैं. उन्हें सुबह जल्दी उठने और रात में जल्दी सोने की आदत डालें.  रात को सोने से एक घंटा पहले खाना खिला दें और डिनर में कुछ हल्का दें.
     
  5. व्यायाम करवाएं- सुबह उठकर उन्हें वॉक करने ले जाएं. प्रतिदिन व्ययाम कराएं. इससे उनकी भूख बढ़ेगी और तनाव से भी दूर रहेंगे. यही समय जबकि आप उन्हें फिजिकल एक्टिविटीज में व्यस्त रखें. उचल-कूद से बच्चे कभी खराब नहीं बनते, बल्कि एक्टिव होते हैं.
     
  6. सेरोटोनिन (Serotonin) का रहे ख्याल- कीवी, पल्म, पाइनएप्पल और केला दें. इसमें सेरोटोनिन (Serotonin) अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है, जोकि मूड को बूस्ट करता है. अच्छी नींद और एक अच्छा मूड ही है जो उन्हें स्वस्थ रख सकता है.
     
  7. स्ट्रेस (Stress) से दूर रखें- बढ़ती उम्र के बच्चों को पढाई के अतिरिक्त करियर की भी चिंता रहती है.हालांकि 11 से 13 साल की उम्र बहुत छोटी होती है इस बारे में सोचने के लिए, लेकिन उनमें कॉम्पीटिशन की भावना बढ़ने लगती है. स्ट्रेस (Stress) को दूर करने के लिए आप उन्हें कभी-कभी डार्क चॉकलेट या कॉफ़ी दे सकते हैं. मगर ज्यादा नहीं.
     
  8. ईटिंग पैटर्न (Eating Pattern) में बदलाव- हार्मोन में होने वाले बदलावों के कारण किशोरावस्था में कब्ज़ की शिकायत भी होने लगती है. इसके लिए बच्चों को फाइबर और पोटैशियम युक्त फल और सब्जियां खिलाएं. उन्हें जंक फूड से दूर रखें. इस समय बच्चों को पिम्पल और डार्क सर्कल्स की समस्या भी हो जाती है. ऐसे में बाहर का खाना से परहेज ही रखें तो ज्यादा बेहतर।
     
  9. अपने बच्चे को संतुलित आहार और संस्कार दें- यदि बच्चों के डेली रूटीन (Daily routine) में उनके खानपान से जुड़ी आदतों को सुधार दिया जाए तो आधी समस्या यूं ही खत्म हो जाती है. उन्हें जंक फूड से दूर रखें. सप्ताह में एक बार बाहर का खाना चल सकता है, लेकिन हर रोज स्ट्रीट फूड नहीं चल सकता. जंक फूड में मैदा होता. मैदे में ग्लूटेन होता है, जो आँतों में जाकर फंस जाता है. बच्चों को इस उम्र में सुपाच्य भोजन दें. दोपहर के भोजन में दाल-सब्जी, चावल-रोटी और सलाद खाने को दें. रात को सूप पीने से उनके एपेटाइट (Appetite) बढ़ेगा.
     
  10. नई-नई रेसिपी बनाएं- बच्चे जब बड़े हो रहे होते हैं तो खाने के मामले में उनकी पसंद बदलती रहती है. मगर मां का ध्यान केवल इस बात पर रहता है कि खाने की पौष्टिकता बनी रहे और स्वाद भी. यह मेरी या आपकी बात नही है, बल्कि हर मां की यही परेशानी है. ऐसे रेसिपी बनाएं जो पौष्टिकता के साथ टेस्टी भी हो. ताकि बच्चा खाना खाने में आनाकानी न करे. उपरोक्त दिए गए सुझावों से आप अपने बड़े हो रहे बच्चों के शारीरिक और मानसिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं.

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • 1
कमैंट्स ()
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| Feb 11, 2021

mere beti 15year ki ho gai h bt breast develop nhi ho rhi kya diet du beti thodi weak bhi h

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