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अपने बच्चे को इन तरीकों से आप बना सकते हैं पर्यावरण प्रेमी

Prasoon Pankaj
7 से 11 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 04, 2019

अपने बच्चे को इन तरीकों से आप बना सकते हैं पर्यावरण प्रेमी

जून के इस महीने में मानों आसमान आग उगल रहा है। अक्सर आपको लोग ये कहते हुए मिल जाएंगे कि प्रत्येक साल गर्मी बढ़ती ही जा रही है। कहीं ना कहीं ये पर्यावरण के बिगड़ते स्वरूप का ही नतीजा है। प्रत्येक साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के तौर पर मनाया जाता है। इसके साथ ही आपको बता दूं कि प्रत्येक वर्ष अलग-अलग थीम के मुताबिक पर्यावरण दिवस को मनाया जाता है तो इस बार के लिए भी एक थीम का चयन किया गया है। इस साल का थीम है वायु प्रदूषण को हराना है यानि बीट द एयर पॉल्यूशन। पर्यावरणविदों की मानें तो एक व्यक्ति को जितने ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कम से कम 7 पेड़ होने चाहिए। यानि कि यदि हमें स्वच्छ वायु लेना है तो हमारे आसपास में कम से कम 7 पेड़ तो जरूर होने चाहिए लेकिन शहरीकरण का विस्तार और जंगलों की लगातार हो रही कटाई की वजह से सबसे अधिक हमारा पर्यावरण ही प्रभावित हो रहा है। 

पर्यावरण की रक्षा के लिए किन उपायों को आजमाना जरूरी है? / 10 Steps You Can Take to Protect the Environment Today In Hindi

अब सवाल ये उठता है कि आखिर पर्यावरण को बचाने के लिए हम किन उपायों को कर सकते हैं। जैसा कि हम सब लोग जानते हैं कि इसके लिए व्यापक स्तर पर देश-विदेश में मुहिम चलाए जा रहे हैं लेकिन हकीकत तो यही है कि जब तक इस मुहिम में हम अपने बच्चे  सक्रिय भूमिका में नहीं लाएंगे तब तक मुहिम का दमदार असर देखने को नहीं मिलेगा।  

  • प्लास्टिक की थैली से परहेज करें- प्लास्टिक की थैली का उपयोग करने की बजाय हम कपड़े या कागज की थैली का प्रयोग करना शुरु कर सकते हैं। सबसे पहले तो आप अपने बच्चे को इस बात की जानकारी दें कि प्लास्टिक की थैली का इस्तेमाल करने से प्रदूषण बढ़ता है और ये हमारे आसपास के पर्यावरण के लिए भी घातक है। 
     
  • बिजली संरक्षण - अक्सर हम लोग अपने घर और यहां तक की दफ्तर में भी लाइट और फैन बिना आवश्यकता के भी इस्तेमाल करते हैं। लापरवाही के चलते  हम अपने घर में अनावश्यक तरीके से लाइट और फैन चलता हुआ छोड़ देते हैं। अगर हम अपने बच्चों को अभी से ही ये आदत लगा दें कि बिजली का दुरुपयोग नहीं करना है तो वे आजीवन इसको याद रखेंगे।
     
  • कागज की बर्बादी पर रोक लगाना जरूरी- हमें अपने बच्चों को ये भी बताना चाहिए कि कागज की बर्बादी ना करें क्योंकि कागज बनाने के लिए पेड़ कटाई अनिवार्य है। कई बार बच्चे कागजों को इधर- उधर फाड़ कर बिखेरते रहते हैं तो हमें उन्हें प्यार से समझाना चाहिए कि ये बुरी आदत है। डिजिटल जमाने में अधिकांश काम ऑनलाइन ही हो जाता है तो हमें भी चाहिए की हार्ड कॉपी की बजाय बिल वगैरह के लिए हम सॉफ्ट कॉपी का ही प्रयोग करें।
     
  • जहां तक संभव हो पैदल चलने का प्रयास करें-  अपने बच्चों के साथ मॉर्निंग वॉक करने की हैबिट बना लें । इसके अलावा आप अपने बच्चे को साइक्लिंग के लिए भी मोटिवेट कर सकते हैं। बच्चों को निजी वाहनों की बजाय स्कूल बस से ही भेजा करें। इन सब उपायों को करने से ईंधन की बचत तो होगी ही इसके अलावा स्वास्थ्य और पर्यावरण की भी सुरक्षा होगी।
     
  • पानी की बचत करना भी जरूरी- कई बार आपने नोटिस किया होगा कि घर में नहाते समय या ब्रश करने के बाद बच्चे पानी के नल को खुला छोड़ देते हैं। हमें अपने बच्चों को समझाना होगा की पानी अमूल्य है और जल को बर्बाद नहीं करना चाहिए ।
     
  • वृक्षारोपन- हम सार्वजनिक पार्क या स्कूलों में वृक्षारोपण भी कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात कि इससे हरियाली बढ़ेगी लेकिन सिर्फ एक बार पौधा लगा देना ही काफी नहीं होता है बल्कि समय-समय पर पौधों में पानी और जैविक खाद भी देने की आवश्यकता होती है। मेरे एक मित्र का बेटा प्रतिदिन बालकनी में लगाए गए पौधों में पानी देता है क्योंकि उसके माता-पिता को भी बागवानी करने का शौक है और अब उसके बच्चे ने भी इस हॉबी को अपना लिया है। जाहिर है कि बच्चे अपने बड़ों का अनुसरण करते हैं तो घर में अगर इस तरह का माहौल बन जाए तो फिर हम अपने बच्चों के दिलों में भी पेड़ पौधों से प्रेम की भावना को जागृत कर सकते हैं।
     
  • डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ और डिस्पोजेबल्स का कम प्रयोग करें- घर के अंदर डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ और डिस्पोजेबल्स का कम से कम इस्तेमाल करें। इससे कूड़ा-कचड़ा भी कम फैलेगा और बच्चे भी इस बात को बखूबी समझ सकेंगे
     
  • वीडियो गेम्स और टीवी की बजाय प्लेग्राउंड्स में बच्चों को जाने दें-  घर के अंदर इनडोर गेम्स/वीडियो गेम्स या टीवी देखने की बजाय बच्चों को खेल के मैदान में जाने के लिए भी प्रेरित करें। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तो होगा ही इसके साथ ही ऊर्जा की भी बचत हो सकेगी। इस तरह के कई उपायों को अपना कर हम बच्चों को पर्यावरण प्रेमी बना सकते हैं।

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