• लॉग इन करें
  • |
  • रजिस्टर
शिक्षण और प्रशिक्षण स्वास्थ्य

12 साल की बच्ची ने गुल्लक तोड़कर कैंसर के पेशेंट को फ्लाइट से घर वापस भेजा

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 02, 2020

12 साल की बच्ची ने गुल्लक तोड़कर कैंसर के पेशेंट को फ्लाइट से घर वापस भेजा
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

एक बच्चे के अंदर निश्छल मन का वास होता है, कई बार हमारे आसपास के छोटे बच्चे भी कुछ ऐसा बड़ा काम करके दिखा देते हैं जिसको करने के लिए बड़े लोग सोच भी नहीं पाते हैं। आज एक बार फिर सातवीं कक्षा की छात्रा और 12 साल की बच्ची निहारिका द्विवेदी ने ऐसा काम करके दिखा दिया है जिसके बारे में जानकर आप भी इसके जज्बे  को सलाम कर उठेंगे। लॉकडाउन के दौरान देश के कोने-कोने में लाखों की संख्या में गरीब बेबस मजदूर फंसे हुए थे। हजारों की संख्या में ये मजदूर पैदल ही अपने घर रवाना भी हो गए थे। निहारिका इन मजदूरों के संघर्ष की कहानी को देखकर बहुत दुखी थी। फिर निहारिका ने अपने पैरेंट्स से विचार किया कि हम कैसे इन मजदूरों को घर पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। 

निहारिका ने 48 हजार रुपये देकर 3 मजदूरों को फ्लाइट से झारखंड पहुंचाया

नोएडा की रहने वाली निहारिका द्विवेदी ने अपने पिगी बैंग (गुल्लक) में 48 हजार रुपये बचाकर रखा था। निहारिका का कहना है कि समाज ने हम लोगों को बहुत कुछ दिया है ऐसे में ये हमारी जिम्मेदारी भी बनती है कि मुसीबत के इस दौर में हम भी कुछ योगदान करें। आपको बता दें कि जिन 3 प्रवासी मजदूरों की निहारिका ने मदद की है उनमें से एक तो कैंसर का मरीज भी है।

निहारिका की माने तो उन्होंने पिछले दो साल में अपने पिगी बैंक में 48 हजार 530 रुपए जमा किए थे। खबरों के माध्यम से निहारिका ने जब मजदूरों के संघर्ष की कहानी को देखा तो उन्हें लगा कि इन्हें घर पहुंचाने में मदद की जानी चाहिए। इसके बारे में निहारिका की मां सुरभि द्विवेदी ने कहा है कि हम देख रहे थे कि जब भी वह मजदूरों के बारे में खबरें देखती थीं तो वह दुखी हो जाती थीं। एक दिन उसने एक हवाई जहाज देखा और हमसे पूछा कि क्या हम फ्लाइट से जरूरतमंद लोगों को भेज सकते हैं? इसके बाद निहारिका ने अपना गुल्लक मां को सौंपते हुए कहा कि मैं मजदूरों की मदद करना चाहती हूं। सच पूछिए तो अपनी बेटी के इन विचारों को जानकर हमें बहुत गर्व का एहसास हुआ। ये भावुक कर देने वाला पल था हमारे लिए।

इसके बाद निहारिका की मां ने अपने दोस्तों के माध्यम से जरूरतमंद मजदूरों के बारे में पता किया जो अपने घर वापस लौटना चाह रहे थे। इस दौरान उनको 3 मजदूरों के बारे में जानकारी मिली जिनमें से एक कैंसर का पेशेंट है। फिर उन्होंने निहारिका के द्वारा दिए गए उन पैसों से ही तीनों मजदूरों के लिए टिकट का इंतजाम किया और उनको वापस उनके घर झारखंड भेज दिया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि इस छोटी से उम्र में ऐसी संवेदनशीलता के लिए निहारिका बिटिया का आभार। आपके उज्जवल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामानाएं।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

  • कमेंट
कमैंट्स ()
Kindly Login or Register to post a comment.
+ ब्लॉग लिखें

टॉप शिक्षण और प्रशिक्षण ब्लॉग

Sadhna Jaiswal

आज के दिन के फीचर्ड कंटेंट

गर्भावस्था

Ask your queries to Doctors & Experts

Download APP
Loading
{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}

{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}