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बच्चे को जरूर बताइये कि क्यों 14 जून को मनाया जाता है रक्तदान दिवस

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7 से 11 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 14, 2018

बच्चे को जरूर बताइये कि क्यों 14 जून को मनाया जाता है रक्तदान दिवस

 

रक्तदान को महादान कहा जाता है। रक्त की अहमियत को आप तो समझते ही हैं लेकिन इसके महत्व के बारे में अपने बच्चों को भी जरूर समझाएं। रक्त से ही हमारा जीवन चलता है और इससे भी बड़ी बात की रक्तदान कर हम किसी के जीवन की रक्षा भी कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से हर साल 14 जून को रक्तदान दिवस मनाया जाता है। अब आपके बच्चे आपसे सवाल पूछ सकते हैं कि आखिर 14 जून को ही क्यों रक्तदान दिवस मनाया जाता है तो चलिए अब हम आपको इसके बारे में भी बता देते हैं।

 

14 जून को इसलिए मनाया जाता है रक्तदान दिवस

 

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मशहूर जीवविज्ञानी कार्ल लेण्डस्टाइनर नामके मशहूर वैज्ञानिक के जन्मदिन के अवसर पर रक्तदान को बढावा देने के लिए 14 जून को रक्तदान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया।
  •   कार्ल लेण्डस्टाइनर ऑस्ट्रिया के रहने वाले थे और अपने समय के विख्यात जीववैज्ञानिक और भौतिकीविद थे।
  •  साल 1930 में लेण्डस्टाइनर को नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
  •  कार्ल लेण्डस्टाइनर ने ही ब्लड में अग्गुल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर ब्लड को अलग अलग रक्त समूहो में यानि ए, बी ओ में वर्गीकरण कर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया था।
  • साल 1997 में WHO यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की शुरुआत करने का फैसला किया इसका उद्देष्य यही है कि जरूरत परने पर रक्त के लिए पैसे नहीं देना चाहिए 

 

भारत में रक्तदान की क्या स्थिति है

 

WHO के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल तकरीबन 1 करोड़ यूनिट ब्ल्ड की आवश्यकता होती है लेकिन तकरीबन 75 लाख यूनिट ब्लड ही उपलब्ध हो पाता है। यानि 25 लाख यूनिट ब्लड के अभाव में हर साल सैकड़ों मरीज की मौत हो जाती है। आंकड़ें तो ये भी बताते हैं कि भारत की कुल  अनुमानित आबादी यानि सवा अरब लोगों में से बमुश्किल 1 फीसदी लोग भी ब्लड डोनेट नहीं करते हैं। 

 

ऐसे लोग कर सकते हैं रक्तदान 

  1. 18 साल से 60 साल की उम्र का कोई व्यक्ति और जिनका वजन 45 किलोग्राम हो रक्तदान कर सकता है
  2. वैसे लोग जिन्हें एचआईवी, हेपेटाइटिस बी या सी जैसी कोई गंभीर बीमारी ना हो वे रक्तदान कर सकते हैं
  3. नियमित रूप से रक्दान करने वालों को हृदयरोग होने का खतरा कम होता है 
  4. प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति 3 महीने में एक बार रक्तदान कर सकता है

 

रक्दान को लेकर भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता

 रक्तदान करने के संदर्भ में बहुत सारी भ्रांतियां अपने देश में फैली है। अब जैसे की रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है और शरीर को उस ब्लड की भरपाई करने में महीने लग जाते हैं। इस भ्रांति का सच्चाई से दूर-दूर तक का कोई संबंध नहीं है। और तो और रक्तदान करने वालों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इस तरह की गलतफहमी भी लोग पाल लेते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस तरह की गलतफहमी और भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है ताकि हमारे देश में स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों की संख्या बढ़ सके। 

 

आप अपने बच्चों के सामने भी रक्तदान कर मिसाल पेश कर सकते हैं। अगर आप कभी रक्तदान करने के लिए जाएं तो वापस लौटकर अपने बच्चे को ये जरूर बताएं कि आपने आज एक अच्छा काम किया है और आपके इस प्रयास की बदौलत किसी की जान बच सकती है। 

 

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