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15 अगस्त - रीयल फाइटर

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 15, 2020

15 अगस्त रीयल फाइटर
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

On the occasion of Independence Day on August 15, we remember all those freedom fighters who sacrificed themselves for the sake of the country. After the independence, when it came to nation building, many such people came forward who put themselves in the service of country as paramount. Today, there are many people around us who have a passion for patriotism. Today we are going to tell you the story of some real life fighter in this blog, to whom the whole country expresses gratitude. 

Sonu Sood emerged as real hero in lockdown

कोरोना जैसी महामारी ने जब अपने देश में पांव पसारना शुरू किया उसके बाद लॉकडाउन लागू कर दिया गया। लॉकडाउन जैसी स्थिति के लिए देश के करोड़ों लोग मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार नहीं थे। एक तरफ तो महामारी की चपेट में आने का खतरा तो दूसरी तरफ नौकरी व रोजी रोजगार छीन जाने के बाद गंभीर आर्थिक संकट। वैसे मजदूर तो दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में थे उनलोगों ने अपने घर वापसी करने का विचार किया लेकिन मुश्किल ये थी की यातायात का कोई साधन उपलब्ध ही नहीं था। मुंबई के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रवासी मजदूरों की मजबूरी की कहानी लगातार सामने आ रही थी। बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए मसीहा के तौर पर उभर कर सामने आए। सोनू सूद इस कदर सक्रिय थे कि अगर उन्हें किसी ने ट्वीट कर अपनी मजदूरी बता दी तो वे तत्काल उसको अपना बैग पैक करके घर पहुंचाने का इंतजाम कर देते थे। यूपी, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के हजारों मजदूरों को सोनू सूद ने घर तक पहुंचाया। अब इसके बाद वे फिर से इन मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने की योजना पर काम कर रहे हैं। सोनू सूद की लोकप्रियता इस कदर बढ़ रही है कि अब नवजात शिशुओं का नाम भी सोनू सूद के नाम पर पैरेंट्स रख रहे हैं। सोनू सूद बताते हैं कि वे भी मुंबई में प्रवासी बनकर ही रहने के लिए आए थे और उन्होंने इस तकलीफ को झेला है और शायद यही वजह है कि वे हर वक्त प्रवासियों की मदद के लिए मुस्तैद रहते हैं। 

मेजर अनुज सूद की शहादत पर नमन

अनुज था मैं कम उम्र में बलिदान का सौभाग्य मिला मुझे,

अग्रज हो तुम तुम्हें भी कुछ कर दिखाना होगा।।

जब तक शत्रुनाश नहीं होता है आशीष दो ईश्वर मुझे,

नया रूप लेकर देश सेवा में मुझे फिर से आना होगा।

कुछ इन्हीं शब्दों से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एस पी तंवर ने शहीद मेजर अनुज सूद को श्रद्धांजलि अर्पित की। IIT में अगर किसी नौजवान का दाखिला हो जाए लेकिन इसके साथ ही उसी नौजवान का NDA में भी सफलता हासिल हो जाए तो वह कौन से विकल्प को चुनना पसंद करेगा? ज्यादातर लोग इस सवाल का जवाब देने से पहले मंथन करेंगे, फायदे व नुकसान के बारे में विचार करेंगे लेकिन मेजर अनुज सूद ने तो एक झटके में तय कर लिया था कि उसको आर्मी में ही जाना था। जिस किसी ने भी इस फैसले के बाारे में सुना तो अचरज करने लगा लेकिन मेजर अनुज सूद के परिवार के लिए ये बेहद सामान्य सी बात थी। मेजर अनुज सूद के पिता भी उच्च अधिकारी रह चुके हैं, परिवार में देश सेवा को सर्वोपरि स्थान दिया जाता था औऱ कहीं ना कहीं मेजर अनुज सूद ने भी बचपन में ही सैन्य सेवा के माध्यम से देश की सेवा करने का मन बना लिया था। बचपन से ही मेधावी छात्र रहे मेजर अनुज सूद की जांबांजी को आज देश नमन करता है। जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकियों से हुए मुठभेड़ में डटकर मुकाबला करते हुए मेजर अनुज सूद शहीद हो गए। पिता की आंखों में आंसू जरूर थे लेकिन गर्व से सीना भी चौड़ा हो रहा था क्योंकि उनके लाल ने अपनी वीरता से भारत माता के मस्तक को ऊंचा जो कर दिया। 

डॉ मालविका बर्मन है सही मायने में कोरोना वॉरियर

कोरोना महामारी के इस दौर में डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका किसी देवदूत से कम नहीं है। कोरोना वायरस से संक्रमण का खतरा होने के बावजूद डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों ने दिन रात एक कर दिया। गुवाहाटी के मेडिकल कॉलेज में डॉ मालविका बर्मन पूरी तरह से एहतियात बरत रही थीं, उन्होंने 4 महीने तक खुद को सेल्फ आइसोलेशन में रखा। अपनी बेटी और पिता से बातचीत भी वे वीडियो कॉल के माध्यम से ही करती रहीं क्योंकि वे नहीं चाहती थीं कि परिवार का कोई सदस्य संक्रमित हो जाए। कुछ दिनों बाद ही उनका पूरा परिवार ही कोरोना संक्रमित हो गया। ऐसी परिस्थिति में भी डॉ मालविका बर्मन ने हिम्मत बनाए रखा और पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद अपने डॉक्टर के धर्म का पालन किया। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्होंने फिर से अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन की और मरीजों की सेवा करती रहीं।

कांस्टेबल हितेश वाघेला पहले ऐसे पुलिसकर्मी जिन्होंने प्लाज्मा डोनेट किया

लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मियों ने भी दिन-रात एक कर दिया था। वायरस के प्रकोप से बचने का सबसे सही और सटीक उपाय यही था कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए ऐसे समय में कानून व्यवस्था का पालन करना भी बड़ी चुनौती थी। गुजरात के कांस्टेबल हितेश वाघेला ड्यूटी के दौरान ही कोरोना पॉजिटिव हो गए। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने फिर से अपनी ड्यूटी को ज्वाइन किया इसके अलावा वे पहले ऐसे पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने प्लाज्मा डोनेट किया। इतना ही नहीं हितेश वाघेला ने दोबारा भी प्लाज्मा डोनेट किया। वाघेला बताते हैं कि ये भी कोविड ड्यूटी की तरह है और आगे भी प्लाज्मा डोनेट करने की बात आएगी तो पीछे नहीं हटूंगा।

केरल के अनुजीथ ने जीवित रहते हुए सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई, मौत के बाद 8 लोगों को दिया नया जीवन

The name of Anujith of Kerala was also included in the list of millions of unemployed people during the lockdown. In a difficult time, Anujith got a job as a salesman and started doing this. Returning from the bike, he crashed, saving the life of a young man. During this accident, doctors declared him as brain dead. As per Anujith's wish, her body parts were donated and in this way a total of 8 people got new life. Just 10 years before today i.e. in the year 2010, Anujith notices a crack in a railway track. Seeing the train coming from the front, he started running towards the train, shaking the red bag in his hand fast. Seeing this alert, the driver feared something untoward and the driver stopped the train. Hundreds of railway passengers were saved safely by this understanding of Anujith. This story of a young man like Anujith is inspiring for all of us. 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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