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एशियाड गेम्स में 15 साल के सिल्वर विजेता शार्दुल की सक्सेस स्टोरी

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 24, 2018

एशियाड गेम्स में 15 साल के सिल्वर विजेता शार्दुल की सक्सेस स्टोरी

आपने भी हिंदी के इस मुहावरे को जरूर सुना ही होगा कि पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं। कहने का मतलब ये है कि प्रत्येक बच्चे के अंदर कोई ना कोई प्रतिभा छुपी होती है। माता-पिता अगर अपने बच्चे की प्रतिभा को पहचान लें और उसके टैलेंट को तराशने का काम सही समय पर शुरू कर दें तो ये बात तय है कि सफलता जरूर मिलेगी। अब इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं भारत के सबसे युवा निशानेबाज शार्दुल विहान। 18वें एशियाई गेम्स में शार्दुल विहान ने देश को सिल्वर मेडल जीत कर दिया है। आपको जानकर हैरानी और खुशी होगी कि इस वक्त शार्दुल विहान महज 15 साल के हैं। उम्र के इस पड़ाव को जहां बच्चों के खेलने-कूदने का बताया जाता है लेकिन इसी उम्र में शार्दुल ने खेल की दुनिया में  ही खुद का, अपने परिवार और देश का नाम रोशन करके दिखा दिया है। आपको हम इस ब्लॉग में शार्दुल के बारे में कई और रोचक जानकारी देने जा रहे हैं। शार्दुल की इस सफलता में निश्चित रूप से उनके कठिन परिश्रम का सबसे बड़ा योगदान है लेकिन इसके अलावा उनके परिवार एवं माता-पिता को भी बहुत बड़ा श्रेय जाता है।
     

 शार्दुल की सक्सेस स्टोरी में परिवार का महत्वपूर्ण योगदान/ Family's important contribution to Shardul's Success Story in Hindi

शार्दुल की इस सफलता के पीछे उसके परिवार का बहुत बड़ा योगदान है। आइये जानते हैं कि शार्दुल का रूझान निशानेबाजी की तरफ कैसे गया और उसने कहां से और किन परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त किया। 

शार्दुल के परिवार की अहम भूमिका: शार्दुल के पिता दीपक विहान बताते हैं कि महज 9 साल की उम्र में शार्दुल का गन से रिश्ता जुड़ गया था। मेरठ के सिवाया गांव में रहने वाले शार्दुल की रूचि को जानकर उनके परिवार वालों ने बहुत सपोर्ट किया। कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम और पल्हैड़ा शूटिंग रेंज में शार्दुल ने दिन रात प्रैक्टिस की। मेरठ में शॉटगन शूटिंग रेंज नहीं होने की वजह से तय किया गया कि अब आगे की ट्रेनिंग के लिए शार्दुल को दिल्ली आना होगा लेकिन समस्या ये थी कि दिल्ली में इनके रहने खाने का इंतजाम कैसे हो पाएगा क्योंकि इतना छोटा सा बच्चा दिल्ली जैसे महानगर में अकेला कैसे रह सकता था? इसके बाद परिवार ने फैसला किया कि शार्दुल रोज मेरठ से दिल्ली प्रैक्टिस के लिए आएंगे और फिर वापस लौट जाएंगे। शार्दुल के चाचा उनको रोज सुबह दिल्ली लेकर आते और फिर वापस मेरठ उनको साथ लेकर जाते। प्रैक्टिस के लिए शार्दुल सुबह 5 बजे घर से दिल्ली के लिए रवाना होते थे और देर रात घर वापस लौटते। दिल्ली में डॉ कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में प्रैक्टिस करना उनकी दिनचर्या बन चुकी थी। और इस सबके बीच में वो अपने पढ़ाई पर भी फोकस करते रहे। शार्दुल ने अपनी जीत का श्रेय अपने परिवार को दिया है। 

कैसे पहचाने अपने बच्चे की प्रतिभा को/ How To Recognize Your Child's Talent In Hindi

आप भी अपने बच्चे के अंदर छुपी प्रतिभा को पहचानें और उसको निखारने का काम करें। क्या पता कल की तारीख में आपका बच्चा ही स्टार बन जाए। 

 

  1. बच्चे को जो काम पसंद है वो करने दें:  बच्चे पर कभी अपनी पसंद ना थोपें बल्कि बच्चे को जो काम करने में अच्छा लगे वो करने दें। आपके बच्चे को क्या करने में अच्छा महसूस हो रहा है या फिर कौन सा ऐसा काम है जिसको करने के बाद बच्चे को खुशी मिल रही है इसको नोटिस करें। मान लिया जाए कि आपके बच्चे को पेंटिंग करना अच्छा लगता है, क्रिकेट खेलना अच्छा लगता है, किसी दूसरे स्पोर्ट्स में उसकी रूचि है, या फिर गाना या डांस करने में रूचि है तो आप उसको वो काम करने की आजादी दीजिए।
     
  2. बच्चे की पसंद को जानकर उस विषय में अच्छा प्रशिक्षण दें- बच्चे की पसंद और अभिरूचि को जानने के बाद बच्चे को उचित प्रशिक्षण दिलाने का प्रयास कीजिए। आजकल तो छोटे शहरों में भी पेंटिंग, डांस, सिंगिंग, स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग दिलाने के लिए अच्छे प्रशिक्षण संस्थान खुल चुके हैं। अब आप शार्दुल के उदाहरण को ही ले लीजिए, शार्दुल का जन्म मेरठ के एक गांव में हुआ था और शार्दुल के माता-पिता ने बचपन में उसकी अभिरूचि को समय रहते जान लिया और उसको बाकायदा अच्छी ट्रेनिंग दिलाई आज नतीजा सबके सामने है।
     
  3. सफलता और असफलता को लेकर सही सोच विकसित करें- ध्यान रखिए कि आपके बच्चे में किसी भी काम को क्रिएटिव तरीके से करने की भावना तभी विकसित होगी जब वो बिना किसी दबाव के अपना शत प्रतिशत योगदान दे पाएगा। सबसे पहले तो बच्चे के अंदर से हार के डर को खत्म करना होगा। आपको अपने बच्चे को ये भी बताना चाहिए कि असफलता से भी हमें सीखने का अवसर मिलता है।  
     
  4. अपने बच्चे को पूरा समय दें- भले आप कितना भी व्यस्त क्यों ना हों लेकिन अपने दिन का कुछ समय सिर्फ अपने बच्चे के लिए रखें। इस दौरान आप अपने बच्चे से उसके इंटरेस्ट के बारे में पूछें। उसकी दिन भर की दिनचर्या के बारे में जानकारी लें। आप अपने बच्चे से ये पूछे कि वो क्या करना चाहता है, उसके सवालों का जवाब धैर्यपूर्वक दें। अब जैसे कि शार्दुल की इस सक्सेस स्टोरी को आप अपने बच्चे को जरूर सुनाएं। इस तरह की कई और रोचक और सकारात्मक कहानियां आप अपने बच्चे को जरूर सुनाते रहें। इससे आपके बच्चे के अंदर भी कुछ अच्छा करने की प्रेरणा जगेगी और क्रिएटिविटी का भी विकास होगा। 

तो इन तरीकों को आजमाकर आप अपने बच्चे के टैलेंट को तराश सकते हैं। अगर आपके पास भी कुछ ऐसा अनुभव है तो इसे आप हमारे साथ एवं सभी साथी माता-पिता के साथ जरूर साझा करें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

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