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शिक्षण और प्रशिक्षण

अकबर बीरबल की मजेदार कहानियां

Prasoon Pankaj
1 से 3 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Oct 13, 2020

अकबर बीरबल की मजेदार कहानियां
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आप ये जरूर चाहते होंगे की आपका बच्चे के अंदर कम्यूनिकेशन स्किल अच्छे से विकसित हो यानि की आपका बच्चा संवाद करने की कला में दक्ष हो। कम्यूनिकेशन स्किल की दो सबसे प्रमुख बातें हैं पहला है वाकपटुता और दूसरा है हाजिर जवाबी। वाकपटुता और हाजिरजवाबी का सबसे बड़ा उदाहरण हैं बीरबल। जी हां वही बीरबल जो सम्राट अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar Birbal Ki Kahani) आज के समय में भी खास तौर से बच्चों के लिए बहुत प्रासंगिक है। अकबर बीरबल की कहानियों से आपके बच्चे को बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। इन कहानियों में अपनी बुद्धिमता का प्रदर्शन कैसे करें ये भी सीखने को मिलता है। आज हम इस ब्लॉग में आपको अकबर-बीरबल की कुछ खास कहानियों को बताने जा रहे हैं और आप इन कहानियों को अपने बच्चे को तो जरूर सुनाएं या फिर उनको पढ़ने के लिए भी अवश्य कह दें। 

किसान और कुएं की कहानी

बच्चों, जैसा कि आप जानते हैं कि किसान खेत में फसल उगाता है लेकिन किसान को खेती करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है ताकि वो समय समय पर सिंचाई कर सके। अकबर के शासनकाल में एक किसान बहुत परेशान था। उसको अपने खेतों की सिंचाई करनी थी और इसलिए वह अपने खेतों के आसपास कुएं की तलाश कर रहा था। किसान को तभी अचानक एक कुआं नजर आया, कुएं को देखते ही किसान खुशी से उछल पड़ा। कल से वह अपने खेतों की सिंचाई कर सकेगा ये सोचकर वह अपने घर चला गया।

अगले दिन वो किसान पानी लेने के लिए कुएं पर पहुंचा। कुएं के नजदीक रखी बाल्टी जैसे ही उसने कुएं में डाली की तभी पीछे से आ कर एक व्यक्ति ने उससे कहा कि ये कुआं तो उसका है। उस आदमी ने किसान से कहा कि अगर वो कुएं से पानी निकालना चाहता है तब उसको कुआं खरीदना होगा। फिर उसके बाद किसान ने सोचा कि सिंचाई के लिए उसको समय समय पर पानी की जरूरत तो पड़ेगी ही तो उसने कुआं खरीद लेने का फैसला कर लिया। किसान और उस आदमी के बीच एक रकम तय की गई। किसान ने उस आदमी से अगले दिन तय रकम देने का वादा कर लिया।

इधर किसान जब घर पहुंचा तो उसने अपने दोस्तों व करीबी लोगों से पैसे उधार लेकर तय रकम का इंतजाम कर लिया। अगले दिन उस आदमी के घर पहुंचकर उसने पैसे देकर कुआं खरीद लिया। किसान खुश हो उठा क्योंकि अब ये कुआं उसका हो गया। अगले दिन की बात है, जब किसान ने कुएं में बाल्टी गिराकर पानी निकालना शुरू किया तभी वो आदमी आ धमका और उसने कहा कि रूको, अभी तुम इस कुएं से पानी नहीं निकाल सकते हो। किसान ने पूछा क्यों...तब उस आदमी ने कहा कि मैंने तुम्हें कुआं बेचा है, कुएं का पानी तो मैंने तुमको बेचा ही नहीं है। कुएं का पानी तो अभी भी मेरा ही है। अब किसान उस शातिर आदमी की चाल में बुरी तरह से फंस चुका था, इंसाफ की गुहार लगाते हुए किसान राजा के दरबार में शिकायत करने पहुंचा। 

जैसा कि आप जान ही गए होंगे कि वो राजा अकबर ही थे। राजा अकबर के दरबार में जब इस तरह का अनूठा मामला सामने आय़ा तो सारे दरबारी चकित रह गए। राजा ने किसान की फरियाद सुनकर उस आदमी को भी दरबार में बुलावा भेजा। राजा ने उस आदमी से पूछा कि जब तुमने कुआं बेच दिया तब इस कुएं का पानी क्यों नहीं निकालने दे रहे हो। 

फिर उस आदमी ने सफाई देते हुए कहा कि महाराज, मैेंने तो बस कुआं बेचा था, पानी नहीं। उस आदमी की बात सुनकर राजा भी सोच में पड़ गए, अब अकबर की समझ में नहीं आ रहा था कि इंसाफ करें भी तो कैसे। फिर उन्होंने इस मुश्किल का हल निकालने के लिए बीरबल को याद किया। 

बीरबल अपने समय के सबसे बुद्धिमान लोगों में जाने जाते थे और तो और राजा जब किसी जटिल मामले में फंसते तो वे बीरबल की सलाह अवश्य लेते थे। पहले तो बीरबल ने दोनों की बातों को गंभीरतापूर्वक सुना फिर उसके बाद बीरबल ने उस आदमी से कहा कि ठीक है कि तुमने सिर्फ किसान को अपना कुआं बेचा है लेकिन अब उस कुएं में तुम्हारा पानी क्या कर रहा है? कुआं तो तुम्हारा है नहीं, जाकर सबसे पहले उस कुएं से पानी निकाल लो। बीरबल के इतना कहते ही उस आदमी के हाथ पांव फूलने लगे, वो समझ गया कि इस बार उसका पाला तीसमारखां से पड़ा है। उस आदमी ने राजा से फौरन माफी मांगी और ये कह दिया कि कुएं के साथ साथ पानी पर भी बस किसान का ही अधिकार है। बीरबल की बुद्धिमानी की वजह से उस किसान को इंसाफ मिल पाया औऱ अकबर ने भी बीरबल की खूब प्रशंसा की। 

कहानी से शिक्षा- किसान औऱ कुएं की कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें किसी के साथ धोखाधड़ी करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही हमें खुद को बहुत चालाक नहीं समझना चाहिए। बेईमानी करने की नीयत रखने वालों को जुर्माना औऱ कानूनी सजा भी मिल सकती है।

अकबर के दरबार में बीरबल के बुद्धिमानी की परीक्षा

क्या आप जानते हैं कि अकबर और बीरबल की पहली बार मुलाकात कहां और कैसे हुई थी? बादशाह अकबर एक बार किसी जंगल में रास्ता भटक गए थे, तब बीरबल ने ही उनको रास्ता दिखाया था। बीरबल का असली नाम महेशदास था। बादशाह अकबर बीरबल की बुद्धिमानी से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने महेशदास का नाम बदलकर बीरबल रख दिया। बादशाह अकबर के प्रमुख सलाहकारों में से एक थे बीरबल। बीरबल की बादशाह अकबर से करीबी रिश्ते को देखकर कई दरबारी उनसे ईर्ष्या करते थे। राजा मानसिंह जो कि बादशाह अकबर के रिश्तेदार भी थे उनको भी बीरबल से जलन थी। एक दिन दरबार में मानसिंह ने बीरबल की परीक्षा लेने की बात कह दी। बादशाह अकबर की आज्ञा लेकर उसने बीरबल से 3 सवाल पूछा। 

पहला सवाल- आसमान में कितने तारे हैं?

मानसिंह का ये सवाल बेहद कठिन था। इस सवाल को सुनकर अकबर भी सोच में पड़ गए कि क्या इस सवाल का जवाब बीरबल के पास होगा। दरबार में बीरबल से जलने वाले दरबारियों के चेहरे खिल उठे क्योंकि उन्हें पक्का यकीन था कि बीरबल तो इस सवाल का जवाब दे ही नहीं सकता है। 

इस सवाल को सुनकर भी बीरबल के चेहरे पर मुस्कान बनी रही, बीरबल ने कहा कि अरे इस सवाल का जवाब तो बहुत आसान है। जानते हैं फिर बीरबल ने क्या किया, बीरबल ने दरबार में एक भेड़ को लाया और कहा कि जितना इस भेड़ के शरीर में बाल हैं उतने ही तो आसमान में तारे हैं। अगर मानसिंह को अब भी मेरे जवाब पर शक है तो वे भेड़ के बाल और आसमान के तारों की गिनती करके देख सकते हैं। बीरबल के इस हाजिर जवाबी को सुनकर बादशाह अकबर भी मुस्कुरा उठे।

दूसरा सवाल: धरती का केंद्र कहां है?

मानसिंह के इस सवाल को सुनकर बीरबल ने तुरंत जवाब दिया कि जहां आप खड़े हैं वही तो धरती का केंद्र है। इस जवाब को दरबार में उपस्थित लोग समझ नहीं पाए, फिर बीरबल ने एक रेखा खींचा और वहां एक छड़ी को गाड़ दिया। बीरबल ने कहा कि यही जगह जहां मैंने छड़ी को गाड़ा है वही धरती का केंद्र है, अगर किसी को विश्वास ना हो तो वह धरती को माप करके मेरी सत्यता को परख ले। बीरबल की इस चतुराई को देखकर मानसिंह निरुत्तर हो गए। 

 तीसरे सवाल में पहेली:  एक परख है सुंदर मूरत, जो देखे वो उसी की सूरत, फिक्र पहेली पाई न, बोझन लागा आई न।

मानसिंह ने तीसरे सवाल के रूप में बीरबल को एक पहेली बुझने को कहा। बीरबल ने काफी देर तक सोच विचार किया। उसके बाद बीरबल ने कहा कि ये तो बहुत आसान सा पहेली पूछ लिया आपने मानसिंह जी। आपके इस पहेली का उत्तर है आईना। आईने के सामने खड़ा होने वाला इंसान एक सुंदर मूरत है। आईने में उसे अपनी सूरत जो दिखाई देती है। 

मानसिंह के तीनों सवालों का सटीक जवाब दे कर बीरबल ने अपनी बुद्धिमानी का डंका हर तरफ बजा दिया। 

अकबर बीरबल की कहानी से शिक्षा- इस कहानी से यही सीखने को मिला है कि इंसान चाहे तो कठिन से कठिन सवालों का भी जवाब दे सकता है बशर्ते उसको संयम से काम लेना चाहिए औऱ अपने दिमाग का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए। 

अकबर बीरबल की कहानी: रेत से चीनी अलग करना

एक बार की बात है, बादशाह अकबर का दरबार सजा हुआ था। दरबार में सभी सभासद मौजूद थे तभी अचानक एक व्यक्ति दरबार में उपस्थित हुआ। उस आदमी के हाथ में एक मर्तबान था। सब उसके हाथ में मौजूद मर्तबान को देखने लगे। तभी अकबर ने उस आदमी से पूछा कि आखिर इस मर्तबान में है क्या?

बादशाह अकबर के सवाल को सुनकर उस आदमी ने कहा कि इसमें चीनी और रेत का मिश्रण है। अकबर ने पूछा कि क्यों, तब उस आदमी ने कहा कि गुस्ताखी माफ हो बादशाह सलामत, मैंने बीरबल की बुद्धिमानी के कई किस्से सुने हैं, मैं चाहता हूं कि बीरबल इस रेत में से बिना पानी का प्रयोग किए चीनी का एक-एक दाना अलग कर दे। फिर क्या था, सभी दरबारी एकटक बीरबल की तरफ देखने लग गए।

बादशाह अकबर ने बीरबल को देखते हुए कहा कि देख लो बीरबल, ये तुम्हारे लिए एक चुनौती है। बीरबल ने मुस्कुराते हुए अकबर को कहा कि आप चिंता ना करें महाराज, मैं इस परीक्षा को भी पास कर लूंगा। इसके बाद अब सब दरबारी ये जानने को उत्सुक थे कि आखिर बीरबल अब क्या करने वाला है। बीरबल अपनी जगह से उठे और फिर उस मर्तबान को लेकर महल में मौजूद बगीचे की तरफ बढ़ चले।  अब बीरबल बगीचे में एक आम के पेड़ के नीचे पहुंचे। इसके बाद बीरबल ने उस मर्तबान में मौजूद रेत औऱ चीनी के मिश्रण को आम के पेड़ के चारों तरफ फैलाने लगा।

तब उस आदमी ने बीरबल से पूछा कि आखिर आप क्या कर रहे हैं। जबाव देते हुए बीरबल ने कहा कि इसका पता आपको कल चल जाएगा। उसके बाद सब महल वापस लौट आए इसके बाद अब सबको कल होने का इंतजार था। अगले दिन समस्त दरबारी, बादशाह अकबर औऱ बीरबल उसी बगीचे में आम के पेड़ के पास पहुंचे। 

सभी ने देखा कि अब वहां सिर्फ रेत मौजूद है औऱ चीनी नहीं। दरअसल हुआ यूं कि रेत में मौजूद चीनी को चींटियों ने निकालकर अपने बिल में जमा कर लिया था और जो थोड़ी बहुत चीनी बची थी उसको भी उठाकर चींटी अपने बिल में जमा करने के लिए ले जा रहे थे। तब उस आदमी ने कहा कि चीनी कहां गई। बीरबल ने जवाब देते हुए कहा कि रेत से चीनी अलग हो गई है, अगर आपको चीनी चाहिए तो चींटियों के बिल में घुसना पड़ेगा। बीरबल का जवाब सुनकर वहां उपस्थित सभी लोग हंसने लगे। 

अकबर बीरबल की इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि हमें किसी को भी नीचा दिखाने का प्रयास नहीं करना चाहिए नहीं तो बाद में खुद अपमानित होना पड़ सकता है।

अकबर का तोता

एक बार की बात है, बादशाह अकबर बाजार घूमने के लिए निकले। बाजार में बादशाह को एक तोता नजर आया। दरअसल इस तोते के मालिक ने उसको बहुत अच्छी-अच्छी बातें सिखाई थी और इसलिए वह तोता बहुत प्यार से बातें करता था। अकबर को ये तोता इस कदर भाया कि उन्होंने इस तोते को मुंहमांगी कीमत देकर खरीद लिया। तोते को महल में अच्छी तरह से देखभाल करने का उन्होंने सेवकों को निर्देश दिया। 

अकबर जब कोई बात इस तोते से पूछते तो तोता तुरंत जवाब देता था। तोते से अकबर इस कदर प्रभावित हो गए कि वो उनके लिए मानो जान से भी प्यारा हो गया। महल में तोते के लिए सुख सुविधाएं बढ़ा दी गई। जैसे जैसे समय बीतता रहा तोते से बादशाह अकबर का प्यार बढ़ता रहा। बादशाह अकबर ने सेवको को निर्देश दिया कि यह तोता मरना नहीं चाहिए और जिसने भी इस तोते के मौत की खबर सुनाई तो उसको फांसी की सजा दे दी जाएगी। महल के सभी सेवक तोते का पूरा ध्यान रखते थे लेकिन एक दिन ऐसा हुआ की बादशाह अकबर का सबसे चहेता तोता मर गया।

तोते के मरते ही पूरे महल में मानो हड़कंप सा मच गया। सब यही विचार करने लगे कि आखिर बादशाह अकबर को ये बात बताए तो कौन? परेशान सेवकों ने काफी देर चिंतन करने के बाद विचार किया कि बीरबल की मदद ली जाए। महल के सारे सेवक मदद की गुहार लगाने के लिए बीरबल के पास पहुंचे और उनको सारे बातों की जानकारी दी। सेवकों की हालत को देखकर बीरबल ने उनको आश्वस्त किया कि वे खुद बादशाह अकबर को इस बात की जानकारी देंगे और वे लोग परेशाना ना हो। इसके बाद बादशाह अकबर से मिलने के लिए बीरबल महल की तरफ रवाना हुए। 

बीरबल ने बादशाह अकबर के पास पहुंचकर कहा कि महाराज एक अत्यंत दुखद खबर है। अकबर ने पूछा कि बताओ तो सही आखिर हुआ क्या है? बीरबल ने फिर कहा कि आपका प्यारा तोता ना तो कुछ खा रहा है और ना कुछ पी रहा है, उसने अपनी आंखें बंद कर ली है और उसकी कोई हरकत भी नजर नहीं आ रही है। अकबर सारी बात समझ गए औऱ गुस्से में बोले कि ये क्यों नहीं सीधे सीधे कह रहे हो कि तोता मर चुका है। बीरबल ने कहा कि हां महाराज, लेकिन ये बात मैंने नहीं आपने कही है इसलिए अब आप मेरी जान बक्श दीजिए। अकबर अब कुछ भी बोल नहीं सके। और इस तरीके से बीरबल की सूझबूझ और चतुराई की वजह से अन्य सेवकों की भी जान बच गई। 

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि कितना भी मुश्किल वक्त क्यों ना आए हमें घबड़ाना नहीं चाहिए बल्कि सूझबूझ से काम लेना चाहिए। हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम अपने दिमाग का इस्तेमाल करके मुश्किल से मुश्किल दौर से भी बाहर आ सकते हैं। 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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