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अपने साथ कराएं ये 5 दिनचर्या का पालन अपने बच्चे को

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3 से 7 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 15, 2018

अपने साथ कराएं ये 5 दिनचर्या का पालन अपने बच्चे को

बच्चे को अच्छी आदतों की सीख देना माता-पिता की जिम्मेदारी है इसलिए जरूरी है कि उसे शुरूआत से ही दिनचर्या का पालन कराया जाए। इससे न सिर्फ उनमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने की ताकत आती है, बल्कि इससे उनका शारीरिक व दिमागी विकास भी होता है।  एक नियमित दिनचर्या  शिशु को न केवल अपनी देख-भाल करने के काबिल बनाती है बल्कि उन्हें सुरक्षित होने का अहसास भी देती है। इसके अलावा यह उनके बर्ताव जैसे जिद्दी या गुस्सैल होना आदि समस्याओं को काबू रखने में भी मदद करती है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही खास बातों के बारे में जो बच्चों की दिनचर्या में जरूर शामिल होनी चाहिए।

 

1. शारीरिक कसरत

कहा जाता है कि एक स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ दिमाग बसता है। माता-पिता को चाहिए कि वे शारीरिक व्यायाम को शिशु की दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करें। चलना, दौड़ना या कोई भी शारीरिक कसरत बच्चों को शारीरिक तौर पर चुस्त-दुरुस्त बनाए रखता है और उनके विकास के लिए  भी फायदेमंद होता है। इसके अलावा यह उनके शरीर और मन को सेहतमंद रखता है, उनकी मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने के अलावा उन्हें ऊर्जावान और फुर्तीला बनाए रखता है।

 

2. साफ-सफाई

साफ-सफाई एक ऐसी आदत है जो एक स्वस्थ जीवन पाने के लिए जरूरी है क्योंकि यह हमें बीमारियों से बचाती है। इसलिए, शिशु को बचपन से ही अच्छी सेहत पाने के लिए साफ-सफाई की खासियत बताना और उनमें साफ-सफाई की आदतें पैदा करना जरूरी है।

 

रोजाना नहाना, सुबह और रात को सोने से पहले दांत साफ करना, खाने-पीने से पहले हाथ धोना, अपने घर में और आसपास की जगहों को साफ-सुथरा रखना वातावरण को स्वच्छ रखने के साथ-साथ हमें भी सेहतमंद रखता है। इसलिए साफ-सफाई को शिशु की दिनचर्या में शामिल कराएं।

 

3. सेहतमंद खान-पान

एक स्वस्थ और सेहतमंद शिशु सभी को प्यारा लगता है और इसके लिए उसके खान-पान की आदतों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है जिससे उसका अच्छा विकास मुमकिन हो सके। बचपन से सेहतमंद खाने की आदत शिशु को एक स्वस्थ जीवन शैली जीने के लिए तैयार करती है।

 

माता-पिता को चाहिए कि वे परिवार के रोजाना खान-पान (मांसाहार या शाकाहार) में उन चीजों को शामिल करें जिससे शिशु की खुराक संतुलित रहे और उसमें कैलोरी और पोषक तत्वों की सही मात्रा हो।

 

4. खेल-कूद और और मनोरंजन

जीवन के दूसरे अन्य कामों की तरह हमारे लिए खेल-कूद और मनोरंजन भी जरूरी है। अपने शिशु को इसके लिए पूरा समय दें और हो सके तो आप खुद भी उसके साथ शामिल हों।

 

खेल-कूद और मनोरजंन गतिविधियां बच्चों में सहयोग और एक-साथ मिलकर काम करने जैसी खूबियों का विकास करती हैं। मस्ती करना, नए लोगों से मिलना उनकी सामाजिक और भावनात्मक समझ को बढ़ाने में मददगार होता है। यह शिशु का खुद में भरोसा बढ़ाता है, उसे खुश रखता है, अपनी बात कहने और जीवन में कामयाब होने की खूबी पैदा करता है।

 

5. भरपूर नींद और आराम

अब बात अच्छी नींद और पूरे आराम की। रात में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना अपनी जगह पर रात की सुकून भरी नींद शिशु के लिए बड़ी फायदेमंद होती है। डॉक्टरों के  मुताबिक शिशु के शारीरिक विकास के लिए जरूरी हारमोन, उसके गहरी नींद में सोने के दौरान ही निकलता है।

 

इस बारे में की गई और जाचों से पता चलता है कि बच्चों को सर्दी-जुकाम से बचाने और उनकी पढ़ाई-लिखाई में बेहतरी के लिए अच्छी नींद लेना मददगार होता है और यह बच्चों में मोटापे की समस्या से बचाव करने में भी असरदार है।

 

बच्चे दूसरों को देखकर ही सीखते हैं, खासकर अपने माता-पिता को देखकर, तो खुद ही अपने शिशु के लिए आदर्श बनें और उसे वही सीख दें जिसे आप खुद अपना सकें। यह भी ध्यान रखें कि अच्छी आदतें रातभर में नहीं अपनाई जा सकतीं।

 

अपने शिशु को इन्हें सीखने और इनका पालन करने का समय दें क्योंकि यह दिनचर्या अपनाना उसके जीवनभर काम आने वाला है।

 

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