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स्वास्थ्य

बच्चों को रात में देरी से सुलाने के दुषप्रभाव

Parentune Support
3 से 7 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 14, 2021

बच्चों को रात में देरी से सुलाने के दुषप्रभाव
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक जगना आम बात है, लेकिन देर से सोना शरीर व स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। खासकर इसका नुकसान बच्चों पर ज्यादा होता है। अगर आप भी रात में देरी से सोते हैं और अपने साथ बच्चों को भी जागकर रखते हैं, तो ये आदत बदल डालिए। इससे आपके बच्चे को काफी नुकसान पहुंच सकता है। यहां हम बताएंगे कि आखिर देरी से बच्चे को सुलाने के क्या नुकसान हैं।
 

ये हैं नुकसान

  1. बढ़ता है मोटापा – सही से न सोने की वजह से बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है। एक रिसर्च से पता चला है कि जो बच्चे देर रात तक जागते हैं, वह मोटापे का शिकार होते हैं। दरअसल शरीर में मौजूद लेप्टिन हार्मोन भूख को बढ़ाता है, लेकिन अगर बच्चे की नींद पूरी हो जाए तो इस हार्मोन की सक्रियता कम हो जाती। इसका नतीजा ये होता है कि बच्चे को भूख ज्यादा नहीं लगती है और वह जरूरत के हिसाब से ही खाते हैं।
     
  2. दिमाग होता है कमजोर -  देरी से सोने की वजह से बच्चे अस्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा उनका दिमाग और याद्दाश्त भी कमजोर होती है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने बच्चे को जल्दी सोने की आदत डालें।
     
  3. इम्यून सिस्टम पर पड़ता है असर – नींद पूरी न होने पर बच्चे का इम्यून सिस्टम खराब होता है। नींद पूरी न होने पर बच्चे को जुकाम, खांसी व सर्दी की भी समस्या रहती है। इसके अलावा देरी से सोने से बच्चे को पेट की प्रॉब्लम भी हो सकती है। यही नहीं इसका असर उसके शरीर में मौजूद ग्लूकोस पर भी पड़ता है और मधुमेह होने का डर रहता है।
     
  4. चिड़चिड़ा होना – बच्चों को अधिक नींद की जरूरत होती है। अगर नींद पूरी न हो तो उनमें चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कत हो सकती है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप बच्चे को समय पर सुलाएं।
     

बच्चों को जल्दी सुलाने के टिप्स
 

  • सोने के करीब आधे घंटे पहले कमरे की लाइट बंद कर दें। कमरे में किसी तरह का शोर न हो।
  • बच्चों के सोने और जगने का चार्ट बनाएं और उसे उसी के अनुसार रोजाना सुलाएं।
  • बच्चे के सोने के लिए घर में शांत माहौल बनाएं। खुद भी उसी समय सोने की आदत डालें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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