पेरेंटिंग बाल मनोविज्ञान और व्यवहार

सार्वजनिक जगहों पर छोटे बच्चों को ले जाते वक़्त रखें इन बातों का ख़याल

Parentune Support
1 से 3 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 13, 2018

सार्वजनिक जगहों पर छोटे बच्चों को ले जाते वक़्त रखें इन बातों का ख़याल

बच्चे  हमेशा उस तरह बर्ताव नहीं करते जैसा आप चाहते हैं. ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर कई बार माता-पिता को शर्मिंदा होना पड़ जाता है. बच्चे औरों के सामने कई बार अलग सा बर्ताव करने लगते हैं. ऐसा न हो, इसके लिए आप बच्चों को इन टिप्स के सहारे आसानी से ट्रेन कर सकते हैं.
 

1. थके हुए या भूखे बच्चे को कभी भी कहीं बाहर ले कर न जायें. ऐसे में बच्चे चिढ़चिढ़े हो जाते हैं. उन्हें भरपूर आराम दें और ख़याल रखें कि बहार जाने से पहले वो ठीक से खा लें.
 

2. बच्चे की बात सुनें. जब बच्चे माता-पिता से जुड़ा हुआ महसूस नहीं करते, तब भी वो कई बार इस तरह का बर्ताव करने लगते हैं ताकि वो आपका ध्यान पा सकें. वो ख़ुद को आपके जितना क़रीब पाएंगे, उतने ही वो शांत रहेंगे.
 

3. उसे बहार ले जाने से पहले बताएं कि जहां वो जा रहे हैं, वहाँ क्या-क्या होगा और आप उनसे कैसे बर्ताव की उम्मीद रखते हैं.
 

4. रिश्तेदारों या दोस्तों के घर जाने पर उन्हें ऐसा महसूस न होने दें कि आपका ध्यान उन पर नहीं है. इससे वो असहज हो जाते हैं. यात्रा के समय भी उनसे समय-समय पर बात करते रहें.
 

5.  बच्चों को सीखना पसंद होता है. हर चीज़ को देख कर उनके मन में सवाल आते हैं. बहार जायें तो उन्हें आस-पास की चीज़ों के बारे में बताते रहें. इससे उनकी जिज्ञासा भी शांत होगी और वो बोर भी नहीं होंगे.
 

6. जब बच्चा बेचैन होने कगे तो उसे अनदेखा करने की गलती न करें. ज़्यादातर माता-पिता ऐसे में जल्दी काम निपटाने की कोशिश करने लगते हैं. जबकि ऐसे में आपको शांत होकर बच्चे से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए. उसे गले लगायें, उसकी आँखों में देखें और उसे गोद में उठाएं.
 

7.  उसकी बात हमेशा ध्यान से सुनें. जब बच्चे को लग़ता है कि अप उसे समझ रहे हैं तब वो ज़्यादा ख़ुश रहता है.
 

9. जब बच्चा ज़िद करने लगे तो हर बार उसकी मांग पूरी न करें. शुरू में बच्चा रोयेगा लेकिन धीरे-धीरे समझ जायेगा कि आप उसकी हर जायज़-नाजायज़ ज़िद पूरी नहीं करेंगे.
 

10. अगर बच्चा बाहर बिगड़ने लगे तो उसे कहीं अकेले में ले जायें, जिससे बाक़ी लोगों को असुविधा न हो. आप उसे कुछ देर के लिए कार में ले जाकर चुपा सकते हैं.
 

11. अपना धैर्य न खोएं. बच्चे बच्चों की तरह बर्ताव करते ही हैं और इसमें कोई शर्म की बात भी नहीं है. ये न सोचें कि देखने वाले क्या सोच रहे होंगे.

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