पेरेंटिंग बाल मनोविज्ञान और व्यवहार

बच्चों की कॉपी के आखिरी पन्ने पर नजर बनाएं रखें

Prasoon Pankaj
11 से 16 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 15, 2018

बच्चों की कॉपी के आखिरी पन्ने पर नजर बनाएं रखें

बच्चे का स्कूल बैग हो, लंच बॉक्स हो, कपड़े हों या जूते, आप अपने बच्चे के सारे सामान का सही तरीके से ध्यान रखती होंगी, लेकिन क्या आपने कभी अपने बच्चे की कॉपी के आखिरी पन्ने पर गौर किया है। अब आप सोच रही होंगी की बच्चे के नोटबुक के आखिरी पन्ने को क्यों चेक करना चाहिए। दरअसल अगर किसी बच्चे के मन की भावनाओं को जानना है तो उसकी कॉपी के आखिरी पन्ने को चेक कर लें। मैं आपको थोड़ा फ्लैशबैक में ले जाना चाहूंगा। मुझे याद है स्कूल के वो दिन जब हम अपने कॉपी के लास्ट पेज पर अपने नाम के हस्ताक्षर करते थे और ढेर सारे चित्र भी बनाया करते थे। उम्मीद है कि आपने भी जरूर कुछ ऐसा किया होगा 

 

मार्च 2018 में दिल्ली के मयूर विहार इलाके के एक नामी गिरामी स्कूल की नौवीं क्लास की छात्रा ने खुदकुशी कर ली। खुदकुशी के बाद पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए वो हम सबके लिए एक सबक बनकर रह गया है। पुलिस ने जब इस छात्रा के कॉपी किताब की जांच की तो सब हैरान रह गए। इस छात्रा ने अपने नोटबुक के आखिरी पन्ने पर कुछ ऐसी बातों को लिखा जिनसे साफ पता चलता है कि वो लंबे समय से डिप्रेशन के दौर से गुजर रही थी। 

 

छात्रा की कॉपी में ये सब बातें लिखी थी

 

इस छात्रा ने अपने कॉपी के लास्ट पेज पर I am dumb, I am failure, I hate my self जैसी बातों को लिखा था। इसी पेज पर छात्रा ने अपना हस्ताक्षर कई तरीके से किया था। एक जगह तो इस छात्रा ने खुद को डॉक्टर भी लिखा था। इससे ये पता चलता है कि ये छात्रा भविष्य में डॉक्टर बनना चाहती थी। 

 

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

 मुंबई के बाबा हॉस्पिटल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक सागर मुंदड़ा के मुताबिक छोटी उम्र के बच्चे अपनी कॉपी के आखिरी पन्ने पर अपने मन की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कुछ-कुछ लिखते हैं। फिल्म 'तारें जमीं पर' में दिखाया गया कि आमिर खान ने एक बच्चे की कॉपी में कुछ तस्वीरों को देखा और इन तस्वीरों से ये जाहिर हो रहा था कि वो बच्चा अपनी मां से दूर होता जा रहा है। 

 

बच्चों में डिप्रेशन की स्थिति की कैसे करें पहचान / How to Identify Depression Status in Children in Hindi

  •   वरिष्ठ मनोचिकित्सक सागर मुंदड़ा का कहना है कि कोई बच्चा अचानक डिप्रेशन में नहीं आता है कहीं ना कहीं इसके पीछे लगातार हो रही कुछ ऐसी घटनाएं हो सकती हैं जिनसे उसके अंदर हीन भावना पैदा होने लगती है। ऐसे में आप अपने बच्चे के स्वभाव में हुए बदलाव पर नजर बना कर रखें।
  • उदाहरण के तौर पर कुछ बच्चे इस कदर जिद पर अड़ जाते हैं कि वो धमकी देते हुए ये कह देते हैं कि अगर मेरी मांग पूरी नहीं हुई तो मैं खुदकुशी कर लूंगा। अगर इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ जाए तो इसको गंभीरता से लें ना कि इसको सामान्य बात मान कर इग्नोर कर दें क्योंकि देखा गया है कि ऐसी बातें बच्चे को अंदर तक प्रभावित कर देती है और यही बच्चे डिप्रेशन में चला जाता है।
  • आप इस बात को नोटिस जरूर करें कि आपके बच्चे के व्यवहार में बीते कुछ दिनों में कोई बदलाव तो नहीं आया है जैसे कि अगर पहले के मुकाबले कम बातचीत करने लगा हो, ज्यादा समय घर से बाहर बिताने लगा हो या फिर अचानक से डायरी लिखने लगा हो। कहने का तात्पर्य ये है कि आप अगर अपने बच्चे में कुछ भी परिवर्तन महसूस कर रहे हैं तो फिर बच्चे के समय गुजारिए और उससे बातचीत करिए।

खुदकुशी करने वाली उस छात्रा ने भी अपनी कॉपी में मन की बात लिखी थी। काश उसके माता पिता या स्कूल के शिक्षक ने उसके कॉपी के आखिर पन्ने को पढ़ लिया होता और उसके मनोभाव को समझने का प्रयास किया होता तो शायद ये बच्ची बच सकती थी। 

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