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पेरेंटिंग स्वास्थ्य

बच्चों को हीट स्ट्रीक की चपेट में आने से ऐसे बचाएं

Parentune Support
1 से 3 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 25, 2020

बच्चों को हीट स्ट्रीक की चपेट में आने से ऐसे बचाएं
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

गर्मी का मौसम अपने पूरे चरम पर चल रहा है। इस मौसम में शिशुओं और बच्चों को हीट स्ट्रीक का खतरा ज्यादा होता है। बच्चे बड़ो  की तरह अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। कई बार लंबे समय तक घर से बाहर गर्मी या धूप में रहने से गर्म हवाएं बच्चो को अपनी चपेट में ले लेती है, और लू लग जाती  है। इस समय देश के कई राज्यों में तापमान चालीस डिग्री से ऊपर चल रहा है। तापमान  ऊपर जाने से बच्चो को शरीर में कई प्रकार की दिक्कतें महसूस होने लगती है।  शरीर से पानी खत्म होने लगता है। खून गाढ़ा हो जाता है। गर्म हवाएं चलने के कारण छोटे बच्चो को ज्यादा देखबाल की जरुरत पड़ती है। गर्मी के बढ़ते ही बच्चो में हीट स्ट्रीक का खतरा बढ़ गया है जिसे देखते हुए डॉक्टर्स ने लोगो को सावधानी बरतने की हिदायत दी है। डॉक्टर्स का कहना है, की शरीर में पानी की कमी से हीट स्ट्रीक की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए बच्चो को समय समय पर पानी और पर्याप्त मात्रा में दूध पिलाते रहे। हीट स्ट्रीक लगने पर सादे पानी के भीगे कपडे से पोछकर बच्चे के शरीर का तापमान नीचे लायें। हीट स्ट्रीक लगने पर बुखार की दवाई भी काम नहीं करती। आपातकाल स्थिति पर 108 नंबर पर फ़ोन करें एम्बुलेंस बुलाये या फिर बच्चे को नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। आईये जानते है की हीट स्ट्रीक के मुख्य लक्षण क्या हैं और कैसे आप अपने बच्चो को हीट स्ट्रीक से बचा सकती  हैं।

हीट स्ट्रीक के लक्षण:-

बढ़ती गर्मी बच्चों के लिए नई-नई बीमारियां लेकर आ रही है। इनमें से एक खतरनाक बीमारी है हीट स्ट्रीक, जिसकी चपेट में ज्यादातर बच्चे आ रहे हैं।  गर्मी नन्हे मुन्ने बच्चो के लिए घातक हो सकती है।  हीट स्ट्रीक के लक्षण को पहचानिए।  हीट स्टिक के लक्षण में बच्चे के शरीर का तापमान 104 F से आधिक हो जाना, जी मिचलाना, उल्टी, थकान, मासपेशियो में ऐठन, सिरदर्द, चक्कर आना, सुखी गर्म और फलश त्वचा, चिडचिडापन, पसीने का ना होना शामिल है।  

हीट स्ट्रीक के कारण:-

1.छोटे बच्चो के लम्बे समय तक घर से बाहर धूप में  खेलने पर बच्चो को लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। गर्म हवाओ के संपर्क में आने से बच्चे के शरीर का तापमान बढ़ जाता है और बच्चा बीमार हो जाता है।   

2.कुछ बच्चे पानी कम पीते है, या जब तक मां जबरदस्ती पानी पीने के लिए ना कहे बच्चे पानी नहीं पीना चाहते।  गर्मी में पानी कम पीने के कारण बच्चों को डीहाईड्रेशन हो सकता है और हीट स्ट्रीक का खतरा बना रहता है।  

3.कभी कभी बच्चे  बाहर  ऐसे  फैंसी कपडे पहन के निकल जाते है जिनसे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती या मां के द्वारा बच्चे को मोटा कपडा पहनाना या ज्यादा ढक कर रखने से भी बच्चो को तापघात हो जाता है।    


4. धूप में बच्चो के साथ बाहर निकलने पर बच्चो को सर ना ढकने से भी लू लग जाती है।

5. बच्चो में अधिक मात्रा में पसीना निकलने के कारण भी उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है।   

हीट स्ट्रीक से बचने के उपाय:-

1.नवजात शिशुओ को छांव वाली ठंडी जगह में रखे और नियमित रूप से स्तनपान कराएं।  

2.6 महीने से बड़े बच्चो को पर्याप्त मात्रा में दूध और पानी पिलाते रहे और साथ ही उन्हें नींबू पानी, आम पन्ना, बेल या नींबू का शरबत जैसे तरल पदार्थ देते रहे।   

3. हीट स्ट्रीक लगने पर पानी से भीगे कपडे से बच्चे के शरीर को पोछकर बच्चे के शरीर का तापमान नीचे लाएं।  

4.बच्चे को अगर धुप में ले जा रही हैं तो हल्का टोपी कॉटन का डाल ले या फिर छतरी    
का इस्तेमाल करें।  

5. गर्मी में बच्चो के साथ कम से कम बाहर निकले, नंगे बदन नंगे पाँव  बच्चो को बाहर न खड़ा होने दे।  

6. हीट स्ट्रीक लगने पर छोटे बच्चो के हाथो पैरो की मालिश करें, जिससे रक्तसंचालन होता है।  

7. बच्चो को ऐसी फल और सब्जियां दे, जिसमे ज्यादा पानी हो जैसे तरबूज, खरबूजा, लीची, आम, खीरा, ककडी आदि।

8.बच्चो को गर्मी में हलके सूती कपडे ही पहनाये। जो गर्मी में बच्चो के लिए आरामदायक हो बच्चो को ऐसे कपडे पहनाये, जो ढीले हो, तंग कपडे बिलकुल न पहनाये ताकि बच्चो के शरीर में हवा लगती रहे। सिंथेटिक और पोलीएस्टर कपड़ो से बचें।  स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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कमैंट्स ()
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| Jun 12, 2018

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| Sep 04, 2020

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Sadhna Jaiswal

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