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तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए बच्चे को स्कूल भेजने के दौरान इन 8 बातों को जरूर चेक करें?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 01, 2021

तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए बच्चे को स्कूल भेजने के दौरान इन 8 बातों को जरूर चेक करें
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका के बीच अपने देश के कई शहरों में स्कूल खोले जा रहे हैं। ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा छिड़ गई है कि क्या मौजूदा हालात में स्कूलों का खोलना सुरक्षित है। इस विषय को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों की राय भी अलग-अलग तरीके से सामने आ रहे हैं। हम आपको इस ब्लॉग में एक्सपर्ट्स की राय के अलावा विदेश में स्कूलों को खोलने से पहले क्या इंतजाम किए गए हैं उसके बारे में भी विस्तार से बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही पेरेंट्स होने के नाते अपने बच्चों को स्कूल भेजने से पहले स्कूल प्रशासन से किन बातों के बारे में जरूर पूछ लेना चाहिए इसके बारे में भी हम आपको इस ब्लॉग में बताने जा रहे हैं। 

स्कूल खोलने को लेकर क्या कहना है स्वास्थ्य सेवा से जुड़े एक्सपर्ट्स का?

सबसे पहले बात करते हैं डॉ नरेश त्रेहन की। डॉ नरेश त्रेहन अभी बच्चों के लिए स्कूल खोले जाने के पक्ष में नहीं है। डॉ त्रेहन ने कहा है कि मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है कि स्कूल खोलने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है। डॉ त्रेहन ने कहा है कि जब तक बच्चों के लिए वैक्सीन ना आ जाए तब तक धैर्य बनाए रखें। डॉ त्रेहन के मुताबिक जब सभी बच्चों का टीकाकरण हो जाए उसके बाद ही स्कूल खोले जाने चाहिए। डॉ त्रेहन ने ये भी कहा है कि हमें अपने देश की विशाल आबादी को देखते हुए भी सतर्क रहना चाहिए। 

वहीं दूसरी तरफ एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने बातचीत के दौरान बताया था कि स्कूल को खोले जाने पर विचार करना चाहिए। डॉ गुलेरिया के मुताबिक हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि बच्चे की पढ़ाई लिखाई के अलावा उनके सर्वांगीण विकास के लिए भी स्कूल जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा डॉ गुलेरिया ने ये भी कहा कि मिड डे मील योजना से बहुत सारे बच्चों का पेट भरता है। डिजिटल डिवाइस की कमी के चलते बहुत सारे गरीब बच्चे ऑनलाइन पढाई करने में सक्षम नहीं हैं।  

अमेरिका में स्कूलों को खोलने से पहले किस तरह के किए गए हैं इंतजाम?

आपको इस बात की जानकारी हो या ना हो लेकिन अमेरिका में भी डेल्टा वैरिएंट के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, बावजूद इसके वहां भी स्कूलों को फिर से खोल दिया गया है। हालांकि बच्चों को डेल्टा वैरिएंट के खतरे से बचाव के लिए अमेरिका में गाइडलाइन भी जारी कर दिए गए हैं। आइये जानते हैं कि इस गाइडलाइन के मुताबिक मुख्य रूप से किन बातों पर ध्यान देने की बात की गई है। 

यहां जान लीजिए- क्या है Delta Plus का नया वैरिएंट और कैसे करें बचाव?

  • अमेरिका के न्यूयॉर्क में प्रत्येक दूसरे सप्ताह में स्कूलों में रैंडमली 10 फीसदी अनवैक्सीनेटेड लोगों की कोरोना जांच होगी। स्कूल के सभी शिक्षकों व कर्मचारियों का वैक्सीनेशन होना अनिवार्य शर्तों में शामिल किया गया है।

  • इसके साथ ही आप के लिए एक और महत्वपूर्ण जानकारी ये है कि अमेरिका में 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए इसी साल के मई महीने से ही वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू कर दिए गए हैं लेकिन 12 साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम का अब तक ऐलान नहीं किया गया है।

  • स्कूल जाने वाले 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों का कोरोना वैक्सीन लगना जरूरी

  • 12 साल से कम उम्र के बच्चे जिनका टीकाकरण अब तक नहीं हुआ है उनकी कोरोना की जांच होगी

  • क्लास में किसी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने पर उन लोगों को 10 दिनों के लिए क्वेरेंटाइन किया जाएगा जिनको अब तक वैक्सीन नहीं लग पाई है।

  • जिन बच्चों को क्वेरेंटाइन किया जाएगा उनको ऑनलाइन क्लासेज मुहैया कराया जाएगा

  • वैसे बच्चे जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है और अक्सर बीमार पड़ जाते हैं उन सभी बच्चों को सप्ताह में 1 दिन घर पर जाकर या ऑनलाइन पढ़ाई कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

  • स्कूल में जैसा कि पहले एक ही समय में लंच का टाइम तय होता था अब उसमें बदलाव करते हुए लंच टाइम सभी क्लासेज के लिए अलग-अलग निर्धारित किए जाएंगे।

  • जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया कि स्कूल के तमाम शिक्षक और अन्य कर्मचारियों का शत प्रतिशत वैक्सीनेशन होना जरूरी है।

  • स्कूलों में वॉश बेसिन की पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं और इसके अलावा लिक्विड सोप रखना भी अनिवार्य है।

अपने बच्चे को स्कूल भेजने के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

कोरोना से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहें। अब तक बच्चे हमारे घर में और हमारी नजरों के सामने रहते थे लेकिन स्कूल के खुल जाने के बाद वे अब घरों से बाहर निकलेंगे और हमारी निगरानी में नहीं रहेंगे। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि हम अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का जरूर ध्यान रखें। आपको बताना चाहूगा कि अमेरिका समेत कई और अन्य देशों में 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम मई महीने में ही शुरू कर दिए गए थे लेकिन हमारे देश में अब तक बच्चों के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम की शुरुआत नहीं हो पाई है। इस कारण से भी ये बहुत आवश्यक है कि हम खास एहतियात बरतें।

  • सबसे जरूरी है कि हम स्कूल से कुछ सवालों का जवाब अवश्य मांगें- ये बहुत जरूरी है कि हम अपने बच्चों को सीधे स्कूल भेजने से पहले स्कूल प्रबंधन से कुछ सवाल अवश्य पूछें और इन सवालों का संतोषजनक जवाब आने के बाद ही बच्चे को स्कूल भेजना शुरू करें। सबसे पहला सवाल ये कि क्या आपका स्कूल तमाम प्रकार की सावधानियों, बुनियादी ढांचों और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए पूरी तरह से तैयार है? पेरेंट्स होने के नाते एक सवाल आपको खुद से भी करना चाहिए कि क्या आपका बच्चा तमाम प्रकार की सावधानियों के साथ स्कूल जाने के लिए तैयार है अथवा नहीं? आपको इस बात का भी पता अच्छे से होना चाहिए कि बच्चे को स्कूल जाने के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?

  • बच्चों के लिए वैक्सीनेशन- अपने देश में अभी बच्चों के वैक्सीन को लेकर परीक्षण का दौर तकरीबन अंतिम दौर में चल रहा है। जैसे ही आपको पता चलता है कि कोविड वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू हो गए हैं तो ये सुनिश्चित करें कि बच्चे का टीकाकरण हो जाए। ये भी जरूर जान लें- अपने देश में बच्चों के लिए वैक्सीनेशन को लेकर क्या है ताजा अपडेट?

  • अगर आपका बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर है और वो किसी बीमारी से ग्रसित है तो ये बेहतर होगा कि आप अपने बच्चे के लिए अभी ऑनलाइन स्कूल लर्निंग के विकल्प का ही चयन करें।

  • मास्क- अब तक आपका बच्चा घर पर ही रहता था लेकिन अब स्कूल जाने के लिए उसको घर से बाहर निकलना होगा इसलिए आप ये बहुत जरूरी है कि बच्चे को N 95 या N 99 मास्क पहनाएं और ये भी आवश्यक है कि बच्चे को मास्क सही से पहनने का तरीका अवश्य सिखाएं। ये भी जान लें- अपने बच्चे को मास्क पहनाना कैसे सिखाएं (In English)

  • वेंटिलेशन- ये सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है और इसको कतई नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। स्कूलों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि क्लासरूम में पर्याप्त मात्रा में वेंटिलेशन का इंतजाम किया गया है अथवा नहीं। क्लासरूप में HEPA फिल्टर के माध्यम से हवा का परिसंचरण होता रहता है और एरोसोल निकल जाता है। क्लासरूम में एयर प्यूरीफायर, CO2 मॉनिटर, पर्याप्त वेंटिलेशन होना चाहिए।

  • स्कूलों के शौचालयों में भी एग्जॉस्ट पंखे लगाए जाने चाहिए और नियमित तौर पर उनकी सफाई का इंतजाम किया जाना चाहिए। आदर्श स्थिति तो ये है कि क्लास के शुरू होने से 2 घंटे पहले और उसके बाद भी वेंटिलेशन चालू रहना चाहिए। क्लासरूम की खिड़कियां, दरवाजे भी अगर खोल कर रख सकते हैं तो ये ज्यादा बेहतर। प्रयास ये करना चाहिए कि क्लासरूम अगर बाहर और खुले स्थान में लग सके तो बढिया। लंच टाइम के दौरान भी अगर बच्चे कैंटीन में एक साथ खाने की बजाय खुले स्थान में खाएं तो अच्छा रहेगा। सभी क्लास का एक साथ लंच टाइम निर्धारित करने की बजाय अलग-अलग समय में किया जाना चाहिए।  

  • शारीरिक दूरी का खास ख्याल- क्लासरूम की सिटिंग कैपेसिटी पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। कोरोनाकाल से पूर्व अगर किसी क्लासरूम में एकसाथ 50 बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता था तब मौजूदा दौर में इसको और कम किया जा सकता है। क्लासरूम को सेक्शन में बांटकर मैनेज किया जा सकता है। एक छात्र से दूसरे छात्र के बीच कम से कम 6 मीटर की शारीरिक दूरी का ध्यान रखना चाहिए। जब बच्चे खाना खा रहे हों तब तो शारीरिक दूरी का और ज्यादा ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यही वो वक्त होता है जब बच्चे मास्क नहीं पहनेंगे। 

  • स्कूल प्रबंधन की तरफ से ये सुनिश्चित किया जाए कि तमाम शिक्षक व कर्मचारीगण वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके हों। इसके अलावा पेरेंट्स ये भी जरूर सुनिश्चित करें कि स्कूल कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करने के लिए अनुबंधित हों। अगर बच्चा बीमार दिख रहा है तो उसको स्कूल नहीं भेजें और पेरेंट्स भी आपस में समूह बनाकर इस संदर्भ में कड़ी निगरानी करते रहें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

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