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स्वास्थ्य

बढ़ती उम्र में कैफीन की आदत से बचाएं अपने बच्चे को

Anubhav Srivastava
11 से 16 वर्ष

Anubhav Srivastava के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 30, 2020

बढ़ती उम्र में कैफीन की आदत से बचाएं अपने बच्चे को
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आजकल कैफ़ीन का प्रयोग बहुत से खाद्य पदार्थों में होने लगा है। कैफीन वह रसायन है, जो कॉफी और चाय में होता है और जिसके सेवन से फुर्ती और ऊर्जा महसूस होती है। यह आलस्य और नींद दूर भगाती है। पूरी दुनिया में चाय और कॉफी पीने का चलन जिस तरह है, उसे देखते हुए कैफीन को दुनिया में सबसे ज्यादा प्रचलित ‘साइकोएक्टिव ड्रग’ यानी दिमाग पर असर करने वाली ड्रग कहा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि आधुनिक समाज में कैफीन सेवन की मात्र खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है और इस पर नियंत्रण रखना जरूरी है। बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता है कि वे कितना कैफ़ीन ले रहे हैं।


कैफीन की ज्यादा मात्रा हानिकारक होती है और इससे बेचैनी, अस्थिरता, सिरदर्द, अनिद्रा, अपच जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। दिक्कत यह है कि अब तक वैज्ञानिक ठीक-ठीक यह नहीं बता पाए हैं कि कैफीन की कितनी मात्र सुरक्षित है। एक अनुमान के मुताबिक़ अमरीका में 90 फ़ीसदी से अधिक व्यस्क रोज़ाना इसका इस्तेमाल करते हैं। दुनिया भर के ज्‍यादातर लोग कॉफी पीकर दिन की शुरुआत करते हैं। संभवतः चाय कॉफी के कैफीन से उतनी समस्या नहीं है, जितनी दूसरी कई खाने-पीने की चीजों जैसे शीतल पेय, एनर्जी और स्नैक्स में भी मिलाई जा रही कैफीन से है।
 

कॉफी को लेकर किए जा रहे अध्ययनों में अलग-अलग तरह की बातें की जाती रही हैं। अमरीकी अधिकारी स्नैक्स और एनर्जी ड्रिंक में कैफ़ीन की सुरक्षित मात्रा की जांच कर रहे है। वे इस शक्तिवर्धक पदार्थ के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। हालांकि एनर्जी ड्रिंक निर्माताओं का कहना है कि उनके उत्पाद सुरक्षित हैं और उनके इस्तेमाल से किसी नुक़सानदायक प्रभाव का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हॉवर्ड स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की ओर से अभी हाल में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक़ सीमित मात्र में कॉफ़ी पीने का स्वास्थ्य पर कोई ख़तरनाक़ प्रभाव नहीं पड़ता है।
 

  • अध्ययन बताते है कि कैफ़ीन के प्रयोग से प्रोस्टेट और स्तन कैंसर का ख़तरा कम होता है। अभी हाल में हुए एक अध्ययन के मुताबिक़ कॉफ़ी और चाय पीने से टाइप टू डायबीटीज़ का ख़तरा कम होता है। कैफीन की सीमित मात्रा सुरक्षित है और शायद फायदेमंद भी। सबसे बड़ा फायदा यह है कि दिमाग पर असर डालने वाले दूसरे रसायनों की तरह कैफीन शरीर और दिमाग को सुस्त नहीं बनाती, बल्कि उसकी कार्यक्षमता बढ़ाती है। इन सबके परिणामस्वरूप एफ़डीए ने वादा किया है कि अब वह यह तय करेगा कि कैफ़ीन का कितना प्रयोग सुरक्षित है। कई लोग मानते हैं कि कॉफी पीने से विचार आते हैं। इतिहास में बहुत से ऐसे लोग हुए है जिनका कॉफ़ी से बहुत गहरा लगाव रहा है।
     
  • एक शीतल पेय की बोतल में लगभग एक कप चाय जितनी कैफीन हो सकती है। कैफीन की लत का अध्ययन कर रहे जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार कैफीन छोड़ने की प्रतिक्रिया में थकान, सिरदर्द, एकाग्रता में परेशानी, मासंपेशियों में दर्द और उबकाई जैसे लक्षणों दिखाई देते हैं। लेकिन कैफीन का प्रयोग हानिकारक है, इस पर वैज्ञानिक आम सहमति अभी बहुत दूर है। चाय-कॉफी तो बच्चे नहीं पीते, लेकिन शीतल पेय वे खूब पीते हैं और बच्चों के लिए कैफीन को अच्छा नहीं माना जाता। इसके अलावा एनर्जी ड्रिंक्स पीने का चलन भी बढ़ रहा है और उनमें तो कैफीन की मात्रा काफी ज्यादा होती है। साथ ही टॉफी, च्युइंग गम में भी कैफीन के प्रयोग का प्रचलन बढ़ रहा है, जिससे कि आपको अपने बच्चे के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।
     
  • कॉफी, चाय या सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैफीन की दैनिक खपत से लोगों में रक्त में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है और यह रोग को नियंत्रित करने के प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं। कैफीन से शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ा सकता है, जो रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि कर बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कैफीन का प्रयोग सोने के समय की सामान्य अवधि को छोटा करता है।
     
  • कैफीन आधुनिक जीवन का हिस्सा है। नियमित रूप से कॉफी पीने वालों में वयस्कों और बच्चों की बढ़ती संख्या शामिल है। एक या दो कप कॉफी प्रतिदिन के लिए ज्यादातर लोगों के लिए सिफारिश की है। बढ़ती उम्र में बच्चे भी दूसरों को देखकर यह मानने लगते हैं कि चाय- कॉफी से उन्हें देर रात तक और स्फूर्ति के साथ अपनी पढ़ाई, खेल आदि करने का अवसर मिलेगा। लेकिन इसके फायदे- नुक़सानों को देखते हुए आप हमेशा यही कोशिश करें कि आपका बच्चा दूध, फलों का ताजा जूस व मौसमी फलों को अपनी आदत का एक हिस्सा बनाए।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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