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क्या महत्व है बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का आपके बच्चे के लिए?

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संशोधित किया गया Jan 28, 2020

क्या महत्व है बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का आपके बच्चे के लिए
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

नए साल की शुरुआत त्योहारों के संग होती है। मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल व बसंत पंचमी जैसे कई त्योहार इनमें विशिष्ट हैं। यूं तो सभी त्योहारों का अपना अलग-अलग महत्व होता है लेकिन बसंत पंचमी खास तौर पर बच्चों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। विद्या की देवी सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी के दिन ही की जाती है। आज हम आपको इस ब्लॉग में साल के शुरुआती कुछ त्योहारों की विशेषताओं के बारे में बताने जा रहे हैं।
 

आपके बच्चे के लिए बसंत पंचमी का महत्व/Importance of Saraswati Puja or Basant Panchami

बसंत पंचमी हिंदुओं का ख़ास त्योहार है और यह त्योहार सभी हिन्दू धर्म और देवी देवताओं पर आस्था में आस्था रखने वालों के लिए ख़ास महत्व रखता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। सरस्वती पूजा(बसंत पंचमी) भारत, नेपाल व पश्चिमोत्तर बांगलादेश में बड़े उल्लास के साथ मनाई जाती है।

  1. इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण करती हैं।
  2. प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन 6 मौसमों में बांटा जाता था, उनमें बसंत लोगों का सबसे पसंदीदा मौसम था।
  3. बसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था, जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती थी। इसे बसंत पंचमी का त्योहार कहा जाता था।
  4. शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी में भी उल्लेखित किया गया है, पुराणों व कई काव्यग्रंथों में भी इसका चित्रण किया गया है।
  5. बसंत पंचमी को ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस भी माना जाता है।
  6. यही वजह है कि बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा की जाती है। आज जगह जगह बसंत पंचमी पर होने वाली सरस्वती पूजा इसी को दर्शाती है। 

मान्यताओं के मुताबिक इस दिन अधिकांश लोग अपने बच्चे का अक्षर संस्कार भी करवाते हैं। सरस्वती पूजा किताब-कॉपी और कलम की पूजा करने की भी परंपरा होती है। बहुत सारे जगहों पर धूमधाम से प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान के संग मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है।  

मकर संक्रांति का महत्व आपके बच्चे के लिए/Why Makar Sankranti Important for Your Child

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है। इस दिन स्नान, दान, तप, जप और अनुष्ठान का काफी महत्व है। मकर संक्रांति से दिन बढ़ने लगता है और रात की अवधि कम होने लगती है। क्योंकि सूर्य ही ऊर्जा का सबसे प्रमुख स्रोत है, इसलिए हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इसके अलावा ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम, प्रयाग में सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो सूर्य देव के पुत्र होते हुए भी सूर्य से शत्रु भाव रखते हैं। इसलिए शनिदेव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दें, इसलिए मकर संक्रांति पर तिल का दान किया जाता है।
 

क्या है लोहड़ी का महत्व आपके बच्चे के लिए

लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाबियों का त्योहार है, लेकिन इसे भारत के उत्तरी राज्यों में रहने वाले भी धूमधाम से मनाते हैं। यह सर्दियों में उस दिन मनाया जाता है जब दिन साल का सबसे छोटा दिन और रात साल की सबसे बड़ी रात होती है। इसे मनाने के दौरान एक अलाव जलाकर नृत्य और दुल्ला भट्टी की प्रशंसा के गीत गाए जाते हैं। सामान्यतः लोहड़ी सर्दी खत्म होने और बसंत के शुरू होने का सूचक है। यह माघ महीने की संक्रांति से पहली रात को मनाई जाती है। हर कोई पूरे जीवन में सुख और समृद्धि पाने के लिए इस त्योहार का जश्न मनाता है। लोहड़ी शब्द लोही से बना है, जिसका मतलब है वर्षा होना, फसलों का फूटना। एक लोकोक्ति है कि अगर लोहड़ी के समय बारिश न हो तो खेती को नुकसान होता है। इस तरह यह त्योहार मौसम के बदलाव व फसलों के बढ़ने से जुड़ा है। इस समय तक किसान सर्दी में जुताई व बुवाई जैसे काम कर चुके होते हैं। उन्हें सिर्फ फसलों के बढ़ने और उनके पकने का इंतजार रहता है। इसी समय से सर्दी घटने लगती है। इसलिए किसान इस त्योहार के माध्यम से सुखद व आशाओं से भरी परिस्थितियों की कामना करते हुए लोहड़ी मनाते हैं।

वहीं लोहड़ी को लेकर कुछ दंतकथाएं भी प्रचलित हैं। इसी कड़ी में एक कहानी यह है कि दुल्ला भट्टी नाम का एक मशहूर डाकू था। उसने एक निर्धन ब्राह्मण की 2 बेटियों सुंदरी व मुंदरी को जालिमों से छुड़ाकर उनकी शादियां कराईं व उनकी झोली में शक्कर डाली। इसका संदेश यह है कि डाकू होकर भी उसने निर्धन लड़कियों के लिए पिता का फर्ज निभाया। दूसरा संदेश यह है कि यह इतनी खुशी और उमंग से भरा त्योहार है कि एक डकैत भी इस दिन अपनी गलत आदत छोड़कर अच्छे काम कर देता है।
 

और क्या है पोंगल का महत्व आपके बच्चे के लिए?

पोंगल तमिलनाडू में मनाया जाने वाला त्योहार है। इसका तमिल हिंदुओं में काफी महत्व है। इसे हर साल जनवरी के मध्य में मनाया जाता है। इस त्योहार को लोग अच्छी फसल होने पर हर्षोल्लास से मनाते हैं। यह त्योहार 4 दिनों तक मनाया जाता है और हर दिन का अपना खास महत्व होता है। पोंगल का पहला दिन भोगी है। इसमें लोग बारिश प्रदान करने वाले भगवान इंद्र को कृतज्ञता जताते हुए जश्न मनाते हैं। इसके अलावा इस दिन सुबह घर की सफाई की जाती है और शाम को गोबर व लकड़ी की आग में घर के पुरानी व बेकार चीजों को फेंका जाता है। वहीं पोंगल का दूसरा दिन थाई पोंगल के रूप में जाना जाता है। इस दिन लोग मिट्टी के बर्तन में हल्दी की गांठ बांधकर घर के बाहर सूर्य़ देव के सामने चावल और दूध साथ में उबालते हैं और इसे सूर्य़ भगवान को भेंट करते हैं।

इसके अलावा गन्ने की छड़, नारियल, केले भी पेश किए जाते हैं। इस दिन चूना पाउडर से घरों के द्वार पर हाथों से परंपरागत रंगोली बनाई जाती है। पोंगल का तीसरा दिन मटूट पोंगल गायों और बैलों के नाम पर मनाया जाता है। इस दिन गायों व बैलों को घंटी, मक्के के ढेरों और पुष्पमाला के साथ सजाकर इनकी पूजा की जाती है। क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने अपने बैल बसब को पृथ्वी पर रहने का श्राप दिया था, इसी कारण ये फसलों की कटाई, हल जोतने आदि के काम भी आते हैं। ऐसे में इनको सम्मान देने के लिए इस दिन इनकी पूजा की जाती है। पोंगल का चौथा दिन कान्नुम पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन एक रस्म होती है, जिसमें पोंगल के बचे हुए पकवान को पान के पत्ते, गन्ने और सुपारी के साथ-साथ दुले हुए हल्दी के पत्तों पर आंगन में निर्धारित किया जाता है। इस रस्म के बाद घर की महिलाएं अपने भाइयों की चूना पत्थर, हल्दी तेल व चावल से आरती करती हैं और उनकी सुख समृद्धि की कामना करती हैं।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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