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पेरेंटिंग बाल मनोविज्ञान और व्यवहार

बच्चों में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण और क्या हैं उपचार

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Oct 04, 2019

बच्चों में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण और क्या हैं उपचार

बाइपोलर डिसऑर्डर शब्द आप बहुत कम सुनते होंगे, लेकिन पिछले कुछ साल में यह काफी चर्चा में आता जा रहा है। दरअसल बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी बीमारी है, जिससे पीड़ित व्यक्ति का मूड बहुत जल्दी-जल्दी स्विंग होता है। इसे द्विध्रुवी विकार के नाम से भी जाना जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति काफी गंभीर मिजाज का हो जाता है। इसका असर कई सप्ताह, महीनों व कई साल तक रहता है। आजकल बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। अगर आपके बच्चे में उन्माद या अवसाद की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो हो सकता है कि वह बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित है। इस ब्लॉग में हम आपको इस बीमारी के लक्षण, इलाज और इसका सामना करने के तरीके बताएंगे।

बाइपोलर डिसऑर्डर के क्या हैं लक्षण?

बात जब बच्चों में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षणों को पता करने की होती है, तो यह बहुत मुश्किल काम हो जाता है। दरअसल बच्चों के बहुत से स्वभाव बाइपोलर डिसऑर्डर से मिलते हैं। जैसे कि एक पल में बच्चा रोता है, तो दूसरे में हंसने लगता है। इसका मतलब ये नहीं कि उसे बाइपोलर डिसऑर्डर है। यहां हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे लक्षण जिन्हें देखकर आप समझ जाएंगे कि बच्चा बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित है या नहीं।

  1. गुस्सा और क्रोध – वैसे तो सभी बच्चों को कभी न कभी गुस्सा आता है, लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों को बहुत तेज गुस्सा आता है और वे हिंसात्मक भी हो जाते हैं। कई बार ऐसे बच्चे अपने साथ खेल रहे दूसरे बच्चों पर हमला भी कर देते हैं या फिर अपने ही खिलौनों को तोड़ना शुरू कर देते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चे अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं कर पाते। यह गुस्सा कई घंटों तक रह सकता है।
     
  2. मूड में अप्रत्याशित बदलाव -  वैसे तो छोटी उम्र के बच्चों का मूड पल-पल बदलता है और यह आम बात है, लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों का मूड बार-बार और जल्दी-जल्दी बदलता है। वह एक पल में अधिक नाराज और गुस्सा हो सकता है, तो कुछ ही घंटो बाद अधिक खुशमिजाज हो सकता है। इस दौरान आप उनकी शारीरिक ऊर्जा में कई बार उतार चढ़ाव देखेंगे। मिजाज में अप्रत्याशित बदलाव की वजह से ऐसे बच्चों को दोस्तों के साथ व घर के अन्य लोगों के साथ तालमेल बैठाने में काफी परेशानी आती है।
     
  3. उन्माद भरा स्वभाव – अगर आपको अपने बच्चे का स्वभाव उन्माद भरा लग रहा है, वह अधिक घमंड में रह रहा हो या खुद को सबसे बेहतर समझता हो तो आपको थोड़ा अलर्ट रहने की जरूरत है। ये लक्षण बाइपोलर डिसऑर्डर के हो सकते हैं। यही नहीं अगर बच्चा शारीरिक रूप से ऊर्जा से भरा रहता है, कई दिनों तक ठीक से न सोने के बाद भी पूरी तरह से स्वस्थ दिखता है, तुरंत सोचकर तुरंत ही किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाता है, तेजी से काम करता है तो ये लक्षण चिंताजनक हैं।
     
  4. अवसाद से भरा बर्ताव – अगर आपको अपने बच्चे में लगातार कुछ समय के अंतराल पर अवसाद भरा बर्ताव दिखे जैसे कि शारीरिक ऊर्जा में कमी, किसी भी काम में मन न लगना, थकान, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत, भूख में कमी, पेट में दर्द, सिरदर्द और मन में आत्महत्या करने जैसे बुरे ख्याल आना। अगर बच्चे में ये सब लक्षण दिख रहे हैं, तो समझ लीजिए कि वह बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित है।
     
  5. पारिवारिक प्रभाव – बाइपोलर डिसऑर्डर से प्रभावित अधिकतर बच्चों के पारिवारिक इतिहास में इसके लक्षण पाए गए हैं। अगर बच्चे के मां-बाप में से किसी को इस बीमारी की समस्या है, तो बच्चे में भी यह दिक्कत हो सकती है।
     
  6. अधिक प्यार की चाहत -   अगर बच्चा रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद आप से अधिक अपेक्षाएं रख रहा है, तो ये बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं। इस अवस्था में बच्चा चाहता है कि वह बहुत देर तक आपकी गोदी में पड़ा रहे, आप बहुत देर तक उसके सिर को सहलाते रहें, काफी देर तक उसके पैर की मालिश करें। यहां आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि ऐसा व्यवहार नॉर्मल बच्चे भी करते हैं, लेकिन अंतर इतना होता है कि नॉर्मल बच्चे ये सब चीजें ज्यादा देर तक के लिए नहीं चाहते, जबकि इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे यह सब गतिविधियां लंबे समय तक के लिए चाहते हैं।
     
  7. स्कूल में कटा-कटा रहना -  अगर बच्चा स्कूल में दूसरे बच्चों की तुलना में ज्यादा उग्र है, पढ़ाई में ध्यान नहीं दे रहा, स्कूल में खेलकूद की गतिविधियों में बाग नहीं ले रहा है, किसी भी काम को करने में मन नहीं लग रहा है या फिर स्कूल में दूसरे छात्रों से कटा-कटा रहता है, तो यह बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण हैं।
     
  8. मूर्खतापूर्ण बातें करना – बच्चा अगर लगातार आपसे मूर्खतापूर्ण बातें कर रहा है, उट-पटांग अभिनय कर रहा है, जल्दी-जल्दी अलग-अलग विषयों पर बात कर रहा है या फिर जरूरत से ज्यादा खुशी महसूस कर रहा है, तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है। ये सभी बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं।

क्या है कारण

बाइपोलर डिसऑर्डर बच्चों को किस वजह से होता है, इसका सटीक जवाब विशेषज्ञ अभी तक नहीं ढूंढ पाए हैं। लेकिन अलग-अलग देशों में हुए रिसर्च से कई ऐसी बातें सामने आईं हैं, जिन्हें इस बीमारी का कारण बताया जाता है।

  • इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह अनुवांशिकता बताई जाती है। अगर परिवार में किसी को बाइपोलर डिसऑर्डर रहा है, तो बच्चे में भी इसके होने की आशंका रहती है।
  • प्राकृतिक या जैव विविधता के कारण।
  • हमारा मस्तिष्क न्यूरोट्रंसमीटर की मदद से ठीक से काम करता है, लेकिन अगर इन न्यूरोट्रांसमीटर की कार्यप्रणाली की वजह से असंतुलन पैदा हो जाए तो बच्चा बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित हो सकता है।
  • तनाव या अपमान की स्थिति में भी बच्चा इस बीमारी का शिकार हो जाता है।

कैसे करें इलाज

इस बीमारी में इलाज के कई तरीके मौजूद हैं। इनसे काफी हद तक सुधार भी आता है। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख तरीके।

  1. दवाइयों से – आप इससे पीड़ित बच्चे को डॉक्टर को दिखाकर उनकी सलाह पर दवाइयां दे सकते हैं। इस बीमारी में मूड स्टेबिलाइजर्स, एंटीसाइकोटिक्स, एंटीड्रिप्रेसेंट-एंटीसाइकोटिक्स व एंटी टेंशन मेडिसिन जैसे अल्पार्जोलम (जैनैक्स) का भी इस्तेमला कर सकते हैं। हालांकि दवाई डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें।
     
  2. साइकोथेरेपी – आप इस बीमारी का इलाज साइकोथेरेपी से भी करा सकते हैं। साइकोथेरेपी के अलग-अलग प्रकार हैं, जिन्हें आप आजमा सकते हैं। सबसे पहले कॉग्निटिव विहेवियरल थेरेपी को अपना सकते हैं। यह टॉक थेरेपी है। वहीं साइकोएजुकेशन में आपको इस बीमारी के बारे में विस्तार से समझाया जाता है, ताकि आप इससे लड़ सकें। इसके अलावा इंटरपर्सनल एंड सोशल रिदम थेरेपी, दैनिक आदतों को नियंत्रित करने पर केंद्रित होती है। इसमें कोशिश की जाती है कि बच्चे को ठीक से सोने, व्यायाम करने व चलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
     
  3. लाइफ स्टाइल में बदलाव – आप बच्चे की लाइफ स्टाइल में कुछ बदलाव लाकर भी उसे बाइपोलर डिसऑर्डर से छुटकारा दिला सकते हैं। आप बच्चे के खाने और सोने का समय नियमित करें, मूड स्विंग्स को पहचानना सीखें, किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से जरूर परामर्श लें।

कैसे करें सामना

बच्चा अगर बीमार हो तो मां-बाप काफी परेशान हो जाते हैं। वहीं बच्चे को बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी बीमारी हो जाए तो यह परेशानी और बढ़ जाती है। बच्चे के ऐसे बदलते व्यवहार को देखकर उन्हें कुछ समझ नहीं आता। यहां हम बता रहे हैं कि आखिर आपको इस परिस्थिति का सामना कैसे करना चाहिए।

  1. इलाज के साथ प्यार व प्रोत्साहन भी दें – इस बीमारी में बच्चे को इलाज के साथ-साथ प्यार और प्रोत्साहन भी दें। आपका प्यार और प्रोत्साहन उसके दिमाग में सकारात्मकता लाएगा।
     
  2. सांत्वाना भी दें – इस अवस्था में बच्चे को हतोत्साहित बिल्कुल न करें। उसे सांत्वना देते रहें। गलती करने पर डांटने की जगह तारीफ करें।
     
  3. भावनाओं को समझें – इस बीमारी में बच्चे की मानसिक स्थिति बदल जाती है, ऐसे में आपको उसकी भावनाओं को समझना होगा।
     
  4. धैर्य दिखाएं – बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज में कई बार लंबा समय लग जाता है। ऐसे में आपको धैर्य़ से काम लेना होगा। अगर आप धैर्य छोड़कर गुस्सा होंगे तो बच्चा भी ठीक होने की जगह और झल्लाता जाएगा।

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