• लॉग इन करें
  • |
  • रजिस्टर
बाहरी गतिविधियाँ खेल कूद

फेवरेट क्रिकेटर के बचपन के किस्सों से प्रेरणा ले सकता है आपका बच्चा

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 08, 2019

फेवरेट क्रिकेटर के बचपन के किस्सों से प्रेरणा ले सकता है आपका बच्चा

अपने देश में क्रिकेट का जुनून सर चढ़ कर बोलता है। क्रिकेट को लेकर दीवानगी कुछ ऐसी है कि क्या बड़े और क्या बच्चे, सब एक दूसरे से बेझिझक स्कोर पूछ बैठते हैं और क्रिकेट का विशेषज्ञ तो हर कोई है। किस बैट्समैन को क्या शॉट मारना चाहिए और बॉलर से कहां चूक हुई इसके बारे में विश्लेषण करने में सब कोई माहिर है। एक मजेदार बात बताउं कि जब आपका पूरा परिवार एक साथ टीवी देखने बैठता होगा तो रिमोट किसके हाथ में रहेगा इसको लेकर अक्सर प्यारी नोंकझोंक देखने को मिलती होगी लेकिन अगर उसी समय में क्रिकेट का मैच चल रहा है तो हर कोई मैच देखने को लेकर उत्सुक रहते होंगे। आपके बच्चे को भी क्रिकेट देखना और क्रिकेट खेलना अच्छा लगता होगा। इसके अलावा आपके बच्चे का भी कोई ना कोई फेवरेट क्रिकेटर जरूर होगा। तो चलिए आज हम इस ब्लॉग में बात करते हैं मशहूर क्रिकेटर्स के बचपन से जुड़ी रोचक बातों के बारे में। आप अपने बच्चे को भी जरूर इन किस्सों के बारे में बताइयेगा ताकि वे भी इनसे प्रेरणा ले सकें।

सचिन तेंडुलकर के बचपन से जुड़े रोचक वाकये / Sachin Tendulkar Childhood In Hindi

सचिन तेंडुलकर- क्रिकेट की बात हो और सचिन का नाम ना आए, ऐसा भी भला हो सकता है क्या। सचिन के क्रिकेटिंग करियर के बारे में आप बखूबी जानते होंगे लेकिन आज हम आपको सचिन के बचपन से जुड़ी मजेदार बातें बताने जा रहे हैं। साल 2104 में सचिन की ऑटोबायोग्राफी प्लेइंग इट माई वे प्रकाशित हुई थी। इस किताब में उनके बचपन से जुड़ी बेहद खास बातें दुनिया के सामने आया था।

 

  • सचिन का पहला बल्ला आया था कश्मीर से- सचिन आज भी अपने पुराने सामान और पुरानी यादों को सहेज कर रखने में विश्वास करते हैं। सचिन के लिए उनका पहला बल्ला यानि बैट आज भी बेहद खास है। सचिन के लिए पहला बैट उनकी बड़ी बहन सविता कश्मीर से लेकर आई थी। उस समय में सचिन बस 5 साल के थे। सचिन की बड़ी बहन सविता छुट्टियों के लिए कश्मीर गई थीं।
     
  • सचिन की क्रिकेट यात्रा की शुरुआत कैसे हुई- सचिन के क्रिकेट गुरु रमाकांत आचरेकर ने उनको सुबह स्कूल से पहले और शाम को स्कूल से आने के बाद प्रैक्टिस कराना शुरू किया। सचिन तकरीबन 4 घंटे तक क्रिकेट की प्रैक्टिस करते थे। प्रैक्टिस करते-करते जब सचिन थक जाते तब उनके गुरु स्टंप के ऊपर एक रुपये का सिक्का रख देते थे। सिक्का रखने के बाद उनके गुरु आचरेकर कहते कि अगर वह उनको आउट नहीं कर पाएं तो ये 1 रुपया सचिन का हो जाएगा। और इस तरीके से सचिन ने अपने गुरु से कुल 13 सिक्के जीते। सचिन क्रिकेट में इस कदर रम गए कि प्रैैक्टिस को ज्यादा समय देने के लिए वे अपने चाचा के साथ रहने लगे क्योंकि उनके चाचा का घर शिवाजी पार्क के पास था जहां सचिन बचपन के दिनों में प्रैक्टिस करते थे।
     
  • सचिन का नामकरण- सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई में हुआ था। प्रत्येक बच्चे के जन्म लेने के बाद उनके माता-पिता नामकरण करते हैं। क्या आप जानते हैं कि सचिन का नाम उनके पिता ने सचिन ही क्यों रखा। दरअसल उनके पिता मशहूर संगीत निर्देशक सचिन देव बर्मन के बड़े प्रशंसक थे और उन्होंने उनके नाम पर ही अपने सबसे छोटे बेटे का नाम सचिन रखा।
     
  • साइकिल के लिए जिद करने का खामियाजा - बचपन में सचिन के सभी दोस्तों के पास साइकिल थी। सचिन ने साइकिल खरीदने के लिए अपने पैरेंट्स से जीद की। और तो और सचिन ने अपने घरवालों को ये भी कह दिया कि जब तक उनकी नई साइकिल नहीं आएगी तब तक वे नीचे खेलने नहीं जाएंगे। सचिन की जिद को देखते हुए उनके पिता ने उनके लिए नई साइकिल खरीद दी। नई साइकिल को पाकर सचिन बेहद खुश हो गए। सचिन बहुत तेज गति से साइकिल चलाते थे। उनके सामने से एक ठेला आ रहा था। सचिन सही समय पर ब्रेक नहीं लगा पाए और हवा में उछल गए। इसके बाद उनको 8 टांके लगे। फिर कुछ दिनों तक सचिन के साइकिल चलाने पर घरवालों ने रोक लगा दी।
     
  • लक्ष्य प्राप्ति के लिए खुद को केंद्रित रखा- सचिन बताते हैं कि जब मैं काफी छोटा था तो बहुत शरारती था। लेकिन उसके बाद जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो फिर इस गेम ने मुझे अनुशासित होना सीखाया। मैंने अपना लक्ष्य तय कर लिया और मैं अपने लक्ष्य से कभी डिगा नहीं। सचिन का मानना है कि करियर को लेकर बच्चों के ऊपर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाना चाहिए। बच्चों को स्वच्छंदता चाहिए मुझे भी क्रिकेट खेलने की मेरे परिवार ने पूरी छूट दी और तभी मैं अपने सपने को साकार कर पाया।

महेंद्र सिंह धोनी का बचपन / Unkown Facts About Childhood Of Mahendra Singh Dhoni In Hindi

महेंद्र सिंह धोनी- टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी का जन्म बेहद सामान्य परिवार में हुआ था। आपको जानकर हैरानी होगी की धोनी को बचपन में क्रिकेट खेलने की बजाय फुटबॉल खेलना ज्यादा पसंद था। धोनी के कोच ठाकुर दिग्विजिय सिंह ने इनको फुटबॉल की जगह क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। धोनी के जीवन से जुड़ी एक मजेदार बात बताना चाहूंगा। धोनी फुटबॉल टीम में बतौर गोलकीपर के तौर पर खेलते थे, धोनी के इसी गुण को देखते हुए उनके कोच ने विकेट कीपर के तौर पर खेलने का सुझाव दिया। बचपन के दौरान भी धोनी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने में यकीन रखते थे। कॉलोनी में धोनी अपने से बड़े उम्र के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना ज्यादा पसंद करते थे। धोनी बताते हैं कि मैं अपने से 5-6 साल ज्यादा बड़े लड़कों के साथ खेलता था। उनके पास मेरे से ज्यादा पॉवर थी और उनके अंदर क्रिकेट की समझ भी ज्यादा था। इसका लाभ मुझे मिला और मुझे अपने क्रिकेट को निखारने का अवसर मिल सका।

 

विराट कोहली का बचपन / How was Virat Kohli childhood In Hindi

विराट कोहली- टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली बचपन से ही क्रिकेट को पसंद करते थे। विराट के पिता इनके साथ जब ये बहुत छोटे थे तो क्रिकेट खेलते थे। जब विराट महज 3 साल के थे तब इनका फेवरेट खिलौना बैट हुआ करता था। विराट को क्रिकेट की प्रैक्टिस कराने के लिए उनके पिता उनको साथ लेकर जाते थे। विराट जब 8 या 9 साल के रहे होंगे तब इनके पिता प्रेम कोहली ने इनको क्रिकेट क्लब में दाखिला करवा दिया। विराट अपने स्कूल के दिनों में खेलने के साथ-साथ पढाई में अच्छा परफॉर्म करते थे।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • कमेंट
कमैंट्स()
Kindly Login or Register to post a comment.
+ ब्लॉग लिखें
टॉप बाहरी गतिविधियाँ ब्लॉग
Tools

Trying to conceive? Track your most fertile days here!

Ovulation Calculator

Are you pregnant? Track your pregnancy weeks here!

Duedate Calculator
Loading
{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}

{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}