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चुकंदर है लाभदायक आपकी गर्भावस्था के लिए

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संशोधित किया गया Feb 07, 2018

चुकंदर है लाभदायक आपकी गर्भावस्था के लिए

चुकंदर स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और कम मात्रा में प्रोटीन और फैट पाया जाता है। इसका जूस सब्जियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह प्राकृतिक शुगर का सबसे अच्छा स्रोत है। चुकंदर का सेवन गर्भावस्था के दौरान  आपको अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है। यह आपके शरीर में होने वाली एनीमिया को दूर करने का सबसे अच्छा साधन है। गाजर- चुकंदर का जूस व सलाद खून की कमी को पूरा करते हैं। रोजाना आधा गिलास गाजर और चुकंदर का रस मिलाकर पिएं। इसका सेवन करने से  आपके शरीर में खून की समस्या ठीक हो जाती है।

गर्भावस्था के दौरान आपको तो  इसका सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान प्रायः खून की कमी की समस्या आ जाती है। यदि आप चुकंदर का हर रोज सेवन करती हैं तो आपको एनीमिया या रक्ताल्पता की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।

  • चुकंदर में पाए जाने वाले नाइट्रेट के कारण गर्भावस्था के दौरान यह  आपके लिए काफी फायदेमंद  है। चुकंदर फोलिक एसिड से भरपूर होती है जो गर्भावस्था के दौरान अपने आहार में शामिल करने से आपको काफी फायदा पहुँचा सकता है।  चुकंदर में अच्छी मात्रा में फोलिक एसिड होता है। यह पोषक तत्व गर्भावस्था के दौरान आपको और आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। चुकंदर के सेवन से आपके गर्भ में पलने वाले बच्चे के स्पाइनल कार्ड के निर्माण में मदद मिलती है। फोलिक एसिड आपके बच्चे में न्यूरल ट्यूब दोष को रोकने में मदद करता है|
     
  • चुकंदर का जूस एनर्जी को बढ़ावा देने और आंखों की सेहत के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसके अलावा यह विटामिन, मैग्‍नीशियम और बायोफ्लेवोनॉइड से भरपूर होता है। यह पौष्टिक सब्जी शरीर में हार्मोन के प्राकृतिक उत्पादन को बढ़ा भी सकती है। चुकंदर का जूस पीलिया, हेपेटाइटिस, मतली और उल्टी के उपचार में लाभप्रद होता है। आपको चुकंदर के जूस में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर इन बीमारियों में तरल भोजन के रूप में लेना चाहिए। गैस्ट्रिक अल्सर के उपचार के दौरान सुबह नाश्ते से पहले एक गिलास चुकंदर के जूस में एक चम्मच शहद को मिलाकर पियें।
     
  • चुकंदर नाइट्रेट्स का अच्छा स्रोत है। इसका सेवन करने पर नाइट्राइट्स और गैस नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाता है। ये दोनों ही तत्व आपकी धमनियों को चौड़ा करने और ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार होते है। चुकंदर में काफी मात्रा में फाइबर, फ्लैवोनॉइड्स और बेटासायनिन मौजूद होता है। जिसके कारण इसका रंग लाल बैंगनी होता है। यह एलडीएल आपके शरीर में कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है। जिसके कारण यह धमनियों में नहीं जमता। इसका सेवन करने से आपको दिल के दौरे का जोखिम कम हो जाता है।
     
  • चुकंदर में मिनरल सिरका मौजूद होता है, जो शरीर में कैलिशयम के रूप इस्तेमाल होता है। गर्भावस्था में कैल्सियम की कमी आपके और आपके बच्चे के लिए घातक हो सकती है।
  • जो लोग गर्भावस्था- जनित डायबिटीज से परेशान होते हैं, वो चुकन्दर खाकर मीठा खाने की अपनी इच्छा को आसानी से शांत कर सकते हैं। इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती हैं और यह फैट फ्री होने के कारण डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक अच्छा वेजिटेबल होता है।
     
  • चुकंदर का सेवन करने से आपके शरीर की ऊर्जा बढ़ती है जो सुरक्षित गर्भधारण के लिए बहुत जरूरी है। साथ ही चुकंदर में फाइबर की मात्रा होती है, जिसके कारण यह एक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल होता है। इसे हम कब्ज का रामबाण इलाज भी कह सकते हैं क्योंकि इसका सेवन करने से स्टूल नर्म हो जाते हैं। जिसके कारण पेट सारे टाक्सिंस आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
     
  • वास्तव में, चुकंदर कई बीमारियों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। इन सब अद्भुत गुण के बावजूद, ज्‍यादा चुकंदर खाना आपके लिए खतरनाक भी हो सकता है। जैसे कि रक्‍तवर्णकता या विल्‍सन रोग से पीडि़त लोगों को चुकंदर के अधिक सेवन से बचना चाहिए क्‍योंकि इससे शरीर में कॉपर और आयरन की अधिकता हो जाती है। रक्‍तवर्णकता शरीर में आयरन की अधिकता के कारण होता है, जबकि विल्‍सन रोग शरीर में कॉपर की कमी नहीं होनी चाहिए।
     
  • चुकंदर का रस शरीर में कैल्शियम के स्‍तर को कम करता है, जो कई बीमारियों को जन्‍म देता है। ऐसा चुकंदर का रस ज्‍यादा पीने के कारण होता है। यानी चुकंदर शरीर में कैल्शियम की मात्रा को भी कम कर देता है। इससे आपको हड्डियों से जुड़ी कई समस्याएं घेर सकती हैं। इसलिए अगर आपको हड्डियों से जुड़ी कोई समस्‍या है तो इसे लेने से पहले किसी अच्‍छे डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें।
     

अंततः यही कहा जा सकता है कि गर्भावस्था के दौरान चुकंदर खाना लाभदायक होता है लेकिन बहुत ज्यादा सेवन का आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अतः इस संबंध में डाक्टरी सलाह ले लेना बेहतर होगा। 

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