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स्वास्थ्य

माहवारी में भी सुरक्षित है कोरोना की वैक्सीन लेना

दीप्ति अंगरीश
गर्भावस्था

दीप्ति अंगरीश के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Apr 26, 2021

माहवारी में भी सुरक्षित है कोरोना की वैक्सीन लेना
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

- दो मई से निश्चिंत होकर युवतियां लगवा सकती हैं कोरोना का वैक्सीन
- पीसीओडी या यूटीआई में भी वैक्सीन लेने से नहीं होगा नुकसान

एक मई से देशभर में 18 साल से अधिक उम्र के युवाओं के लिए कोरोना टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। महावारी या मासिक धर्म के समय महिलाओं को वैक्सीन लगवाने संबंधी कई मैसेज सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें मासिक धर्म और इम्यूनिटी को लेकर कहा गया है कि युवतियों को मासिक धर्म के समय वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए, इस समय शरीर में इम्यूनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता का स्तर कम होता है। युवतियों के वैक्सीन लगवाने सहित कई भ्रांतियों को लेकर आईसीएमआर से जुड़े कम्यूनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट विशेषज्ञ डॉ. अरुण शर्मा ने महत्वपूर्ण सवालों का जवाब दिया

सवाल-  क्या महिलाओं को महावारी या पीरियड के पांच दिन तक कोरोना का वैक्सीन नहीं लेना चाहिए?
जवाब- अधिकतर लोगों द्वारा यह कहा जा रहा है कि महिलाओं को पीरियड्स के पांच दिन तक कोरोना का वैक्सीन नहीं लेना चाहिए, इस समय इम्यूनिटी कम होती है। जवाब है ऐसा कुछ नहीं है कोविड वैक्सीन लेने का महिलाओं में होने वाले पीरियड्स या महावारी से कोई लेना देना नहीं है। महिलाएं कभी भी वैक्सीन लगवा सकती हैं।

सवाल- क्या गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु को वैक्सीन से किसी तरह का खतरा है, क्या उन्हें वैक्सीन लेने के बाद अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है?

जवाब- सबसे पहली बात यह है कि गर्भवती महिलाओं के लिए अभी वैक्सीन नहीं है, गर्भवती महिलाएं अभी वैक्सीन नहीं लगवाएगीं। ऐसा नहीं है कि यह वैक्सीन गर्भवती महिलाओं को किसी तरह का नुकसान पहुंचाएगी लेकिन अभी तक वैक्सीन का परीक्षण गर्भवती महिलाओं पर नहीं किया गया है, इसलिए हम वैक्सीन और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर आश्वस्त नहीं है। इसलिए अभी जो निर्देश हैं, उसके अनुसार गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन नहीं लगाना है।

सवाल- एक भ्रांति यह भी है कि वैक्सीन से महिलाओं को प्रजनन क्षमता प्रभावित होगी? क्या यह सच है?

जवाब- बिल्कुल नहीं, गर्भवती महिलाओं की गर्भधारण करने की क्षमता पर कोरोना की वैक्सीन का किसी भी तरह का दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा और न ही यह प्रजनन क्षमता को प्रभावित करेगी, यह एक गलत धारण है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है ऐसा नहीं सोचना चाहिए।

सवाल- क्या वैक्सीन लेने के बाद महिलाएं रक्तदान कर सकती हैं, वैक्सीन लेने के बाद अमूमन कितने दिन का इंतजार करना चाहिए?

जवाब- यदि किसी व्यक्ति को रक्त की जरूरत है और कोरोना की वैक्सीन लेने के बाद आपको किसी को रक्तदान करना है तो मैं यह कहूंगा कि कोरोना की वैक्सीन का रक्तदान से कोई सीधा संबंध नहीं है। आप कब रक्तदान करना चाहते हैं इसका वैक्सीन से कोई लेना देना नहीं है।
 

सवाल-क्या महिलाओं को कोरोना की वैक्सीन लेने के बाद वर्कआउट या व्यायाम नहीं करना चाहिए?
जवाब- नहीं ऐसा कोई भी निषेध नहीं है कि आप वैक्सीन लगवाने के बाद वर्कआउट नहीं कर सकते या व्यायाम न करें, हां एक बात का ध्यान रखना है कि वैक्सीन लगवाने की जगह पर थोड़ा दर्द हो सकता है और वहां पर थोड़ी सूजन आ सकती है। ऐसी स्थिति में जहां वैक्सीन लगी है और वहां दर्द और सूजन भी है तो तब तक यह ठीक न हो जाएं उस हाथ से व्यायाम करना नहीं करना चाहिए।

सवाल- क्या पीसीओएस की शिकार महिलाओं को वैक्सीन लेने के बाद कोई विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब- पीसीओएस यानि पॉलिसिस्टक ओवेरियन सिंड्रोम, लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक अनुसंधान मेरी जानकारी अभी नहीं आया है मैने इस संबंधी शोध पत्र भी पढ़े हैं, कहीं कोई ऐसी जानकारी नहीं है कि जिसमें यह कहा गया हो कि जिन्हें पीसीओएस है उनमें वैक्सीन लगवाने से कोई नुकसान हो सकता है। ऐसी कोई रिसर्च सामने नहीं आई है। लेकिन अगर किसी को इस बात का संदेह है तो वह पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

सवाल- क्या कोरोना के टीके का गर्भस्थ बच्चे पर किसी तरह का असर पड़ सकता है?

जवाब- अभी तक गर्भवती महिलाओं पर वैक्सीन का परीक्षण नहीं किया गया है, जिससे यह कहा जा सके कि वैक्सीन से गर्भस्थ शिशु या फीटस को किसी तरह का नुकसान होगा, क्योंकि अभी यह वैक्सीन गर्भवती महिलाओं के लिए नहीं है। जो अभी तक रिसर्च हुई है उसमें एक अन्य बात देखी गई  कि यदि किसी गर्भवती महिला को कोरोना का संक्रमण होता है तो उससे गर्भस्थ बच्चे पर क्या असर होगा इसके अभी एक दो मामले देखे गए हैं लेकिन निश्चित परिणाम नहीं पाए हैं।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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