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गर्मी में कब और कितनी बार करे डायपर्स का प्रयोग अपने बच्चे के लिए

Sadhna Jaiswal
1 से 3 वर्ष

Sadhna Jaiswal के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 21, 2018

गर्मी में कब और कितनी बार करे डायपर्स का प्रयोग अपने बच्चे के लिए

 डायपर्स के आने के बाद तो माता-पिता की आधी समस्या मानो खतम ही हो गयी है। छोटे बच्चों के साथ बाहर जाने की और उन्हें किसी के गोद में देने में कोई समस्या नहीं रह गई है।  डायपर्स के पहले उन्हें यही चिंता रहती थी की कही बच्चा सुसु- पॉटी ना कर दे, और दूसरे लोग भी इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि कहीं उनके कपड़े ना खराब हो जाएं। आज हम आपको इस ब्लॉग में बताने जा रहे हैं कि गर्मी के मौसम में बच्चों का डायपर कब और कितनी बार प्रयोग करना चाहिए। 

डायपर का प्रयोग करते समय इन बातों का रखें ध्यान/ Keep These Things In Mind When Using Diapers In Hindi

 एक नवजात शिशु का डायपर दिन में कई बार बदलना आवश्यक होता है क्युंकी वो बड़े बच्चों की तुलना में दिन में 20 गुना अधिक बार पेशाब करते हैं।

  1. दिन में 8-12 डायपर का प्रयोग करना पड़ सकता है --डायपर बदलना भी शुरुआत में चुनौतीपूर्ण होता है। आपको ध्यान रखना होगा की जो डायपर इस्तेमाल कर रही हैं, वह डिस्पोजेबल है या कपड़े की। बहुत अलग-अलग तरह ही कपड़े की लंगोट उपलब्ध हैं, और ये अलग तरह से ही इस्तेमाल की जाती हैं। मगर एक बार जब आपको इनके इस्तेमाल की आदत हो जाएगी, तो शिशु की नैपी बदलना आपके बाएं हाथ का खेल होगा। आपको नैपी पहनाने का अभ्यास करने के बहुत मौके मिलेंगे, क्योंकि शुरु में आपको शिशु की आठ से 12 नैपी बदलने की जरुरत होगी। इस ब्लॉग को जरूर पढ़ लें :- डायपर रैश के लिए घरेलू उपचार

  2. कब बदले डायपर्स और क्यों  -- डायपर्स में नमी सोखने की शक्ति होती है जो कपड़ों में कम होती है। इसलिए यदि इसे बच्चे को एक बार पहना दिया जाए तो 4 या 5 बार पेशाब करने के बाद ही डायपर बदला जाता है। यदि उसने पॉटी किया हो तो इसे तुरंत बदलना जरूरी होता है क्योंकि बच्चे की कोमल त्वचा को इससे नुक्सान हो सकता है । गीले डायपर से बच्चे को कई प्रकार की त्वचा की बीमारियां हो जाती हैं क्योंकि पेशाब में यूरिया, एसिड एवं अमोनिया आदि होते हैं जो त्वचा में खुजली पैदा करते हैं । इससे बच्चों की त्वचा लाल हो जाती है। जब भी बच्चा डायपर पहने तो मां को पीछे हाथ लगा कर जांच करते रहना चाहिए। कुछ बच्चे एक बार में अधिक पेशाब करते हैं। यदि उसने 2-3 घंटों के बाद पेशाब किया हो तो डायपर जल्दी गीला हो जाता है और इसे जल्दी बदलना जरूरी हो जाता है। इस ब्लॉग में भी बहुत काम की बातें बताई गई हैं, जरूर पढ़ लें :- बच्चे का डायपर बदलते समय इन बातों का ध्यान रखें
     
  3. रात में डायपर बदलना -- यदि रात में बच्चे को डायपर पहना कर सुलाया हो तो हर दो घंटे बाद जांच करनी चाहिए कि डायपर कितना गीला है। डायपर की ऊपरी परत हमेशा सूखी रहनी चाहिए, गीला होने पर ही यह त्वचा के संपर्क में आती है और शिशु की वहां की त्वचा लाल हो जाती है। उसके बाद खुजली, सूजन या त्वचा लाल हो जाती है इसे डायपर डर्मैटिक्स कहते हैं। हल्का लाल होने पर इमोजिएंट क्रीम लगाने से त्वचा मुलायम हो जाती है और लाली भी कम हो जाती है ।
     
  4. क्यों जरुरी है डायपर का समय पर बदलना -- गीले डायपर को अधिक देर तक पहनाए रखने से फंगल इंफैक्शन भी हो सकती है। इस संक्रमण के अधिक दिनों तक रहने पर बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। रैगुलर टैल्कम पाऊडर से ऐसे संक्रमण पर कोई फायदा नहीं होता। डायपर पाऊडर, जो अलग होता है, उसमें कॉर्न स्टार्च होता है, उसकी सोखने की क्षमता अधिक होती है। यदि डायपर पहनाने से पहले इस पाऊडर को बुरक दिया जाए तो त्वचा सूखी और नर्म रहती है। आप एंटीफंगल पाऊडर भी लगा सकती हैं। इससे फंगल इंफैक्शन कम हो सकता है।

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  • 1
कमैंट्स()
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| May 22, 2018

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