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खाना और पोषण

कैसी होनी चाहिए किशोरावस्था के बच्चों की डाइट?

Prasoon Pankaj
7 से 11 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 04, 2021

कैसी होनी चाहिए किशोरावस्था के बच्चों की डाइट
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

जब बच्चे बड़े होते है तो उनके शरीर में बहुत से बदलाव आते है जैसे की लम्बाई का बढ़ना ,हारमोंस में बदलाव का आना, मानसिक रूप से परिपक्व होना। इन सब बदलाव के लिए ये बहुत जरूरी है कि बच्चे का डाइट सही होना चाहिए। एक ही तरह के खाने के बजाय, प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, आयरन, पोटाशियम, मिनरल्स,कैलोरी आदि युक्त पदार्थों से भरपूर आहार को शामिल करना बहुत जरूरी है। इससे शरीर में बदलते हार्मोंस संतुलित रहते हैं। सही डाइट न होने की वजह से उन्हें आगे चल कर कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो इस ब्लॉग में हम विस्तार से आपको बताने जा रहे हैं कि किशोरावस्था के बच्चे का डाइट किस प्रकार का होना चाहिए (Nutrition and healthy food for teenagers In Hindi)।

किशोरावस्था के बच्चे के डाइट में किन जरूरी बातों का रखें ध्यान? / Healthy Eating During Adolescence In Hindi

क्यों जरुरी है टीएनएजर्स के लिए बैलेंस डाइट - 11 से 16 साल की उम्र में बच्चो का शरीर तेजी से विकास करना शुरू कर देता है। लंबाई बढ़ने के साथ-साथ इस उम्र में शरीर की अंदरूनी प्रक्रिया में भी बहुत से बदलाव आने लगते हैं। मानसिक तौर पर भी बहुत से बदलाव आने लगते हैं। बच्चे बचपन को छोड़ व्यस्कता की ओर बढ़ते चले जाते हैं। एक दम से आ रहे इन बदलावों के साथ सही डाइट का होना जरूरी हो जाता है ताकि शारीरिक प्रक्रिया भी सही रहे और सेहत भी अच्छी रहे। इसलिए संतुलित आहार बहुत जरूरी होता है |

हरी सब्जियां है पोषण से भरपूर -- अपने बच्चे के फूड च्वाइस को भला आपसे बेहतर कौन समझ सकता है। क्या आपका बच्चा आपसे अक्सर इस तरह की शिकायतें करता है कि मम्मी, आपने ये सब्जी फिर से क्यों बना ली या मम्मी, मुझे ये सब्जी नहीं खानी है। इस तरह की बातों से आपको रोजाना दो-चार होना पड़ता होगा दरअसल ज्यादातर बच्चे हरी सब्जियों से दूर भागते हैं जिस वजह से उनके खून में हीमोग्लोबिन की कमी देखने को मिलती है। बच्चो को ब्रोकली,पालक,लौकी,मटर आदि से बने स्नेक्स और सूप बनाकर खिलाएं। इससे उन्हें एनर्जी मिलती रहेगी। खाने में 1 कटोरी सब्जी जरूर शामिल करें। अगर आपके बच्चे को कोई हरी सब्जी पसंद नहीं है तो फिर आप खाने में कुछ नए रेसिपी को भी ट्राई कर सकती हैं, मुमकिन है कि नए तरीके से अगर आपने उसी सब्जी को प्रस्तुत किया तो बच्चे को शायद पसंद आ जाए।

 

प्रोटीन की कमी ना होने दें  -- आप इस बात को तो अच्छे से जानती हैं कि प्रोटीन बच्चे के विकास के लिए कितना महत्वपूर्ण है। प्रोटीन के स्रोत क्या-क्या हैं, इसके बारे में भी आप बखूबी जानती होंगी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि कितनी मात्रा में बच्चे को प्रोटीन से भरपूर फूड आइटम्स का सेवन करना चाहिए। आपके बच्चे के शरीर को प्रोटीन,आयरन और कैल्शियम देने के लिए रोजाना 170 ग्राम से 200 ग्राम मीट और बीन्स (राजमा ,दाल ,चने )का सेवन करना जरुरी होता है। इसके अलावा दो गिलास दूध और 2 अंडे भी बच्चों को खाने के लिए दें। 

बच्चो के खाने में अनाज होना ही चाहिए-- अनाज में विटामिन-बी, आयरन, मैग्नीशियम, सेलेनियम और फाइबर आदि तत्वों के गुण आसानी मिल जाते हैं। रोजाना 250 से 300 ग्राम अनाज को अपने आहार में शामिल करें। बच्चों का बाहर का खाना खिलाने की बजाए घर पर गेहूं,चावल,ओट्स से बने स्नैक्स खिलाएं। 

बच्चो को फल खिलाना न भूले -- फल में एंटीऑक्सीडेंट बहुत ज्यादा होता है जो की बच्चो को बीमारियों से लड़ने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है |साथ ही आहार में की गई लापरवाही के कारण शारीरिक पोषण अधूरा रह जाता है। मौसमी फलों का जूस, फलों का सलाद,स्मूदी बच्चों को जरूर दें। इनमें शामिल विटामिन सी, विटामिन ए, फाइबर शारीरिक विकास में सहायक हैं। 

सारांश -- बच्चे खान-पान मे बहुत लापरवाही करते हैं, छोटी उम्र में तो इन्हें डांट कर खिलाया जा सकता है लेकिन टीनएज आते-आते ये अपनी मर्जी करने लगते हैं। इस उम्र में शरीर का विकास तेजी से होती है। इसके लिए उन्हें सही डाइट का पालन करना जरूरी हो जाता है |जिससे उनके होरमोंस संतुलित रहे, ऐसा न होने पर टीनएजर्स में होने वाले अंदरूनी विकास सही से नहीं हो पाते है |......

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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