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स्वास्थ्य

मानसून में शिशु को होने वाली बीमारियां और उपाय

Dr Rakesh Tiwari
1 से 3 वर्ष

Dr Rakesh Tiwari के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 11, 2020

विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आप और मैं तो बहुत कुछ झेल लेते हैं, लेकिन बच्चे तो नहीं। बेजुबान और तोतली बोली में क्या बोलें कि उन्हें क्या परेशानी हो रही है। आजकल बारिश का मौसम चल रहा है। खुद भी संभलकर रहिए और अपने शिुशु को भी बचाव के सुरक्षा घेरे में रखें। क्योंकि इस मौसम में कई बीमारियां फैलती हैं। कई बार शिशु को आप से बीमारी का संक्रमण आ जाता है। यदि शिशु स्तनपान करता है। जानते हैं इस मौसम में शिशु को कौन-कौन सी बीमारियां जकड़ लेती हैं और उनसे कैसे बचाव करें।

  1. डेंगू -डेंगू मच्छर काटने से होता है। इसके लक्षण हैं- बुखार, कम प्लेटलेट काउंट और लाल चकत्ते। इससे बारिश में होने वाली इस बीमारी से बचने के लिए घर में हर्बल कीटानाशक जैसे सिट्रोनेला का स्प्रे करें। शिशु को शरीर को ढकने वाले कपड़े पहननाएं। 
  2. चिकनगुनिया - यह बीमारी एयर कंडीशनर, कूलर, पौधों, बर्तनों, पानी के पाइप में पाए जाने वाले स्थिर पानी में पैदा हुए मच्छरों के कारण होता है। यह बीमारी एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर आपको रात में ही नहीं बल्कि दिन में भी काट सकता है। जोड़ों का दर्द और बुखार चिकनगुनिया के दो सबसे आम लक्षण हैं। स्थिर पानी के साथ सतहों या कंटेनरों को साफ करना और कीट से बचाने वाली क्रीम का उपयोग करना चिकनगुनिया से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है। अब आप जिस कमरे में शिशु को सुलाते हैं तो वहां एसी, कुलर आदि में  पानी नहीं ठहरने दें।
  3. मलेरिया-  बारिश के मौसम में मलेरिया एक प्रमुख बीमारी है। यह मादा एनोफिलीज मच्छर के कारण होती है, जो जल वाले क्षेत्रों में प्रजनन करते हैं। बुखार, कंपकंपी, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी मलेरिया के सबसे प्रमुख लक्षण हैं। मलेरिया से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है कि आप घर में पानी की टंकी को बार-बार साफ करें और आसपास सफाई रखें।
  4. डायरिया - आंत्र रोग है जो अनहेल्दी खाद्य पदार्थोंं और पानी के सेवन के कारण होता है। डायरिया से निपटा जा सकता है। उबला हुआ पानी पीने और घर के बने खाने से इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। 
  5. टाइफाइड-   जल जनित बीमारी है टाइफाइड। इस मौसम में भोजन और पानी का खास ध्यान रखना चाहिए। एस टाइफी बैक्टीरिया है जो टाइफाइड का कारण बनता है। बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, दर्द और गले में खराश टाइफाइड के कुछ लक्षण हैं। इसे बचने के लिए शिशु के हाथ साबुन से धुलवाएं। यदि शिशु बहुत छोटा है तो स्वयं उसके हाथ धोएं। आप खुद भी इससे बचने के लिए अपने हाथ साबुन से धोएं , समय-समय पर हैंड सैनिटाइज करें, स्ट्रीट फूड का सेवन करने और स्वस्थ तरल पदार्थ पिएं।
  6.  वायरल बुखार -वैसे तो वायरल बुखार साल भर होता रहता है, लेकिन मानसून के दौरान ये सबसे आम हैं। इसके लक्षण हैं तेज बुखार, सर्दी और खांसी कुछ सामान्य लक्षण हैं। यह 3-7 दिनों से चल सकता है। हालांकि, कुछ भी निदान करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें। 
  7. हैजा- ये मानसून की बीमारी है जो दूषित भोजन और पानी के सेवन से होती है। स्वच्छता की कमी से भी ये बीमारी होती है। इस बीमारी का लक्षण है दस्त।
  8. लेप्टोस्पायरोसिस - इसे वाइल सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है। लेप्टोस्पायरोसिस गंदे पानी के संपर्क में आने के कारण होता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं-सूजन, शूल, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और बुखार। आपके या बच्चे के शरीर में कोई कट लगा है, तो घाव को ढक कर निकलें या जरूरी नहीं है तो नहीं निकलिए।
  9. पेट में संक्रमण - इस मौसम में पेट के रोग, जैसे उल्टी, दस्त और पेट दर्द हो जाते हैं। ऐसा खराब खाने या दूषित पानी-दूध के सेवन से होेते हैं। स्वयं और शिशु को उबला हुआ पानी और असानी से पचने वाला घर में पका हुआ भोजन करें। इस मौसम में गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का संक्रमण) भी हो सकता है।  
  10.  पीलिया - दूषित पानी और भोजन के सेवन से पीलिया हो जाता है। कमजोरी, पीला पेशाब, आंखों का पीला होना, उल्टी और लिवर की गड़बड़ी पीलिया के लक्षण हैं और इसे तुरंत डाॅक्टर को दिखना चाहिए। इस वायरस से बचने के लिए उबला हुआ पानी पीना, घर का पका हुआ भोजन करना और स्ट्रीट फूड से परहेज करें। 

बरसात के मौसम में 10 बेबी केयर टिप्स  


भले ही बारिश ने चिलचिलाती गर्मी से राहत दी है, लेकिन यह मौसम शिशु की अतिरिक्त देखभाल मांगता है। बरसात के मौसम में नमी, कीड़े, मच्छर और बैक्टीरिया आम हैं, जो विभिन्न बीमारियों को जन्म देते हैं, खासकर बच्चों में। आपके घर में 0-1 आयु वर्ग का शिशु है, तो इंडोर और आउटडोर खास सावधानियां बरतें, ताकि बीमारियां उसके आस-पास नहीं फटकें।
1 शिशु को साफ-सुथरा व सूखा रखें। यदि बाहर बारिश हो रही है तो उसे नहलाने की जगह गुनगुने पानी से स्पाॅन्ज करें।
2 बारिश नहीं भी हो रही तब भी शिशु को भीड़-भाड़ वाली जगह व पार्क में नहीं ले जाएं।
3 इस मौसम में  तापमान में उतार-चढ़ाव होता रहता है। ऐसे में शिशुओं को उसी के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए। कोशिश करें कि शिशु को पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े पहनाएं। कपड़े काॅटन फैब्रिक से बने हों। इससे उसे आराम मिलेगा। साथ मच्छर भी नहीं काटेंगे। ओवरड्रेसिंग से शिशु को पसीना आ सकता है, जो नमी का कारण बनता है। यही नमी बैक्टीरिया के लिए भी प्रजनन स्थान है। 
4     शिशु के निजी अंगों को साफ और सूखा रखें। इस जगह पाउडर नहीं छिड़कें। 
5 शिशु को इस मौसम में डायपर नहीं पहनाएं। हालांकि तापमान में गिरावट आने पर बार-बार पेशाब आता है। बार-बार डायपर पहनाने से शिशु को चकत्ते हो सकते हैं। 
6    यदि शिशु को आप दूध के अलावा साॅलिड भोजन देती हैं तो घर पर पका खाना ही दें। पानी उबाल कर ठंडा होन पर दें। कच्चा दूध नहीं दें। दूध भी उबालकर ठंडा होने पर दें।
7 शिशु के साथ खेलने या गोद में उठाने से पहले माता-पिता और अन्य लोग हाथ साबुन से धोकर ही उठाएं। छोटे-बड़ों को बताएं की शिशु की सेहत के लिए बाहर से आने पर जूते-चप्पल बाहर दरवाजे पर उतारें और हाथ धोएं।
8 फर्श की सफाई हर्बल कीटाशक से करें।  घर में या आसपास पानी का भंडारण नहीं होना चाहिए।
9 गीले जूते-चप्पल शू रैक में नहीं रखें। शरीर व कमरे के तापमान नियंत्रित रखें।
10 शिशु के कमरे की सफाई दिन में दो बार करें। इस मौसम में मच्छरों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, कभी-कभी घर से दूर रहने पर कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है। बच्चे की त्वचा के लिए हल्के लैवेंडर के तेल सबसे अच्छा और प्राकृतिक होता है। 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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