समारोह और त्यौहार

इस दिवाली जरूर बताऐं अपने बच्चों को यह 5 बहुमूल्य बातें!!

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संशोधित किया गया Oct 19, 2017

इस दिवाली जरूर बताऐं अपने बच्चों को यह 5 बहुमूल्य बातें

दिवाली या दीपावली, हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार है और इसे रोशनी के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। वैसे तो घर के सभी लोगों को इस त्यौहार का इंतजार रहता है लेकिन बच्चों का यह सबसे पसंदीदा त्यौहार होता है।

दीपावली का त्यौहार जीवन में प्रकाश और उमंगों के रंग भरने का मौका तो होता ही है लेकिन यह हमें एक अच्छे और समझदार माता-पिता के रूप में साबित करने का मौका भी हो सकता है और इस त्यौहार का फायदा उठाकर हम अपने बच्चों को कुछ बहुत काम की सीख दे सकते हैं।

तो, आईए जाने उन 5 खास बातों को जो दीपावली के त्यौहार आप अपने बच्चों को सिखा सकते हैंः

स्वच्छता जरूरी है

वैसे तो सभी त्यौहारों पर घर की साफ-सफाई की जाती है पर दीपावली पर साफ-सफाई किए जाने का खास महत्व है। ऐसा करके हम अपने घर को मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए तैयार करते हैं। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि जहां साफ-सफाई रहती है वहां बीमारियां नहीं होती है और साफ-सुथरी जगह पर ही माँ लक्ष्मी अपने आप वैभव के साथ वास करती हैं। तो कितना अच्छा हो कि हम दीपावली की तरह पूरे साल अपने घर और आस-पास की जगहों को साफ-सुथरा रखें जिससे लक्ष्मी जी सदा हमारे घर में वास करें और हमारा घर पूरे साल सुख-सुविधाओं और समृद्धि से भरा रहे।

आपसी मेल-मिलाप और भाईचारा

आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हमारे पास दूसरों के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल काम है। ऐसे में त्यौहार हमें यह मौका देते हैं जिससे हम अपने प्रियजनों से मिल सकें और खुशिंया बांट सकें इसलिए जरूरी है कि बच्चों को त्योहार पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने और बड़ों का आर्शिवाद लेने जैसी परंपराओं का पालन करने की सीख दें। त्यौहार पर घर में पूजा-पाठ करने के बाद बच्चों को लेकर मंदिर जरूर जाएं। मंदिर जाने से बच्चों के अंदर ईश्वर को लेकर आस्था का भाव पनपता है और वे तीज-त्यौहार के महत्व को समझते हैं।

वातावरण का रखें ख्याल

हिंदू धर्म के अनुसार दीपावली रोशनी और जगमगाहट का त्यौहार है पर आज इस रोशनी और जगमगाहट की जगह शोर-शराबे और दमघोटूं धुंए ने ली है। दीपावली पर बारूदी पटाखे जलाना आबो-हवा को दूषित करने की बड़ी वजहों में से है। आतिशबाजी, न केवल हमारी सेहत को नुकसान पंहुचाती है बल्कि आतिशबाजी करते हुए कई बच्चे घायल भी होते हैं, धमाकों का शोर उनके सुनने की क्षमता पर बुरा असर करती है और आग लगने की वजह भी बनती है।

ऐसे में जरूरी है कि बच्चों पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर जागरूक बनाया जाए। हालांकि थोड़े-बहुत पटाखे चलाना तो ठीक है पर बारूदी पटाखे चलाना सिवाय पैसे की बर्बादी के कुछ नहीं इसलिए बच्चे को ईको-फ्रेंडली दीपावली मनाने के लिए प्रेरित करें जिससे पर्यावरण की रक्षा हो सके।

त्यौहार की सादगी लाती है खुशहाली

समय बीतने के साथ दीपावली बनाने के तौर-तरीकों में काफी बदलाव आ गया है। जहाँ एक ओर दीपमाला की जगमगाहट के बीच हर कोई ईश्वर से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करता है वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इस त्यौहार पर अनाप-शनाप खर्च करते हैं, जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं और अपने धन-वैभव का दिखावा करते हैं। जरूरी है कि बच्चों को सादगी से त्यौहार मनाने के लिए प्रेरित किया जाए। घर, पूजा स्थल और किसी पब्लिक-प्लेस पर दिए जला कर रोशनी करना आपको जो खुशी दे सकता है वह अंधा-धुंध मंहगे पटाखे फोड़ कर नहीं मिल सकती।

खुशी बांटने से बढ़ती है

दीपावली पर हमारे आसपास एक अलग तरह का खुशनुमा माहौल होता है पर हमारे बीच बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो गरीब और वंचित होने की वजह से इस खुशी को महसूस नहीं कर सकते।

दीपावली के त्यौहार के जरिए बच्चों को अपनी खुशी दूसरो के साथ बांटने की अहमियत समझाऐं। त्यौहार पर बच्चे को अक्सर तरह-तरह के उपहार मिलते हैं जैसे खिलौने, चॉकलेट मिठाई और पटाखे,। आप इन चीजों को गरीब और वंचित बच्चों के साथ साझा करना सिखा सकते हैं। तो त्यौहार के मौके पर किसी अनाथ आश्रम या वृद्धाश्रम जाने का समय निकालें और बच्चों के साथ वहां जाकर मिठाईयां, पटाखें या कुछ और चीजों को दूसरों को बांटे। ऐसा करने से आपके त्यौहार की खुशी दुगुनी हो जाऐगी और बच्चों को भी अच्छा लगेगा।

तो हो जाईए तैयार इस दीपावली को खास और यादगार बनाने के लिए। इन बातों की सीख वो विरासत है जो हमारी हर पीढ़ी के साथ बरकरार रहेगी और दीपावली की मूल भावना- तमसो मा ज्योर्तिगमय अर्थात हे ईश्वर! हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो को सदियों तक सार्थक बनाए रखेगी।

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