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स्वास्थ्य

क्या दिन में सोने से बच्चों की मेमोरी पावर होती है स्ट्रॉन्ग, जानिए क्या कहते हैं रिसर्च के नतीजे?

स्पर्धा रानी
3 से 7 वर्ष

स्पर्धा रानी के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 10, 2021

क्या दिन में सोने से बच्चों की मेमोरी पावर होती है स्ट्रॉन्ग जानिए क्या कहते हैं रिसर्च के नतीजे
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आद्या 6 साल की है और दिन में बिल्कुल नहीं सोती। उसकी मम्मी को भी लगता है कि जिस दिन आद्या दिन में सो जाती है, उस रात उसे मुश्किल से नींद आती है। वह बेड पर जाने के बावजूद जागती रहती है। आद्या जैसी ही कहानी हमारी भी रही है, हम बड़ों को भी बचपन में दिन के समय सोने के लिए डांट पड़ती थी। कहा जाता था कि दिन में सोने हम आलसी बनते हैं। खैर, कारण चाहे जो भी दिए जाते हैं, सच तो यही है कि दिन के समय सोने से बच्चों को मना किया जाता रहा है। लेकिन इस सबसे ठीक विपरीत एक नया रिसर्च कहता है। इस रिसर्च की मानें तो दिन में सोना बच्चों के लिए बहुत अच्छा (sleep required for kids) है। वे ज्यादा क्रिएटिव और हेल्दी बनते हैं।

कहां किया गया यह रिसर्च

यह रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ मैशेशूएट्स में किया गया है। वहां रिसर्च करने वालों ने करीब 40 बच्चों पर अध्ययन किया और उसके बाद अपनी रिपोर्ट नैशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज को भेजा। इस अध्ययन पर काम करने वाली रेबेका स्पेंसर का कहना है कि उन्होंने इन 40 बच्चों की मेमरी पावर (Memory power in kids) उनके सोने से पहले चेक किया। उसके बाद जब वे सोकर जागें तो भी उनकी मेमरी पावर चेक की गई। रेबेका ने पाया कि सोकर जागने के बाद बच्चों की मेमरी पावर पहले के मुकाबले बढ़ी हुई थी।

क्या था इस अध्ययन में

इस रिसर्च में इन 40 बच्चों को विजुअल कलरफुल पिक्चर टास्क दिए गए। बच्चों को कहा गया था कि वे इन तस्वीरों को देखते- देखते सो जाएं या झपकी ले लें। उन पर निगरानी रखी गई और लगभग 77 मिनट तक इस पूरे रिसर्च को रिकॉर्ड भी किया गया। उनके सोने या झपकी लेने के बाद उनकी मेमरी पावर (Memory power in kids) को चेक किया गया। इसके बाद दूसरे टास्क में बच्चों को पिक्चर देखने के बाद सोने नहीं दिया गया। जब सारे बच्चों ने पिक्चर देख लिया तो फिर से उनकी मेमरी पावर चेक की गई।

रिसर्च का परिणाम

इस अध्ययन में पाया गया कि उन बच्चों की मेमरी पावर (Memory power in kids) उन बच्चों की तुलना में बेहतर थी, जो दिन में सोते या झपकी नहीं लेते हैं। यह रिसर्च सालों से चले आ रहे उस बात को काटता है कि बच्चों को दिन में सोने (Sleep during day time) नहीं देना चाहिए क्योंकि इसके बाद वे रात में ठीक से सोते नहीं हैं। इसलिए अगर आपके बच्चे दिन में सोना चाहते हैं तो उन्हें रोकिये मत। और अगर आपके बच्चे दिन में नहीं सोना चाहते हैं तो उन्हें सोने के लिए कहिये।

बच्चों के लिए कितनी नींद है पर्याप्त / How much sleep is required for kids in Hindi

हर उम्र के बच्चों के लिए नींद के घंटे अलग- अलग सही हैं। अगर बात 3 से 7 साल की उम्र के बच्चों की हो तो उनके लिए 10 से  13 घंटे सोना जरूरी है। इसमें रात की नींद के साथ दिन के सोने के कुछ घंटे भी शामिल हैं।

क्यों पर्याप्त नींद है जरूरी / Why proper sleep is important for kids In Hindi

अगर आपका बच्चा अपनी नींद पूरी (Proper sleep is important for kids) नहीं करता है तो यह उसके अपने सामजिक और मानसिक कार्यप्रणाली पर असर डालता है। साथ ही अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बनता है। अगर आपका बच्चा कम नींद लेता है तो यह चिड़चिड़, हाइपरटेंशन, मोटापा, सिर दर्द, ध्यान देने में कमी और यहां तक कि डिप्रेशन का कारण भी बन सकता है। जो बच्चे पूरी नींद लेते हैं उनका इम्यून सिस्टम हेल्दी रहता है और स्कूल में भी उनकी परफॉर्मेंस अच्छी रहती है। साथ ही उनका मानसिक स्वास्थ्य भी बढ़िया रहता है। मेमरी तो बेहतर होती ही है, इसके बारे में आपने रिसर्च के परिणाम तो पढ़ ही लिएं।

बच्चों में हेल्दी स्लीप की आदत ऐसे डालें / How to gethealthy sleep habbit in kids

कई रिसर्च और स्टडीज ने बच्चों की नींद को लेकर कुछ गाइडलाइन तैयार किए हैं, जो इस प्रकार हैं।

  • सबके लिए प्राथमिकता पर हो नींद पूरी करना : यह याद रखिए कि आप स्वयं ही अपने बच्चे के रोल मॉडल हैं। आपको ही उनके लिए उदाहरण बनना है। यदि आप खुद रात भर या देर रात तक जागते रहेंगे तो उसे भी यही सीख मिलेगी। इसलिए आप उनके साथ खुद भी रात में समय पर सोया करें।
     
  • दिन में एक्टिव- यह आपका काम है कि आप ध्यान रखें कि आपका बच्चा पूरे दिन एक्टिव रहे। उसकी फिजिकल एक्टिविटी होती रहे और उसे ताजी हवा भी मिले।
     
  • स्क्रीन टाइम पर लगाम- टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन को बच्चों के बेड रूम से दूर रखें। खासकर रात के समय। उनके सोने से लगभग एक घंटे पहले स्क्रीन बंद कर दें ताकि उन्हें अच्छे से नींद आ सके।
     
  • बेड रूम की लाइट ऑफ- रात के समय अपने बच्चे के बेड रूम की लाइट बंद कर दें। ध्यान रखें कि कमरे का टेम्परेचर भी कंट्रोल में हो। पाने बच्चे के बेड पर अगर टॉयज हैं तो सबको हटा दें। हां, आप एक या दो उसके फेवरेट टॉयज वहां रख सकते हैं। इस तरह से उन्हें अगर सेपरेशन एन्जायटी होगी तो वह ठीक हो जायेगी।

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा एक हेल्दी बच्चा बने तो उसकी नींद पर ध्यान देना आपका काम है। और इस नए रिसर्च के अनुसार, अगर आप उसे थोड़ी देर के लिए ही सही, दिन में सोने के लिए प्रेरित करते हैं तो यह उसके मेमरी पावर के लिए भी बढ़िया है।

 

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