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स्वास्थ्य

ब्लैक फंगस से बचाव के लिए क्या करें और क्या नहीं?

दीप्ति अंगरीश
गर्भावस्था

दीप्ति अंगरीश के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 21, 2021

ब्लैक फंगस से बचाव के लिए क्या करें और क्या नहीं
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

डॉ. अरुण शर्मा जो कि कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट और निदेशक एनआईआईआरएनसीडी, आईसीएमआर जोधपुर हैं उन्होंने कुछ ऐसे कारगर टिप्स बताएं जो कोविड के बाद लोगों को ब्लैक फंगस की चपेट में आने से मदद करेंगे। तो आइये जानते हैं कि क्या है ये ब्लैक फंगस और इससे बचाव के उपाय क्या हैं?

म्यूकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस क्या है?


म्यूकोरमायकोसिस और ब्लैक फंगस संक्रमण हवा, कूड़ेदान, नमी वाली जगह और पानी में मौजूद म्यूकोरसाइट्स मोल्ड के जरिए फैलता है। मुंह, गले और नाक में यह नाक के विषाणु के रूप में नजर आता है। एक स्वस्थ व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्यूनिटी जब साथ नहीं देती या फिर कमजोर हो जाती है तब यह संक्रमण की वजह बनता है। इम्यूनो कंप्रोमाइज (प्रतिरक्षा में अक्षम) लोगों में ब्लैक फंगस का गंभीर संक्रमण हो सकता है।

ब्लैक फंगस कोविड के अधिकांश मरीजों को क्यों प्रभावित कर रहा है?


ब्लैक फंगस कोविड के अधिकतर ऐसे मरीजों को संक्रमित कर रहा है जिन्हें अधिक मात्रा में स्टेरॉयड्स दिए गए या फिर जिनकी लंबे समय से डायबिटीज अनियंत्रित है, हालांकि कोविड के अधिकतर मरीजों के लिए स्टेरॉयड को एक सफल कारगर इलाज माना गया है। कोविड के ऐसे मरीज उन्हें गंभीर रूप से इंफ्लेमेशन या संकुचन की परेशानी देखी गई, उनको स्टेरॉयड से ही सही किया गया। लेकिन स्टेरॉयड कुशल चिकित्सक की सलाह के बाद ही ली जानी चाहिए, यदि स्टेरॉयड को संक्रमण होने के बाद बहुत पहले से दिया जाने लगे या फिर अधिक दिन तक दिया जाए तो इससे ब्लैक फंगस जैसे अन्य दूसरी तरह के फंगल इंफेक्शन हो सकते हैं।

म्यूकोरमायकोसिस के क्या लक्षण होते हैं?

नाक के आसपास या नाक के अंदर काले धब्बे, गालों पर सूजन, आंखों में दर्द और लालपन ब्लैक फंगस के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ब्लैक फंगस का यदि सही समय पर इलाज न किया जाएं तो इससे आंखों की रौशनी भी जा सकती है, संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और यह मरीज के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। संक्रमण इतना गंभीर होता है कि यदि यह जबड़ो तक पहुंच जाएं तो यह दांतों को खराब कर सकता है और यदि फेफड़ों तक इसका असर हो तो गंभीर निमोनिया हो सकता है।

क्या इसका इलाज संभव है?

यदि ब्लैक फंगस की सही समय पर पहचान हो जाएं तो इसे एंटी फंगल दवाओं से ठीक किया जा सकता है, लेकिन बहुत बार संक्रमण की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि इलाज करने वाले डॉक्टर को मरीज की जान बचाने के लिए संक्रमित या ब्लैक फंगस प्रभावित हिस्से को सर्जरी कर हटाने जैसे इलाज के सख्त तरीके भी अपनाने पड़ते हैं। ब्लैक फंगस की इस तरह की सर्जरी के लिए संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए अन्य विभाग के विशेषज्ञों की टीम जैसे इंटरनल मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, आप्थेमेलॉजी, ईएनटी, न्यूरोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, डेंटिस्ट्री और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के विशेषज्ञों की जरूरत होती है।
सर्जरी के दौरान ही मरीज के शुगर के स्तर की भी लगातार मॉनिटरिंग करनी पड़ती है, साथ ही अन्य इम्यूनोसप्रेंट दवाओं को रोक दिया जाता है। इसके साथ इस बात का भी ध्यान रखना होता है कि चिकित्सक द्वारा दी गई दवाओं को सही से निर्धारित समय तक सेवन किया जाए जिससे संक्रमण के दोबारा होने की संभावना को खत्म किया जा सके।

ब्लैक फंगस संक्रमण को कैसे रोका जा सकता है?

पोस्ट कोविड मरीज नमी या कूड़ेवाली जगह पर जाने से बचें- डॉ. अरूण

- अनियंत्रित डायबिटीज के मरीजों में म्यूकोरमायकोसिस का खतरा अधिक
- डायबिटीज के मरीजों में अधिक स्टेरॉयड से ब्लैक फंगस का संक्रमण संभव
कोविड मरीज का इलाज करने वाले चिकित्सक को संक्रमण के शुरूआती चरण में मरीज का सही मार्गदर्शन करना चाहिए। अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में डॉक्टर और नर्स को संक्रमण के लक्षणों को नोटिस करना चाहिए कि मरीज  को इलाज के लिए किस तरह के स्टेरॉयड दिए जा रहे हैं या फिर कौन से इम्यूनो सप्रेसि दिए जा रहे हैं। स्टेरॉयड का असर शरीर पर चार हफ्ते तक रहता है। इसलिए इलाज की इस समय अवधि में विशेष ध्यान देना जरूरी है। कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद मरीज को नमी वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए, यदि ऐसी जगह पर जाना अधिक जरूरी है तब थ्री लेयर मास्क, ग्लव्स, चेहरे और हाथों को अच्छी तरह ढक कर जाएं। म्यूकोरमायकोसिस से बचने के लिए मरीज को ऑक्सीजन मास्क और कैन्युला को अच्छी तरह विसंक्रमित करते रहना चाहिए। मरीज की ऑक्सीजन सप्लाई के समय किस तरह का पानी इस्तेमाल किया जा रहा है इसकी भी नियमित मॉनिटरिंग करते रहना चाहिए, जिससे संक्रमण की संभावना बनी रहती है।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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