पेरेंटिंग स्वास्थ्य

आएं चेन बनाएं, 3 लोगों को हेपेटाइटिस के खिलाफ जागरुक करें

Supriya Jaiswal
1 से 3 वर्ष

Supriya Jaiswal के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jul 28, 2018

आएं चेन बनाएं 3 लोगों को हेपेटाइटिस के खिलाफ जागरुक करें


हर साल लाखों लोग हेपेटाइटिस से संक्रमित होते हैं और करीब 14 लाख लोग दुनिया भर में इस बीमारी के चलते अपनी जान गवांते हैं। 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस है। तो, आइए जानते हैं इस बीमारी की गंभीरता और इसके इलाज के बारे में। यह एक गंभीर बीमारी है। और इससे जुड़े आंकड़े ही इसके प्रति सजगता फैलाने के लिए काफी होनी चाहिए। लेकिन, इस गंभीर और खतरनाक बीमारी को लेकर समाज में जागरुकता बेहद कम है| हेपेटाइटिस बी, एड्स से भी अधिक खतरनाक है, लेकिन लोग इस बीमारी को लेकर सचेत नहीं हैं।इस बीमारी के मरीजों की संख्‍या सितंबर में अक्‍सर बढ़ जाती है क्‍योंकि वायरस के अण्‍डे की प्रक्रिया चार से छह हफ्ते चलती है। तो अगर कोई मरीज आज इस रोग से प्रभावित हुआ है, तो इसके लक्षण एक महीने या इसके बाद ही नजर आएंगे। आइये चेन बनाते है और कम से कम ३ लोगो को हेपेटाइटिस के बारे में जानकारी देते है ,इस तरह हम अपने आस पास के लोगो को इसके लिए सचेत कर पाएंगे |

क्‍या है हेपेटाइटिस? / What Is Hepatitis In Hindi

  •   हेपेटाइटिस लिवर में जलन और संक्रमण होना है, जो इसके पांच वायरस के जरिए होती है। इस वायरस को हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई कहा जाता है।
  • हेपेटाइटिस ए- दूषित भोजन और जल इस बीमारी के सबसे प्रमुख कारण हैं। तो इस बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि अपने भोजन में जरूरी सावधानी बरती जाए। खुला भोजन खाने से बचें। लिवर में सूजन, भूख कम लगना, नौजिया, उल्‍टी और बुखार हेपेटाइटिस ए के प्रमुख लक्षण हैं।दवाओं के जरिए हेपेटाइटिस का इलाज आसानी से हो सकता है।
  • हेपेटाइटिस बी- विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक दुनिया के हर तीसरे इनसान को हेपेटाइटिस बी ने प्रभावित किया है।इस वायरस के खतरनाक प्रभावों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि यह वायरस दशकों तक पकड़ में नहीं आता। और चुपचाप भीतर ही भीतर अपना काम करता रहता है। यह वायरस जब तक पकड़ में आता है, तब तक कई बार काफी देर हो जाती है। यह वायरस लिवर को काफी हद तक क्षतिग्रस्‍त कर चुका होता है। यह वायरस संक्रमित खून, सेल्विया, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से शिशु में प्रवेश करता है। शेव करने के दौरान कट जाना बेहद सामान्‍य बात है, तो इसलिए आपके लिए अच्‍छा यही है कि अपना रेजर किसी के साथ साझा न करें। क्‍योंकि रक्‍त भले ही सूख जाए, लेकिन उसमें वायरस सात दिनों तक जिंदा रह सकता है।
  • हेपेटाइटिस सी- यह जानलेवा वायरस बीस साल तक पकड़ में नहीं आता। और इससे फिबरोसिस (तंतुमयता), क्रॉनिक सिरोसिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इस बीमारी से लिवर बुरी तरह प्रभ‍ावित होता है। यह बीमारी मुख्‍य तौर पर संक्रमित रक्‍त के माध्‍यम से फैलती है। असु‍रक्षित सुइयां और अन्‍य संचारित माध्‍यमों से यह बीमारी फैल सकती है।     
  • हेपेटाइटिस डी- हेपेटाइटिस डी का फिलहाल कोई इलाज मौजूद नहीं है। हेपेटाइटिस डी से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप हेपेटाइटिस बी का टीका लगवा लें क्‍योंकि जिन लोगों को हेपेटाइटिस बी होता है उन्‍हें ही यह बीमारी होने की आशंका रहती है।
  • हेपेटाइटिस ई- इस बीमारी का वायरस मुंह के जरिये प्रवेश कर सकता है। हेपेटाइटिस ई से संक्रमित पानी पीने से यह वायरस किसी व्‍यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है।हेपेटाइटिस ए और ई का इलाज सम्‍भव है और यह खतरनाक स्‍तर तक नहीं पहुंचतीं।

 वैक्‍सीनेसन और दवाएं / Vaccinations And Medicines For Hepatitis In Hindi


 
  1. हेपेटाइटिस वायरस से बचने का सबसे अच्‍छा तरीका यही है कि बीमारी होने से पहले ही वैक्‍सीनेटेड हुआ जाए। लेकिन, दुर्भाग्‍य की बात यह है कि हेपेटाइटिस सी और ई के लिए कोई दवा उपलब्‍ध नहीं है।
  2. हेपेटाइटिस ए की दवा एक वर्ष से ऊपर का कोई भी व्‍यक्ति ले सकता है। हेपेटाइटिस ए में दो वैक्‍सीन दी जाती हैं। दूसरी वैक्‍सीन पहली वैक्‍सीन दिए जाने के छह महीने बाद ही दी जाती है।बच्‍चों को यह दवा देने से वे 14 से 20 वर्ष तक इस बीमारी से दूर रहते हैं, वहीं वयस्‍कों पर इस वैक्‍सीन का असर 25 वर्षों तक रहता है।
  3. हेपेटाइटिस बी के लिए नवजात शिशुओं और वयस्‍कों दोनों को वैक्‍सीन दी जाती है। इस कोर्स में तीन इंजेक्‍शन लगाए जाते हैं, नवजात शिशुओं को पैदा होने के 72 घंटे के भीतर यह इंजेक्‍शन लग जाना चाहिए। और इसके बाद तीन इंजेक्‍शन शून्‍य, एक वर्ष की उम्र में और फिर छह वर्ष की उम्र में लगाये जा सकते हैं। यह वैक्‍सीन किसी इनसान को 25 वर्षों तक इस बीमारी से बचाकर रखता है।
  4. जो दवा हेपेटाइटिस बी के इलाज में इस्‍तेमाल होती है वही हेपेटाइटिस डी के लिए भी प्रयोग में लायी जा सकती है। आमतौर पर लोग सही समय पर इंजेक्‍शन लगवाना भूल जाते हैं। लेकिन, ऐसा करना सेहत के साथ खिलवाड़ करना होगा। तो वैक्‍सीन लगवाने का सही समय याद रखें।

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