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दिव्यांग बेटे को कंधे पर बैठाकर प्रतिदिन कॉलेज ले जाता है ये पिता

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 19, 2020

दिव्यांग बेटे को कंधे पर बैठाकर प्रतिदिन कॉलेज ले जाता है ये पिता
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

बरगद की गहरी छांव जैसे,

मेरे पिता।

जिंदगी की धूप में,

घने साये जैसे मेरे पिता।।

धरा पर ईश्वर का रूप है,

चुभती धूप में सहलाते,

मेरे पिता।

शोभारानी गोयल की इस कविता में पिता के प्रति संतान के दिल में सम्मान और स्नेह को उजागर किया गया है। अपने बच्चों के लिए सहारा है पिता, हौसला है पिता, जीवन की कठिनाइयों को कैसे सामना किया जाए ये सिखाता है पिता औऱ सही मायने में देखा जाए तो पहले गुरु होते हैं पिता। मध्यप्रदेश के राजगढ़ इलाके के दौलपुरा में रहने वाले कालू सिंह सोंधिया गरीब किसान हैं। कालू सिंह का बेटा जगदीश दिव्यांग है और उसके शरीर की बनावट कुछ इस प्रकार की है को वो ट्राईसाइकिल भी चलाने में सक्षम नहीं है। कालू सिंह की दिली तमन्ना है कि उनका बेटा जगदीश पढ़ लिख कर भविष्य में बड़ा अधिकारी बने। तमाम प्रकार की विपरित परिस्थितियां होने के बावजूद भी कालू सिंह ने हिम्मत नहीं खोया और अपने बेटे को कंधे पर बिठाकर प्रतिदिन कॉलेज ले जाते हैं। 

दिव्यांग जगदीश के हाथ-पैर सही से काम नहीं करते हैं और उसका कद भी मात्र 3 फुट है। जगदीश के गांव में स्कूल नहीं था लिहाजा 12वीं तक की पढ़ाई करने के लिए उसे अपने गांव से 10 किमी दूर स्कूल में जाना पड़ता था। 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद जगदीश को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कॉलेज में दाखिला लेना पड़ा और ये कॉलेज उसके गांव से तकरीबन 25 किमी की दूरी पर है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक जगदीश दिव्यांग होने की वजह से अकेले कॉलेज जाने में सक्षम नहीं थे। पिता कालू ने अपने बेटी की पढ़ने की ख्वाहिश को पूरा करने का संकल्प लिया। पिता अपने बेटे के साथ प्रतिदिन कॉलेज जाते हैं और जब तक कॉलेज की पढ़ाई चल रही होती है वे बाहर इंतजार करते रहते हैं। कॉलेज खत्म होने के बाद वे अपने बच्चे को साथ लेकर घर आते हैं। 

                                                                                               कालू सिंह बताते हैं कि उन्होंने सरकारी मदद के लिए कई बार गुहार भी लगाई लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशासन की तरफ से उनके बेटे को 50 फीसदी दिव्यांगता का सर्टिफिकेट जारी किया गया है जिसका बहुत ज्यादा लाभ उनको नहीं मिल पाता है। खेती के लायक थोड़ी बहुत जमीन उनके पास है लेकिन सिंचाई व कृषि के आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। बेटा जगदीश अपने पिता के इस संघर्ष को देखकर बहुत भावुक हो जाते हैं और वो कहता है कि उनके पिता का त्याग ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। #mydadmystrength 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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