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गर्भावस्था और रेडिएशन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

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संशोधित किया गया Nov 11, 2019

गर्भावस्था और रेडिएशन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

गर्भावस्था का समय आपके जीवन में एक ऐसा समय होता है जब आपको विशेष सावधानी रखनी पड़ती है। जरा सी असावधानी आपको और आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकती है। इस दौरान जहाँ तक संभव हो, किसी भी प्रकार के विकिरण से बचने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि सभी प्रकार के विकिरण आपके बच्चे के लिए हानिकारक हों। एक्सरे एक तरह का विकिरण है जो शरीर के अंदर तक जाकर शरीर के अंदरूनी भागों की तस्वीर ले सकती है। एक्सरे की वजह से हमें शरीर के अंदर की कई तरह की बीमारियों का पता चलता है।
 

एक समय था जब महिलाएं गर्भावस्था के समय एक्सरे करवाने से डरती थी। यह बात सही है कि ज़्यादा मात्रा में विकिरण के शरीर के संपर्क में आने से दिमागी अस्वस्थता एवं आँखों की समस्या पेश आती है। परन्तु आजकल गर्भावस्था के दौरान एक्सरे करवाने में कोई भी समस्या नहीं है। वैज्ञानिकों द्वारा किये गए शोध के अनुसार गर्भावस्था के समय एक्सरे करवाने से भ्रूण पर कोई असर नहीं पड़ता है। एक्सरे से होने वाली सुरक्षा एक्सरे के प्रकार एवं शरीर पर विकिरण की पड़ी मात्रा पर निर्भर करती है। गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंसी में होने वाली समस्याओं के लिए किये गए ज़्यादातर एक्सरे भ्रूण को अधिक मात्रा में विकिरण के संपर्क में नहीं लाते हैं। डॉक्टर भी किसी गर्भवती महिला का एक्सरे तभी लेते हैं जब यह अत्यंत आवश्यक होता है।
 

  • ज़्यादातर एक्सरे हाथ, पाँव, छाती एवं दांतों के किये जाते हैं एवं इनसे प्रजनन अंगों को किसी विकिरण का सामना नहीं करना पड़ता। पेट पर विकिरण की थोड़ी मात्रा के संपर्क में आने से भ्रूण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, पर कूल्हों, पेट के निचले हिस्सों एवं पीठ पर तथा गुर्दे पर विकिरण का असर ज़्यादा पड़ने पर भ्रूण पर भी इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
     
  • गर्भावस्था आपके जीवन में बेचैनी एवं उत्सुकता का समय होता है। इस समय आपको अपने खानपान एवं व्यायाम पर काफी ध्यान देना चाहिए तथा धूम्रपान, शराब एवं कुछ ख़ास दवाइयों से परहेज करना चाहिए। इस स्थिति में आपको डायग्नोस्टिक एक्सरे एवं पेट के हिस्से में प्रयोग की जाने वाली अन्य दवाइयों पर भी काफी ध्यान देना चाहिए।
     
  • डायग्नोस्टिक एक्सरे आपके शरीर की समस्या के बारे में काफी जानकारी देते हैं। आम स्थितियों में पेट के एक्सरे की कोई आवश्यकता नहीं होती, पर कई बार डॉक्टर किसी गंभीर अवस्था में मरीज़ के पेट का एक्सरे निकाल लेता है। इस समय बच्चे को कोई नुकसान पहुँचने की संभावना कम होती है एवं बीमारी की सही स्थिति जान पाने की संभावना काफी ज़्यादा होती है। दूसरी तरफ एक्सरे ना करवाने के नुकसान उनसे निकलने वाले विकिरणों से भी ज़्यादा होते हैं।
     
  • आपके पेट के निचले हिस्से, कूल्हे, पृष्ठ भाग तथा गुर्दे के एक्सरे अच्छी डॉक्टरी परामर्श में ही लिये जाने चाहिए।
     
  • बच्चे के जन्म से पहले विकिरण के प्रभाव से बाद में कैंसर होने की काफी ज़्यादा संभावना रहती है। क्योंकि अजन्मे बच्चे विकिरण के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं अतः इसे टालना ही अच्छा है या फिर आप कोई और तरीका भी अपना सकती हैं। शुरू के दो महीनों में विकिरण से बच्चे के प्रभावित होने की संभावना काफी ज़्यादा होती है क्योंकि इस समय भ्रूण में काफी कम कोशिकाएं होती हैं और गर्भपात की संभावना भी बढ़ जाती है।
     
  • 2 से 18 हफ़्तों की गर्भावस्था के बीच भ्रूण एक बढ़ते बच्चे में बदलने लगता है और इस समय विकिरण के प्रभाव से बच्चे के मस्तिष्क में विकार का भी ख़तरा रहता है। 12 हफ़्तों से लेकर अंत तक भ्रूण पूरी तरह बच्चे में परिवर्तित हो जाता है और इस समय विकिरण की संभावना काफी कम होती है,पर इसका यह अर्थ नहीं कि बच्चा बिलकुल सुरक्षित हो। इस समय भी आपको किसी गंभीर कारण के बिना एक्सरे नहीं कराना चाहिए।
     
  • अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया में जो विकिरण प्रयोग में लाया जाता है वह एक्सरे से काफी अलग होता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान अपनाई जाती है क्योंकि इस समय बच्चे को कोई नुक्सान होने की संभावना कम होती है। इसी तरह MRI की प्रक्रिया भी काफी प्रभावी है। अल्ट्रासाउंड जिसे कि सोनोग्राफी भी कहा जाता है उच्च आवृत्ति की तरंगों के माध्यम से चित्र उत्पन्न करने की विधि है। सोनोग्राफी में विकिरण का प्रयोग नहीं किया जाता है। यह तरीका ज़्यादा अच्छा है क्योंकि यह आयनाइज़िंग विकिरण का प्रयोग नहीं करता जिससे आपके गर्भ में पलने वाले भ्रूण को नुकसान पहुंचे। आजकल अजन्मे बच्चे की स्थिति देखने के लिए ct स्कैन का ही प्रयोग किया जाता है।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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कमैंट्स()
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| Apr 20, 2018

Kya mobile k radiation ka effect Hota h baby ko

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