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स्वास्थ्य

बच्चों में हाथ, पैर, मुंह के रोग के संकेत व लक्षण

दीप्ति अंगरीश
1 से 3 वर्ष

दीप्ति अंगरीश के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 17, 2020

 बच्चों में हाथ पैर मुंह के रोग के संकेत व लक्षण
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

बच्चों में हाथ, पैर और मुंह की बीमारी बचपन का आम संक्रमण है। आमतौर पर यह 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है, हालांकि किशोर और वयस्क भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यह रोग वायरस के एक समूह के कारण होता है, जो आमतौर पर है।  

क्या है हाथ-पैर-मुंह रोग ?
हाथ-पैर-मुंह रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमिक व्यक्ति के मल, थूक, नाक से स्त्राव, ब्लिस्टर फ्लूइड या वायरस से संक्रमित वस्तुएं, जैसे खिलौन, डोर बेल, डोर नाॅब आदि से फैलती है। बच्चे के वायरस से अनुबंधित होने के 3-7 दिनों बाद यह बीमारी शुरू होती है।

हाथ-पैर-मुंह के रोग के लक्षण

पिछले कुछ दिनों से आपका बच्चा चिड़चिड़ा रहता है, खाने से जी चुराता है, गले में दर्द की शिकायत करता है, तलवों, हथेलियों, घुटनों, कोहनी और नितंबों पर चकत्ते हैं, 38 सी का बुखार है, तो समझ लें कि आपके बच्चे को हाथ-पैर-मुंह के रोग ने जकड़ लिया है। यह इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

हाथ-पैर-मुंह के रोग का निदान  
सबसे पहले तो आप लक्षण देखकर घबराएं नहीं। क्योंकि यह बीमारी गंभीर नहीं है। हालांकि इससे प्रभावित बच्चे को बहुत असुविधा होती है। राहत वाली बात यह है कि 7-10 दिन में यह रोग स्वतः गायब हो जाता है। कई दुर्लभ मामलों में यह मेनिन्जाइटिस और एन्सेफलाइटिस  का कारण बन सकता है, जिसे तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
इस रोग का निदान रोगी द्वारा दिए गए इतिहास, संकेत और लक्षणों से होता है। निदान की पुष्टि के लिए डॉक्टर गले की खराबी या मल या रक्त का नमूना लेते हैं। वर्तमान समय में इस बीमारी के बचाव के लिए कोई दवाई उपलब्ध नहीं है। यदि जांच पाॅजिटिव आती है, तब कुछ हिदायतों को अपनाएं।

1 आप तो बड़े हैं समझदार हैं। बार-बार हाथ धोने की महत्ता से वाकिफ हैं। लेकिन बच्चे नहीं। बच्चे आपको देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अपनी आदत में शुमार करें खाने से पहले-बाद में हाथ धोना, वाॅशरूम के उपयोग के बाद, बहती नाक पोंछने के बाद और डायपर बदलने के बाद हाथ धोना। आपको देखा-देखी बच्चा भी बार-बार हाथ धोएगा। यानी नाक, हाथ और मुंह के रास्ते कीटाणुओं की नो एंट्री। 

2 फर्श की कीटाणुशोधन से साफ करें। अधिकांश चीजें यहां गिरती हैं या बच्चा फर्श से ही सामान उठाता है।

3 शॉपिंग मॉल्स, बाजार और डे केयर जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों में नहीं जाएं। यहां से बच्चा आसानी से संक्रमित हो सकता है।

4  यदि बच्चा संक्रमित हो गया है, तो बच्चों को गले नहीं लगाएं, उसे चूमे नहीं, खाने के लिए एक ही बर्तन का उपयोग नहीं करें।

5 बीमारी के दौरान बच्चे को कुछ दिनों के लिए स्कूल, डे केयर या क्रेच  भेजने से बचें। यदि ऐसा नहीं किया तो संक्रमण अन्य लोगों में भी फैल सकता है। 
6  संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए रोजमर्रा के कामों में स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
 
हाथ-पैर-मुंह के रोग का उपचार? 

इस बीमारी के लिए कोई विशिष्ट उपचार तैयार नहीं किया गया है। उपचार बच्चे में दिखाई देने वाले लक्षणों और परेशानी के प्रकार पर आधारित है। पेरासिटामोल या सुन्न करने वाले स्प्रे या मलहम जैसे काउंटर एनाल्जेसिक का उपयोग डॉक्टर से परामर्श करने के बाद किया जा सकता है। माता-पिता को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी बीमारी के दौरान बच्चे को अच्छी से हाइड्रेटेड रहे। 

रोग से निपटने के 10 घरेलू उपचार  

बच्चे की असुविधा को कम करने के लिए कुछ घरेलू उपचारों का उपयोग किया जा सकता है। ये इस प्रकार हैंः

1 दिन में 3-4 बार गुनगुने नमक वाले पानी से बच्चे को कुल्ले करवाएं। कुछ दिन तक ऐसा करवाएं। मुंह का दर्द, मुंह में छालों और गले की खराश से राहत मिलेगी।

2. नारियल पानी में मौजूद लॉरिक एसिड वायरस से लड़ने में मदद करता है। इसकी ठंडी तासीर मुंह में अल्सर को शांत करने में मदद करती है। साथ ही बच्चे को हाइड्रेटेड रखती है।

3. यदि बच्चा हाथ, मुंह, पैर के रोग से ग्रसित है, तो नहाने के पानी में लैवेंडर के तेल की कुछ बूंदें डालकर नहाने से बच्चे को आराम मिलेगा। इस तेल में रोगाणुरोधी और एंटीवायरल गुण होते हैं। 

4. 5-10 मिनट तक मुंह के छालों पर नारियल, तिल या मूंगफली का तेल लगाएं। 

5. चकत्ते पर नारियल का तेल, जैतून का तेल या नींबू का तेल लगाने से न केवल त्वचा पर खुजली से बच्चे को आराम मिलता है, बल्कि यह रोगाणुरोधी गुणों को बढ़ाने में भी मदद करता है। 

6. नीम में एंटीवायरल और रोगाणुरोधी गुण होते हैं। प्रभावी जगह पर इसे लगाने से राहत मिलती है। एचएफएमडी के चकत्ते और फफोले पर नीम का तेल या इसका एक पेस्ट लगाने से तेज चिकित्सा में मदद मिलती है और सैकड़ों वर्षों से एक प्रभावी एंटीवायरल और रोगाणुरोधी एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता है। 

7. एलो वेरा जेल को फफोले पर लगाया जा सकता है। इसमें मौजूद विटामिन और खनिज तत्व त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। साथ ही इसमें रोगाणुरोधी गुण और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण भी होते हैं। 

8. तुलसी को औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इसका पेस्ट चकत्ते पर लगाया जा सकता है। तेजी से उपचार के लिए इसका रस दिन में दो या तीन बार भी लिया जा सकता है।

9. एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर सिरका मिलाकर इससे कुल्ला करने से संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है, क्योंकि एप्पल साइडर सिरका में इंसुलिन सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में सुधार करता है जो वायरस से लड़ते हैं। 

10. ठंडे पेय पीने या आइसक्रीम खाने से मुंह और गले के छालों से होने वाली परेशानी को शांत करने में मदद मिलती है।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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