Child Psychology and Behaviour

हर चीज के लिए ना हों तैयार! बच्चों को सिखाएँ परिस्थितियों का सही आंकलन

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Updated on Jul 02, 2018

हर चीज के लिए ना हों तैयार बच्चों को सिखाएँ परिस्थितियों का सही आंकलन

बच्चों को अनुशासित करना कभी भी आसान नहीं था। अपने बच्चे को प्यार और दुलार देना तो सरल है, क्योंकि आप अपने बच्चे से प्रेम करते हैं। परंतु यदि आप चाहते हैं कि बच्चे, सही और गलत का अंतर जान सकें तथा स्व-नियंत्रण और अच्छी आदतें अपनाएँ, तब तो आपको सीखना होगा कि बच्चे को अनुशासन में रखने की सही विधि, चाहे वह आपको जितनी भी कठिन क्यों न लगे। यदि आप चाहते हैं कि बच्चे के साथ मजबूत संबंध बनाए रहते हुये धीरज के साथ उसे अनुशासित किया जाये, तो बस इन सुझावों का पालन करिए।

  • यदि आपका बच्चा 0-2 वर्ष तक का है तब तो आप लुभावने व्यवहार को घर से बिलकुल ही दूर कर दीजिये और जब बच्चा बुरा व्यवहार करे तब दृढ़ता से उसे रोक दीजिये। नन्हें बच्चों के लिए तो बाहर घुमाना फिराना बंद कर देना यह बताने की उत्तम विधि है कि उन्होंने कुछ गलत किया है।
     
  • यदि बच्चा 3-5 वर्ष का है, तब वह इतना बड़ा हो चुका है कि उसे किए जाने से पहले ही बुरे व्यवहार के संबंध में बता दिया जाये। आप बच्चे को बता सकते हैं कि उसके स्थान पर वह क्या सही चीज़ कर सकता है। जैसे कि आप कह सकते हैं कि, "तुमको खेल के मैदान में दूसरे बच्चों पर रोब नहीं जमाना चाहिए।“ इसके स्थान पर, “तुमको उनके साथ दयालुता और समझदारी दिखानी चाहिए, तभी तुम्हें और अधिक मज़ा आयेगा।" यदि बच्चा कोई खिलौना तोड़ देता है या वह उसे धूप में छोड़ कर नष्ट कर देता है, तब दौड़ कर उसे नया खिलौना मत दिलवाइए। बच्चे को कुछ समय तक बिना खिलौने के रहने दीजिये, और उससे बच्चा अपनी चीजों की ठीक से देखभाल करना सीख जाएगा।
     
  • 6-7 वर्ष के बच्चे अपने व्यवहार के नकारात्मक परिणामों को समझ सकते हैं। उन्हें समझ में आ जाएगा कि यदि उन्होंने कालीन पर कुछ गिराया है तो उन्हें ही उसे साफ करना पड़ेगा। यदि बच्चे को अपने बुरे व्यवहार के कारण पड़ोस में होने वाली जन्मदिन की पार्टी में नहीं निमंत्रित किया गया है, तब उसे यह समझ में आने दीजिये कि यदि उसका व्यवहार उस बच्चे के साथ कुछ अच्छा होता तब उसे निमंत्रित किया जा सकता था।
     
  • अगर बच्चे कुछ गलत चीज़ या बहुत महंगी चीज़ की मांग करते हैं तो उन्हें आपके मना करने का उचित कारण बताएं कि आपने ऐसा क्यों किया। बच्चे को कनविंस करें और आगे से वह आपकी बात मानने लगेगा। यदि बच्चा अपने खिलौने संभाल कर नहीं रखता है तब उसे एक सप्ताह तक उनके उपयोग से वंचित कर दीजिये। यदि आप बच्चे को टी वी पर कुछ अनुचित कार्यक्रम देखते हुये पाएँ तो एक सप्ताह के लिए टी वी की सुविधा बंद कर दीजिये। यदि बच्चा अपने माता पिता के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार नहीं करता तो, जब तक उसे सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की समझ न आ जाये, तब तक उसे अपने मित्रों के साथ मत खेलने जाने दीजिये।
     
  • आपको बहुत दयालु माता पिता बनने से भी बचना चाहिए। यह एक ऐसे अभिभावक होते हैं जो बच्चे को, जो भी उसका मन करे, करने देना चाहते हैं, क्योंकि वे उससे इतना प्यार करते हैं कि उसे दुख नहीं देना चाहते हैं, और इसलिए मना नहीं करना चाहते हैं या शायद वे सोचते हैं कि बच्चे के अंदर बाद में, स्वतः ही एक अनुशासन प्रणाली विकसित हो जाएगी। याद रखिए कि वह चाहे जितना भी छोटा हो और आप चाहे जितने भी परेशान क्यों न हों, आपका बच्चा है तो मनुष्य ही। यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपके अधिकार को स्वीकार करे तो आपको इस तथ्य का सम्मान करना होगा कि आपके बच्चे की अपनी आवश्यकताएँ और इच्छाएँ हैं और उसको भी अपने माता पिता से प्रेम और सम्मान की आवश्यकता है। सकारात्मक अनुशासन बच्चे के साथ कार्य की ऐसी विधि है, जिसके अनुसार इस प्रकार के सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुँचने में सहायता मिलती है जिससे कि बच्चा समझ सके कि बुरे व्यवहार के परिणाम क्या होंगे और वह भविष्य में उनसे बच सके। हालांकि दयालु अभिभावक बनना बहुत सरल है परंतु, जब बच्चा वयस्कता या किशोरावस्था की ओर बढ़ रहा होता है, तो इन बातों का बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यदि बच्चा किशोरावस्था में है, जिसे यह लगता है कि वह जो भी चाहेगा वह उसे मिल जाएगा, तब वास्तविकता से मुलाकात उसके लिए बहुत कठिन हो जाएगी।
     
  • अच्छी परवरिश का एक जरूरी हिस्सा है बच्चे के अच्छे काम के लिए प्रशंसित एवं पुरस्कृत करना। पुरस्कृत करने की पद्धति भी निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि सकारात्मक व्यवहार के सकारात्मक परिणाम भी हो सकें। भूलिए मत कि अच्छे व्यवहार को सुदृढ़ करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बुरे व्यवहार को अनुशासित करना। बच्चे को यह दिखाने से कि, उचित व्यवहार कैसे किया जा सकता है, उसको यह समझने में सहायता मिलेगी कि उसे क्या नहीं करना चाहिए।
     
  • यह सावधानी भी रखिए कि बच्चे से अच्छा व्यवहार करवाने के लिए पुरस्कारों का तरकीब की तरह प्रयोग न करें। बच्चे को समझना चाहिए कि अच्छा व्यवहार क्या होता है, न कि बस एक खिलौना लेने के लिए शिष्ट बने रहना चाहिए। अच्छा व्यवहार किए जाने पर अपने बच्चे की भरसक प्रशंसा करिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आपका बच्चा केवल आपसे केवल अपने बुरे व्यवहार के संबंध में टिप्पड़ियाँ ही सुने।
     
  • अंत में एक बात यह भी ध्यान रखें कि भाषण और धमकियों से दूर ही रहिए। ये पद्धतियाँ न केवल प्रभावहीन होती हैं बल्कि इनके कारण आपका बच्चा आपसे नाराज़ हो कर आपकी उपेक्षा भी कर सकता है तथा आपके शब्दों और कृत्यों से उसे मानसिक और शारीरिक आघात भी लग सकता है।

    कहने का अर्थ यह है कि अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आगे चलकर एक अनुशासित जीवन व्यतीत करे तो प्रारम्भ से ही उसे नियंत्रित रखना होगा। इसके लिए आपको समय-समय पर पुरस्कार व तिरस्कार दोनों प्रकार की रणनीतियों को अपनाना चाहिए।

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| Jul 03, 2018

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