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पेरेंटिंग

कहीं आप 'हेलिकॉप्टर पेरेंट' बन कर अपने बच्चे का बुरा तो नहीं कर रहे

Parentune Support
1 से 3 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 15, 2019

कहीं आप हेलिकॉप्टर पेरेंट बन कर अपने बच्चे का बुरा तो नहीं कर रहे

बच्चों के ज़िद्दी हो जाने में मां-बाप का बहुत बड़ा हाथ होता है. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि अगर आपको अपने बच्चे को 'न' कहने में परेशानी होती है तो आपको रुक कर सोचने की ज़रूरत है. ये स्थिति आपके बच्चे के लिए हानिकारक है.
 

ऐसा करते हैं, तो सावधान हो जाइये

बच्चे अपना अच्छा-बुरा खुद नहीं समझ सकते, इसलिए ये बेहद ज़रूरी हो जाता है कि माता-पिता उन्हें इस बारे में समझाएं, न कि उनकी हर इच्छा पूरी करते जायें. अगर आप छोटी उम्र से ही उनके लिए सीमाएं तय नहीं करते तो बच्चे का स्वाभाव बिगड़ने लगता है.
 

कहीं आप 'हेलिकॉप्टर पेरेंट' तो नहीं बन रहे?

दुलार के नाम पर बच्चों की हर ज़िद पूरी कर देने वाले माता-पिता के लिए अंग्रेजी में 'हेलिकॉप्टर पेरेंट' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे मां-बाप इस बात का एहसास नहीं कर पाते कि ज़रूरत से लाड-प्यार बच्चे को बिगाड़ भी सकता है. इससे वो असल ज़िन्दगी का सामना करने के लिए कभी तैयार नहीं हो पाते और आगे जाकर उनकी ज़िन्दगी में समस्याएं आती हैं. इस तरह के मां-बाप बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा अटेंशन देते हैं. ये समस्या मिडल-क्लास माता-पिता में ज़्यादा देखी जाती है.
 

खुद को राजा समझने लगते हैं बच्चे

मां-बाप का इस तरह का बर्ताव बच्चों को एक अजीब से सिंड्रोम का शिकार बना देता है. वो खुद को राजा समझने लगते हैं. ऐसे में जब सब कुछ उनके कण्ट्रोल में नहीं होता या वो सबसे अच्छा नहीं कर पाते तो वो दुखी महसूस करने लगते हैं.
 

क्या हैं नुकसान

बच्चे के लिए हर वक़्त उपलब्ध रहने से उन्हें आगे ख़ुद फ़ैसले लेने में दिक्कत होती है. इतना ही नहीं, वो गुस्सैल भी बन जाते हैं.

आपको अपने बच्चे के व्यवहार की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. यदि ऐसे बच्चे स्कूल जाकर ठीक से बर्ताव नहीं कर पाते, तो इसके लिए कहीं न कहीं आप भी ज़िम्मेदार हैं. ये भी देखा जाता है कि इस तरह के माता-पिता बच्चे के स्कूल और शिक्षकों पर उनके बच्चे के बिगड़ने का दोष मढ़ने लगते हैं.
 

ऐसे दें उन्हें सही सीख

मां-बाप को बच्चों को सिखाना चाहिए कि ये दुनिया उनके इर्द-गिर्द नहीं घूमती, न ही कोई हमेशा उनके अनुरूप रहने वाला है, वो हर चीज़ पर नियंत्रण नहीं पा सकते और हर जगह आगे नहीं रह सकते. इन बातों से बच्चा असल ज़िन्दगी के लिए तैयार होता है.

शरारती होना अलग बात होती है, लेकिन बच्चों के ग़लत व्यव्हार को शरारत का नाम दे देने में नुकसान बच्चे का ही है. वो कभी आत्मनिर्भर नहीं हो पायेगा और आत्म-अनुशासन नहीं सीख पायेगा.

रिसर्च में साबित हुआ है कि इस तरह पाले गए बच्चों में आगे जाकर अवसाद और चिढ़चिढ़ेपन की समस्या होने की संभावना ज़्यादा होती है.

इससे बचने का यही उपाय है कि आप अपने बच्चे के लिए नियम और सीमाएं तय करें और उसे उनका पालन करने के लिए प्रेरित करें. उन्हें 'न' को एक्सेप्ट करना सिखाएं. इसी तरह वो आगे अपनी ज़िन्दगी ठीक से जीने के लिए तैयार होंगे.

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • 3
कमैंट्स()
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| Aug 17, 2019

Mera beta 3Saal Ka chid chid boht krta hai baat na Mano to rota e rehta hai

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| Jul 18, 2019

meri beti 2 saal ki hai hum uski sari jid Puri nahi karte hai pr wo ro ro kar pagal bana deti hai use ku6 bhi samjavo but gum fir k baat wahi k wahi aa kar ruk jati hai kya kare ??

  • रिपोर्ट

| Oct 05, 2018

mera beta 4sal ka hai o sunata nahi hai or chidchid sa rahta hai please kuch upay bataye

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