पेरेंटिंग बाल मनोविज्ञान और व्यवहार

हॉरर फिल्म्स से करे अपने बच्चो को करे दूर! हो सकता है बुरा असर

Parentune Support
1 से 3 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 02, 2018

हॉरर फिल्म्स से करे अपने बच्चो को करे दूर हो सकता है बुरा असर

हर इंसान ने अपने जीवन में अपने डरो का सामना किया होता है| क्या आपको याद नही जब आप कोई हॉरर फिल्म देख के आते है तब सोने में,पीछे चलते साये में, पर्दे के पीछे, बिस्तर के नीचे, अलमारी के उपर - हर जगह कोई बैठे देखने का अंदेशा होता है|  ये डर भले ही आपके लिए कुछ पल की मामूली घबराहट हो पर आपकी नन्ही सी जानों पर इनका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

हॉरर फिल्म्स का कैसा असर हो सकता है आइए जानते है/ Horror Films Affect On Children In Hindi

 

ज़रूरी नही की हर बच्चे का मानसिक प्रारूप एक जैसा हो और सब चीज़ो का उनपे समान असर पड़े। पर फिर भी अगर आपका बच्चा बढ़ती उम्र में है तो क्यूं ना उसको कुछ और साल इन सब चीज़ो से बचा लिया जाए। इस ब्लॉग को जरूर पढ़ लें- क्या आपका बच्चा हॉरर फिल्म देखता है ? 

  1. - उद्वेग / व्याकुलता और डर- हॉरर फिल्म्स का एक बड़ा असर जो बच्चो के कोमल मन पर छूट सकता है तो वो है डर। कई विशेषज्ञों ने अपने शोधों मे पाया है की ऐसी फिल्मों के दृष्य अगर किसी अनुभव से जुड़ जाए तो वो हमेशा का ख़ौफ़ बन जाता है।  इसीलिए अगर कुछ और साल इस बात से बचा जा सके तो अच्छा है। बढ़ती उम्र में जब बच्चा खुद ही अपनी उलझनो में परेशान होता है तो उसका नई-नई चीज़ो से सामना होता है और अगर वह पहले से ही दबे मनका हो तो उसका हॉरर फिल्म्स से दूर रहना ही सही होगा।
     
  2. .  बढ़ते उम्र के बच्चों के लिए पर्याप्त और सुखद नींद का होना ज़रूरी है-  इस समय विकास की कोशिकाएँ सक्रिय रूप से शरीर में काम करती हैं। हर बच्चे की मानसिक गतिविधि एक जैसे नही होते।  उग्र व्यवहार, ख़ौफ़ या डरावनी स्मृतियाँ उसकी नींद मे बाधा डाल सकती हैं। इसके लिए हमेशा ध्यान दे की आपकी संतान कितने समय मे  सो पाती है और किस माहौल को महफूज़ मनती है|,उन्हे वैसा ही वातावरण हमेशा प्रदान करें।
     
  3.  व्यवहार के बदलाव-  आज के युग में मीडीया का हम पर काफ़ी असर देखा जा सकता है। समान रूप से ही हमारे बच्चो पर भी इसका प्रभाव है। पर माना अब ये जाता है की ये प्रभाव अब हमारी आदतों, विश्वास और व्यक्तित्व का हिस्सा बनता जा रहा है। सोच, समझ आर बोली को भी उस ही रूप मे परिवर्तित कर रहे हैं। अगर नादान बच्चे इस मीडीया युग से ग़लत उदाहरण ले तो वो उनके लिए ठीक नही। हॉरर या थ्रिलर फ़िल्मे उग्र मानसिकता को जन्म देती है। इससे वे परेशानी का हाल हिंसा से निकालना सीखते हैं और कई लोग खास कर के बच्चे कहानी और हक़ीकत का भेद करने में उतने समर्थ नही होते।

 

ये सब परस्थितियाँ हर बच्चे पर समान रूप से प्रभावशील नहीं होंगी बहरहाल अपनी संतान के जज़्बात और व्यक्ति व्यवहार को समझ के उस अनुसार फ़ैसला करे। अगर आपको कोई चीज़ विशेष रूप से समझने या पहचानने मे परेशानी हो रही हो तो किसी विशेषज्ञ से सलाह करें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • कमेंट
कमैंट्स()
Kindly Login or Register to post a comment.
+ ब्लॉग लिखें
Loading
{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}

{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}