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पेरेंटिंग स्वास्थ्य

ये हैं वो कोरोना वॉरियर पैरेंट्स जिन पर देश को नाज है

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Apr 17, 2020

ये हैं वो कोरोना वॉरियर पैरेंट्स जिन पर देश को नाज है
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

कोरोना क्राइसिस के दौर में हम सबको सबक सीखने का अवसर मिला है। विपरित परिस्थितियों में भी हमें खुद को व अपने परिवार का संबल कैसे बढ़ाना है ये बहुत महत्वपूर्ण है। पैरेंट्स के लिए तो उनके बच्चे ही उनकी दुनिया होते हैं, इस समय में भी कुछ पैरेंट्स ने ऐसे मिसाल पेश किए हैं जिनसे हम सब प्रेरणा ले सकते हैं।

अपने बच्चे के लिए हजारों किमी का फासला स्कूटी से तय किया एक मां ने 

कहते हैं कि मां अपने बच्चे की खातिर बड़ी से बड़ी मुश्किलों की परवाह नहीं करती है और तमाम बाधाओं को भी हंसते-हंसते पार कर जाती है। इस बात को एक बार फिर साबित करके दिखाया है तेलंगाना की रहने वाली एक मां रजिया बेगम ने। लॉकडाउन के दौरान रजिया बेगम ने अपने बेटे को लाने के लिए तेलंगाना से आंध्रप्रदेश स्कूटी से चली गई। कुल 1400 किमी का फासला स्कूटी से तय करके रजिया बेगम अपने बेटे को लेकर वापस अपने घर लौट आईं। रास्ते में उनको कई प्रकार की समस्याएं भी आई जैसे कि पुलिस ने कई जगहों पर रोका, रास्ते में सुनसान सड़कों व जंगलों का भी उन्होंने परवाह नहीं की। रजिया बेगम एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और उनके पति की मौत हो चुकी है। उनका बेटा आंध्रप्रदेश के नेल्लूर में मेडिकल की पढाई करता है और वह लॉकडाउन में फंसा हुआ था। हां एक और बात की इस दौरान उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग का भरपूर ख्याल रखा। रास्ते में वह सिर्फ पेट्रोल भरवाने के लिए ही रूकीं और कहीं भी बाहर के खाने को हाथ तक नहीं लगाया। इस मां के जज्बे को नमन है।

गोरखपुर के एक दंपति वास्तव में हैं कोरोना वॉरियर

इस समय में जबकि सारा देश कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है तो ऐसे समय में एक दंपति के योगदान के बारे में हम सबको जरूर जानना चाहिए। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सीनियर साइंटिस्ट डॉ अशोक पांडे और उनकी पत्नी पुलिस सर्किल ऑफिसर रचना मिश्रा ने अपने आपको इस मुहिम में झोंक दिया है। दरअसल गोरखपुर, बस्ती व आजमगढ़ मंडल के 10 जिलों की कोविड 19 के सैंपल की जांच का काम बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हो रही है।  डॉ अशोक पांडे इसकी मॉनिटरिंग खुद करते हैं, एहतियात के लिए वे खुद अलग कमरे में शिफ्ट हो गए हैं ताकि इसकी चपेट में घर परिवार का कोई सदस्य ना आ जाए। हालांकि इनके परिवार के सदस्यों को भी इनके बारे में सोच-सोचकर चिंता सता रही है लेकिन वे बिना इसकी परवाह किए लैब में निरंतर अपने काम में जुटे रहते हैं। डॉ अशोक पांडे की पत्नी जो इस इलाकेे में पुलिस अधिकारी हैं वे भी लॉकडाउन को सफल करने के प्रयास में निरंतर जुटी हुई हैं। सुबह 9 बजे बजे ड्यूटी के लिए बाहर निकल जाती हैं ताकि आम लोग लॉकडाउन का पालन कर सकें, इसके अलावा घर के तमाम सदस्यों के लिए नाश्ता भोजन वगैरह भी खुद से बना कर ड्यूटी के लिए जाती हैं। सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने अपने बेटे आयुष्मान को अभी नानी के घर भेज दिया है। 

पिता संभाल रहे हैं बच्चे को मां अस्पताल में नर्स की ड्यूटी कर रही है

कर्म ही पूजा है, इस सिद्धांत पर यकीन रखने वाली हैं नर्स भारती। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी पर तैनात नर्स भारतीकी सास कीमोथैरेपी पर हैं और उनका एक दो साल का बच्चा है। बच्चे की देखभाल का जिम्मा पिता ने संभाल लिया और मां लगातार अस्पताल में ड्यूटी कर रही हैं। कोरोना पीड़ितों की सेवा में नर्स भारती ने लगातार अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही है और उनको अपने पति का भरपूर साथ मिला है। भारती के पति ने कोरोना संकट के इस दौर में घर औऱ बच्चे की देखभाल का सारा जिम्मा उठा लिया है ताकि उनकी पत्नी भारती को किसी प्रकार का तनाव ना रहे। 7 अप्रैल से ही भारती कोटली क्षेत्र के गोखड़ा गांव में अपने घर नहीं जा सकी हैं और वह अस्पताल में ही रहकर 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रही हैं। भारती के जैसे कोरोना कर्मवीरों की सेवा भाव को देखकर सारा देश नतमस्तक है।

बेटी की देखभाल के संग कोरोना को हराने में अस्पताल में ड्यूटी कर रहा है यह दंपति

 कोरोना महामारी से लड़ रहे स्वास्थ्य सेवा में जुटे लोगों की प्रशंसा करने के लिए शायद शब्दकोष भी कम पड़ जाए। पीजीआई चंडीगढ में नर्सिंग ऑफिसर जयवीर और इंद्रावती दोनों ही काम करते हैं। इनके भैया-भाभी भी इसी अस्पताल में कार्यरत हैं। जयवीर की ड्यूटी इन दिनों पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल की आईसीयू वार्ड में लगी है। 4 साल की बेटी की देखभाल करने के लिए मां इंद्रावती ने अभी चाइल्ड केयर लीव ले रखा है। बेटी की देखभाल के लिए दोनों बारी-बारी से नौकरी करते हैं ताकि पैरेंट्स होने की जिम्मेदारी को निभाने के संग कोरोना को हराने के लिए कर्तव्य का पालन कर सकें। जयवीर ने जानकारी देते हुए कहा कि उनकी 7 दिनों की आईसीयू ड्यूटी के बाद वे 14 दिनो तक होम क्वारंटीन में रहेंगे और उसके बाद उनकी पत्नी इंद्रावती ड्यूटी पर जाएंगी।

पति-पत्नी दोनों हैं डॉक्टर और बच्चे की देखभाल के संग ड्यूटी कर रहे हैं

यूपी के शामली में महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ शाइस्ता नाज जहां दिन रात कोरोना पीड़ितों की सेवा में जुटी हैं वहीं उनके डॉक्टर पति भी मुजफ्फरनगर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ शाइस्ता के दो बच्चे जिनमें एक दो साल का है और दूसरा 5 साल का है। संकट की इस घड़ी में देर रात घर वापस लौटना और सुबह-सुबह अपनी ड्यूटी पर चले जाना इनके लिए डेली रूटीन बन चुका है। किसी प्रकार की इमरजेंसी कॉल होने पर इनको रात में भी अस्पताल जाना पड़ जाता है। एक तरफ तो छोटे बच्चे हैं और दूसरी तरफ उनकी ड्यूटी। बच्चों की देखभाल में कोई कमी ना रह जाए इसलिए उन्होंने मदद के लिए अपने माता-पिता को बुला लिया है।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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