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शिक्षण और प्रशिक्षण

सोच समझकर करें अपने बच्चे के लिए ट्यूटर का चयन

Deepak Pratihast
7 से 11 वर्ष

Deepak Pratihast के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Nov 23, 2019

सोच समझकर करें अपने बच्चे के लिए ट्यूटर का चयन
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

कॉम्पिटिशन के इस दौर में हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ने में सबसे तेज हो, कामयाब हो और अच्छे नंबर हासिल करे। इसके लिए वे बच्चे को अच्छे से अच्छे स्कूल में दाखिला भी दिलाते हैं, लेकिन हर बच्चे का काम सिर्फ स्कूल की पढ़ाई से नहीं चलता। क्लास में अधिक बच्चे होने और सिलेबस पूरा करने की आपाधापी में सबकुछ अच्छे से क्लियर नहीं हो पाता। ऐसे में पैरेंट्स बच्चे को ट्यूशन दिलाते हैं। पर ट्यूशन तभी कारगर है, जब अच्छा ट्यूटर मिले। अच्छा ट्यूटर चुनना पैरेंट्स की जिम्मेदारी है और यह आसान काम नहीं है। इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि आखिर बच्चे के लिए ट्यूटर का चुनाव करते वक्त आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

ट्यूटर में इन बातों को देखें/See These Things In The Tutor In Hindi

  1. विषय की जानकारी – जब बच्चे के लिए ट्यूटर की तलाश करें, तो इस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान दें कि उसे सब्जेक्ट की नॉलेज यानी विषय की जानकारी कितनी और कैसी है। इसे चेक करने के लिए आप उस टीचर पर 1-2 दिन नजर रखें। अच्छा टीचर जिसकी सब्जेक्ट नॉलेज अच्छी है, वह कोई भी चैप्टर शुरू करने से पहले उसकी समरी बताएगा। वह ऐसे सवाल व टॉपिक बताएगा जो एग्जाम के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। वहीं कमजोर टीचर जिसे विषय की जानकारी नहीं है, वह बार-बार बुक को रेफर करेगा, सभी उदाहरण किताब से देगा। यही नहीं कठिन टॉपिक को वह या तो छोड़ देगा या अच्छे से नहीं पढ़ाएगा। 
     
  2. पढ़ाने का तरीका – अच्छा ट्यूटर वही है, जो पढ़ाने का बेहतर तरीका जानता है। विषय को जानना और उसे पढ़ाना दोनों अलग-अलग चीजें हैं। जरूरी नहीं कि जिसे विषय की जानकारी हो वह अच्छे से पढ़ाना भी जानता हो। इसलिए ट्यूटर को चुनते वक्त इस बात पर भी विशेष ध्यान दें। अच्छा टीचर फॉर्म्युले को अच्छे से पढ़ाएगा। वह उदाहरण की मदद से सवाल समझाएगा, ताकि बच्चे को लंबे समय के लिए सवाल याद रहे।
     
  3. मोटिवेटर – एक अच्छे ट्यूटर का अच्छा मोटिवेटर होना बहुत जरूरी है। जब आप बच्चे के लिए ट्यूटर तलाशें तो इस बात को जरूर देखें कि उसमें मोटिवेशन के गुण हैं या नहीं। दरअसल स्कूल के एक क्लास में 40-50 बच्चे होते हैं। स्कूल टीचर को फर्क नहीं पड़ता कि सभी बच्चे को टॉपिक समझ में आ रहा है या नहीं। पर ट्यूटर के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। एक अच्छा ट्यूटर वही है जो बच्चे के साथ-साथ काम करता रहे, उसकी कमजोरियों को दूर करता रहे।अच्छा ट्यूटर बच्चे को जब तक टॉपिक समझ में नहीं आता उसे अलग-अलग तरीकों से समझाता है। वह कभी ये नहीं कहता कि, ये आसान टॉपिक है तुम्हें समझ क्यों नहीं आ रहा। वहीं ऐसा ट्यूटर जो बहुत आसान टॉपिक को लंबे समय तक पढ़ाए व कठिन टॉपिक को जल्दी खत्म कर दे, तो समझिए कि वह मोटिवेटर नहीं है।
     
  4. रेग्युलेरिटी (नियमितता) और पंक्चुऐलिटी (समय की पाबंदी) – अच्छे ट्यूटर के लिए यह गुण भी बहुत जरूरी है। अगर ट्यूटर नियमित और समय का पाबंद होगा तो वह आपके बच्चे को एक्स्ट्रा समय भी दे सकेगा। यह एक्स्ट्रा समय एग्जाम के वक्त काफी कारगर होगा। इसके अलावा आप ये भी देखें कि टीचर टाइम पर आ रहा है कि नहीं।
     
  5. ईमानदारी –  अगर ट्यूटर ईमानदार है, तो वह अच्छा है। पर ट्यूटर की ईमानदारी को चेक करना बहुत कठिन है। कोई भी ट्यूटर भगवान नहीं है। हो सकता है कई बार उसे कोई टॉपिक क्लियर नहीं हो। पर अच्छा ट्यूटर वह है जो इसे ईमानदारी से स्वीकार करे और बच्चे से कहे कि आज मुझे ये टॉपिक क्लियर नहीं है। मुझे एक दिन का समय दो मैं इसे स्टडी करके तुम्हें कल समझा दूंगा। वहीं ट्यूटर अगर किसी टॉपिक को ये कहकर टाल देता है कि ये बेकार है और एग्जाम में आएगा ही नहीं तो इसका मतलब ये कि वह उससे बच रहा है और यह बच्चे के लिए ठीक नहीं है।
     
  6. व्यवहार और चरित्र – आज के समय में ये देखना भी जरूरी है कि आप जिस ट्यूटर को हायर कर रहे हैं उसका व्यवहार व चरित्र कैसा है। अक्सर ट्यूटर की ओर से बच्चों के साथ गलत हरकत करने की खबर सामने आती है। ऐसे में ट्यूटर रखते वक्त उसके व्यवहार व कैरेक्टर को जरूर चेक करें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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