पेरेंटिंग

कैसे करें अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग

Anubhav Srivastava
3 से 7 वर्ष

Anubhav Srivastava के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Oct 20, 2017

कैसे करें अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग

सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो। पिछले कुछ सालों से शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पैरेंट्स का ख़र्च लगातार बढ़ रहा है। शिक्षा के अलावा एक बड़ी रक़म की ज़रूरत होती है बच्चों की शादी के समय। इसके अलावा माता-पिता अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति भी चिंतित रहते हैं, इसलिए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए एक बढ़िया योजना की ज़रूरत होती है। 

बच्चों के लिए फाइनेंसियल प्लानिंग के कुछ उपाय / How To Make Financial Planning For Children In Hindi

अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि आप सही समय पर उचित निवेश सोच-समझकर करें। इसके लिए नीचे दी गई कुछ बातों को ध्यान में रखना फायदेमंद साबित होगा :

 

  1. निवेश में सबसे पहले बीमा को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके बाद किसी अन्य जगह निवेश करना चाहिए। इंश्योरेंस तथा आर्थिक सलाहकार विशेषज्ञ वीरेन्द्र अग्रवाल के अनुसार, “अपने बच्चों और परिवार का भविष्य संवारने के लिए हर व्यक्ति को बीमा कराना चाहिए, लेकिन पॉलिसी ख़रीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ख़्याल रखना चाहिए, जैसे- पॉलिसी में बीमा सुरक्षा उसके जीवन के लिए हो। यदि पॉलिसीधारक यानी पैरेंट की मृत्यु हो जाती है, तो उस स्थिति में प्रीमियम समाप्त करने की योजना हो, बच्चों को मज़बूत आर्थिक आधार देने के लिए 120 दिनों यानी 4 महीने के अंदर चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान शुरू कर देना चाहिए। ”एलआईसी की कई ऐसी योजनाएं हैं, जो ख़ासतौर से बच्चों के लिए तैयार की गई हैं- जीवन अनुराग, कोमल जीवन, जीवन किशोर, जीवन छाया। इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें: बच्चों के भविष्य के लिए सबसे अच्छे निवेश प्लान
     
  2. भारत में विवाह के शुभ अवसर पर सोने का काफ़ी लेन-देन होता है। आंकड़े बताते हैं कि सोने में निवेश आपको कभी निराश नहीं करता। चूंकि अब सोने में निवेश काफ़ी फ़ायदे का सौदा नज़र आ रहा है, तो अब आप बेटे-बेटी दोनों के लिए ही सोने की पारंपरिक ख़रीदारी के अलावा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) भी ख़रीद सकते हैं। ईटीएफ में निवेश करने से आपको 20 से 28 प्रतिशत तक रिटर्न मिल जाता है, वहीं आपको सोना ख़रीदने या उसे सुरक्षित रखने के लिए चिंता करने की भी ज़रूरत नहीं होती। इस समय भारत में 6 गोल्ड ईटीएफ मौजूद हैं- एसबीआई म्यूचुअल फंड का ईटीएफ, गोल्ड बेंचमार्क ईटीएफ, कोटक गोल्ड ईटीएफ, क्वांटम गोल्ड, रिलायंस गोल्ड ईटीएफ और यूटीएफ गोल्ड ईटीएफ।
     
  3. आमतौर पर लोग बैंकों में अपने धन को एक निर्धारित समय के लिए एफडी, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) में निवेश करना बेहतर समझते हैं, क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार का जोख़िम नहीं होता है। एनएससी और पीपीएफ में आमतौर पर जहां 8% का ब्याज मिलता है, वहीं बैंकों की कोशिश होती है कि वे अपनी ब्याज दर को 5 साल तक की बचत योजना पर 8.5% तक बनाए रखें, ताकि ग्राहक बैंक एफडी की ओर आकर्षित रहें। बैंकों की ब्याज दर में उतार-चढ़ाव होते रहने की वजह से लोगों का रुझान एनएससी की ओर भी होता है। आपके लिए डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स अपनाना एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है और इससे आपके बच्चे की सारी ज़रूरतें भी पूरी हो सकेंगी। इसमें सबसे अच्छी बात इस प्लान की फ्लेक्सिबिलिटी है। आप जब चाहें, पैसे विड्रॉ कर सकते हैं। इसमें ऐसी कोई शर्त नहीं होती है कि आप अपने बच्चे के 18 साल की आयु होने तक अपनी जमा राशि को छू ही नहीं सकते। आप जब चाहें, इस इन्वेस्टमेंट प्लान से बाहर आ सकते हैं। साथ ही इसमें रिटर्न्स काफ़ी हद तक टैक्स फ्री होते हैं।
     
  4. कुछ लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट बच्चों की उम्र के मुताबिक़ करें। जब आपका बच्चा हाईस्कूल में पहुंचेगा या उसके बाद 12वीं कक्षा पास करे, उसके बाद आपको पैसों की सबसे अधिक ज़रूरत पड़ सकती है, तब इंश्योरेंस का पैसा हाथ आए, तो आपके लिए आसानी होगी। कुछ मामलों में यह प्लानिंग तब तक की जानी चाहिए, जब तक बच्चा अपनी पढ़ाई जारी रखता है। बेहतर हो कि आपने अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए जो अनुमान लगाया हो, उससे ज़्यादा की तैयारी कर लें। आंकड़े दर्शाते हैं कि बच्चे जब 1-5 साल की उम्र के बीच में होते हैं, उस दौरान ख़र्च ज़्यादा होते हैं। जब बच्चा 5 साल का हो जाता है, उसके बाद ख़र्च धीरे-धीरे कम होने लगते हैं, लेकिन जैसे ही बच्चा 15 साल के आसपास का होता है, ख़र्च फिर बढ़ने लगते हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता चाहते हैं कि बोर्ड की परीक्षा की तैयारी के लिए वे अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी सुविधाएं दे सकें, ताकि वे अच्छे नंबरों से पास हो सकें। ग्रैजुएशन स्टेज पर आकर ख़र्च काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चा कौन-सी पढ़ाई करना चाहता है। प्रोफेशनल डिग्री, जैसे- मेडिकल और इंजीनियरिंग ग्रैजुएशन की तुलना में काफ़ी महंगे होते हैं। इसके अलावा बच्चा अपने देश में रहकर पढ़ रहा है, तो ख़र्च कंट्रोल में रहता है, पर यदि वह विदेश में पढ़ना चाहता है, तो ख़र्च आसमान छूने लगता है।
     
  5. यदि बच्चे की शिक्षा के ख़र्च की प्लानिंग जल्दी शुरू कर दी है, तो यह आपके लिए वाकई फ़ायदेमंद साबित होगा। आप अपने बच्चे के नाम पर शुरू से ही 8-10 हज़ार रुपए हर महीने बचत कर सकते हैं। बचत करते हुए यह ध्यान में रखें कि मैच्योर होने पर आपकी राशि 10 लाख से ज़्यादा हो। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश में पहली प्राथमिकता इंश्योरेंस को देनी चाहिए। कोई भी इन्वेस्टमेंट प्लान लेने से पहले आपको यह ज़रूर जान लेना चाहिए कि आपका बच्चा किस उम्र तक आप पर निर्भर रहेगा। दरअसल आपको बच्चे के जन्म से छह महीने पहले से उसकी शादी की उम्र तक की तैयारी कर लेनी चाहिए। यह आपकी जड़ को मज़बूत करता है और परिवार को सुरक्षा देता है।

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