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पेरेंटिंग शिक्षण और प्रशिक्षण

अपने बच्चे को बताएं आग लग जाए तो कैसे बचें ?

Prasoon Pankaj
1 से 3 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 29, 2019

अपने बच्चे को बताएं आग लग जाए तो कैसे बचें

आपका बच्चा कौन सा कपड़ा पहनेगा? आपका बच्चा लंच और ब्रेकफास्ट में क्या खाएगा? आपका बच्चा कौन से स्कूल में पढ़ेगा या आप अपने बच्चे को छुट्टियां मनाने के लिए कहां लेकर जाएंगे?  इन सब बातों पर आप बड़ी ही बारीकी से सभी पहलुओं पर विचार करके फैसला लेते हैं। लेकिन कभी आपने इन बातों पर विचार किया है कि आपके बच्चा का स्कूल, कोचिंग संस्थान, म्यूजिक/ डांस क्लासेज की बिल्डिंग क्या सुरक्षा के सभी मापदंडों पर खरा उतर रहे हैं ? आज इस ब्लॉग में हम इन्हीं जरूरी बातों पर चर्चा करेंगे और इसके साथ ही बच्चे को आग से अपनी सुरक्षा करने के लिए किस तरह का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है के बारे में विस्तार से बताएंगे।

अभी कुछ दिन पहले सूरत में एक कोचिंग संस्थान में भीषण आग लग जाने की वजह से 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में से अधिकांश छात्र थे। इस हादसे से हम सबको सबको लेने की आवश्यकता है। सबसे जरूरी सवाल ये कि क्या हम अपने बच्चों को आग जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में फंस जाने पर बचाव के उपायों के बारे में प्रशिक्षण दे रहे हैं (how to teach a child about fire safety) ? आपके बच्चे जिस स्कूल या कोचिंग में पढ़ाई करने जाते हैं क्या वहां अग्नि सुरक्षा से संबंधित सभी निर्देशों(fire safety measures) का पालन किया जाता है और क्या हम अपने घर में अग्निकांड जैसी अनहोनी से बचाव करने के लिए तमाम एहतियात बरतते हैं ?

कैसे दें आग से बचाव के लिए अपने बच्चे को ट्रेनिंग? /Fire Safety Guide for Kids in Hindi

Ground Report India के फाउंडर व ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लेखक Vivek Umrao Glendenning ने अपने एक ब्लॉग के माध्यम से जानकारी देते हुए लिखा है कि उनका बेटा लगभग तीन साल का है। विवेक बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में उनका बेटा अभी बिना भवन व ढ़ांचे वाले जंगल-पहाड़ स्कूल में जाता है। अभी इस स्कूल में बच्चों को आग के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है (What to Do in a Fire (for Kids))। आगे जानिए इस प्रशिक्षण की खास बातें...

  • ऑस्ट्रेलिया के इस जंगल-पहाड़ स्कूल में बच्चों को आग जलाने व बुझाने व किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए इन सब बातों के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
     
  • धातुओं व पत्थरों को आपस में घर्षण करके, माचिस व अन्य प्रकार से आग जलाना सीखाया जाता है।
     
  • आग को जलाने के समय में अगर चोट लग जाए तो क्या करना चाहिए ये भी सीखाया जाता है।
     
  • आग को बुझाया कैसे जाए इसके बारे में भी बच्चे को सीखाया जाता है।
     
  • कहां आग जलानी चाहिए और कहां नहीं जलानी चाहिए इसके बारे में भी बच्चे को जानकारी दी जाती है।
     
  • ऑस्ट्रेलिया में आग व बचाव सेवा को काफी सम्मानित माना जाता है। छोटे बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए साल में कई बार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
     
  • आग व बचाव सेवाओं के वाहनों एवं यंत्रों से बच्चों को अच्छे से परिचित कराया जाता है। बच्चे इन वाहनों में चढ़ कर और इसमें लगे यंत्रों के बटन और स्विच को दबा कर सीखते हैं। इसके अलावा बच्चों को इस सेवा से जुड़े खिलौने भी गिफ्ट में दिए जाते हैं ताकि बच्चे अपने घर में भी इनको खेल-खेल में सीख सकें।
     
  • विवेक बताते हैं कि उनका बेटा आदि जब एक साल का था तब वो फायर ब्रिगेड के अत्याधुनिक वाहन के अंदर घुसकर सब कुछ देख चुका था। यहां के स्कूलों में भी छोटे बच्चों को आग का प्रयोग, सावधानी व सुरक्षा के उपायों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।

क्या होने चाहिए स्कूलों में आग से बचाव के लिए सुरक्षा इंतजाम ?/ Check Fire Safety Norms in Schools in Hindi

स्कूलों में आगजनी से बचने के लिए किस तरह के सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए ? आप अपने बच्चे को जब किसी स्कूल में दाखिला करवाते हैं तो निश्चित रूप से आपको स्कूल में इस तरह के सुरक्षा उपायों का पालन किया जाता है या नहीं इसके बारे में अवश्य जानकारी प्राप्त कर लें। NDMC की तरफ से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक दिल्ली के तमाम स्कूलों में आगजनी से बचने के लिए सुरक्षा के निम्नलिखित उपायों का होना जरूरी है।  

  • सभी स्कूलों में अग्निशमन उपकरण होने चाहिए।
     
  • बचाव के सभी रास्ते बिना किसी रूकावट के साफ-सुथरे और खुले होने चाहिए। 
     
  • स्कूल का चौकीदार या केयरटेकर बिजली से संबंधित तमाम उपकरणों को स्कूल के समय के बाद बंद करेंगे।
     
  • स्कूल में एलपीजी सिलेंडरों को रखने का उपयुक्त स्थान हो और विशेष ध्यान इस बात का रखा जाए कि ये सिलेंडर क्लास रूम से दूर हों।
     
  • आग से सुरक्षा विषय पर शिक्षकों एवं छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए फायर ब्रिगेड की तरफ से विभिन्न पोस्टर मुहैया कराए जाते हैं इनको स्कूल में लगा होना जरूरी है।
     
  • स्कूल में बिजली के तारों का आवरण नली में होना चाहिए। ये भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बिजली के सर्किट पर अत्यधिक ऊर्जा का बोझ नहीं होना चाहिए। 
     
  • स्कूल कैंपस में आपातकालीन दूरभाष संख्या जैसे कि 100, 101 तथा 102 के साथ-साथ नजदीकी दमकल केंद्र तथा निकटतम पुलिस स्टेशनों का फोन नंबर भी प्रमुखता के संग प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

बच्चे को बताएं आग से सुरक्षा के तरीके/ Fire Safety Measures in Hindi

आग लगने पर बचाव के तरीकों के बारे में आप अपने बच्चे को जरूर अवगत करा दें। ध्यान रहे कि अनहोनी कभी भी घट सकती है और इसलिए बेहतर यही होगा कि हम अपने बच्चों को इस तरह की आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा कैसे करें इसके बारे में जरूर प्रशिक्षण दें। सुरक्षा के इन उपायों के बारे में आपको भी अच्छे से पता होना चाहिए।

  • सबसे पहली बात की जब कभी आग लगे तो तत्काल 101 नंबर पर कॉल करके दमकल विभाग को जानकारी दें। और ये कतई नहीं सोचें कि किसी और ने कर ही दिया होगा।
     
  • आग लगने की स्थिति में कभी भी बिल्डिंग से नीचे उतरते समय में लिफ्ट का प्रयोग नहीं करना चाहिए बल्कि सीढियों का उपयोग करें।
     
  • आग लगने की स्थिति में हर तरफ धुआं हो जाता है, धुएं से बचने के लिए रूमाल या अन्य किसी कपड़े से अपने मुंह और नाक को जरूर ढ़क लें।
     
  • अगर कभी कपड़ें में आग पकड़ लें तो इस दौरान घबराहट में आकर भागना नहीं चाहिए क्योंकि इससे आग की लपटों का प्रकोप और बढ़ सकता है। ऐसी परिस्थिति में जमीन पर लेट जाएं और लेटे हुए में इधर उधर उलट पलट करें। कंबल या अन्य कपड़ें की मदद से आग को बुझाने का प्रयास करें।
     
  • आग लगने की वजह धुआं और गैस सबसे पहले छत की तरफ जमा होते हैं, अगर आप धुएं में फंसे हों तो जमीन पर झुके हुए अवस्था में बैठ जाएं।
     
  • भगदड़ न मचाएं और अपने होश कायम रखें ताकि आप दूसरों की मदद कर सकें
     
  • अपने नाक पर गीला रुमाल या गीला लेकिन घना कपड़ा बांधें। तथा फर्श पर लेट जाएं।
  • यदि आप किसी कमरे में बंद हों तो उसके खिड़की दरवाज़े बंद कर दें तथा उनके नीचे या ऊपर या कहीं से भी धुआं आने की संभावना हो तो उस जगह को भी गीले कपड़े से सील कर दें।

  • अपने आसपास के लोगों से भी ऐसा ही करने को कहें।

  • प्रत्येक बिल्डिंग या सोसाइटी फ्लैट में रहने वालों को कम से कम 6 महीने पर अग्निशमन अभ्यास जरूर करना चाहिए। इसमें आप अपने नजदीकी फायर ब्रिगेड विभाग की मदद ले सकते हैं। इस तरह के अभ्यास में बच्चों को जरूर शामिल करें।
     
  • अपने घर, दफ्तर में स्मोक डिटेक्टर जरूर लगा लें।
     
  • अगर आपने अपने घर या दफ्तर में फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर या अग्निशामक यंत्र लगाया है तो समय-समय पर इसकी जांच करते रहें और जरूरत होने पर इन यंत्रों की सर्विसिंग या गैस इत्यादि का भराव करवाते रहें।
     
  • भले आपने अपने घर में अग्निशामक यंत्र लगवा लिया हो लेकिन यही काफी नहीं होता है, आवश्यकता पड़ने पर इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए ये ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए आप अपने बच्चे को भी इन यंत्रों का इस्तेमाल कैसे करें इसका प्रशिक्षण जरूर दें।

आग से सुरक्षा के लिए अपने घर में किस तरह की एहतियात बरतें ?/ How to Stay Safe from Short-Circuit, Fire in Hindi

National Institute of Urban Affairs (NIUA) के चाइल्ड फ्रेंडली स्मार्ट सिटीज प्रोजेक्ट में बतौर रिसर्च एसोशिएट के तौर पर कार्यरत दिव्या जिंदल बताती हैं कि आग से बचने के लिए ये जरूरी है कि आप अपने घर में भी कुछ सावधानियां जरूर बरतें। क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसके बारे में आप अपने बच्चे को भी जरूर सजग करें।

  • आप अपने घर को हमेशा साफ सुथरा व स्वच्छ बनाए रखें।
     
  • माचिस, लाइटर्स व पटाखों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
     
  • अगर आप अपने घर में स्मोकिंग या धूम्रपान करते हैं तो माचिस, सिगरेट को फेंकने के लिए राखदानी का प्रयोग करें।
     
  • आप अपने घर की सीढ़ियों व बचाव के रास्तों को हमेशा खाली रखें। 
     
  • एलपीजी सिलेंडर को हमेशा उठे हुए जगहों पर रखें ना कि जमीन की सतह पर
     
  • अपने बच्चे को कभी रसोईघर में खेलने ना दें
     
  • खाना बनाने के दौरान सूती कपड़ों का ही प्रयोग करें
     
  • आंकड़ों के मुताबिक आग के 60 फीसदी मामले बिजली की शार्ट सर्किट, ओवरहीटिंग, बिजली के तारों की गलत तरीके से टैपिंग, लापरवाही बरतने से ही होती है। अगर पर्याप्त अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन किया जाए तो हम इस तरह की घटनाओं को रोकने में सफल हो सकते हैं।
     
  • हमेशा भारतीय मानक संस्थान द्वारा प्रमाणित बिजली के उपकरणों का ही प्रयोग करें।
     
  • अग्नि ग्रस्त क्षेत्र में सबसे पहले बिजली की आपूर्ति बंद कर दें या घर का मेन स्वीच बंद कर दें।
     
  • घर में कहीं कोई टूटा हुआ प्लग या क्षतिग्रस्त तार नजर आए तो प्राथमिकता के आधार पर उसको बदल दें।
     
  • जब कभी घर से कहीं बाहर जाएं तो बिजली का मेन स्वीच बंद करना बिल्कुल ना भूलें।
     
  • सिलेंडर को बंद स्थान में ना रखें और हमेशा खड़ी स्थिति में ही रखें
     
  • अपने बच्चे को कभी भी किचेन में, हीटर के पास या आग के नजदीक अकेला ना छोड़ें।

 

इस तरह के उपायों को अपना कर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। वो कहते हैं ना कि सावधानी हटी तो दुर्घटना हुई तो इसलिए आप अपने बच्चे को भी सतर्क करें और उनको आग से बचाव के उपायों का प्रशिक्षण जरूर दें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • 1
कमैंट्स()
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| Jun 04, 2019

nice block thank u for success

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