शिक्षण और प्रशिक्षण

बच्चों में जगाएँ मदद करने का नजरिया !

Neetu Ralhan
7 से 11 वर्ष

Neetu Ralhan के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Dec 12, 2018

बच्चों में जगाएँ मदद करने का नजरिया

कहा जाता है कि बच्चे देश और दुनिया का भविष्य होते हैं और आने वाली नई पीढ़ी ही राष्ट्र और समाज के भविष्य का निर्धारण करती है। बच्चे बताने से ज्यादा आसपास के महौल को देख कर सीखते हैं। साथ ही उन्हें बचपन से ही सही तरीके से समझाने की जरूरत होती है। बचपन से ही उन्हें त्याग, ममता, प्यार, अनुशासन और प्रगति की शिक्षा देनी होती है। साथ ही उन्हें ये भी सिखाना पड़ता है कि एक दूसरे की मदद करके ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। त्याग, सद्भावना व ममता जैसे गुण एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, जो न सिर्फ उनके बल्कि देश के उज्जवल भविष्य को भी सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में ये बेहद ज़रूरी है कि बच्चों को सही संस्कार और शिक्षा दी जाए और उन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व पाने में मदद की जाए। तो चलिए जानते हैं कि कैसे आप अपने बच्चे के अंदर ये गुण डाल सकते हैं और इसके क्या फायदे होते हैं।
 

बच्चे को इस तरह सीखाएं अच्छी बातें/ The Child must Learn These Good Things In Hindi

  • बच्चों को हर मानवीय गुण सिखाने की शुरुआत घर से ही होनी चाहिए उन्हें बताना चाहिए कि मानव जीवन का उद्देश्य है अपने मन, वचन और कर्म से दूसरों की मदद करना। हमेशा यह देखा गया है कि जो लोग दूसरों की मदद करते हैं, उन्हें कम तनाव रहता है, मानसिक शांति और आनंद का अनुभव होता है। वे अपने में स्वयं अपेक्षाकृत अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं, और उनका जीवन सुखमय होता है।
     
  • हमें बच्चों को उन लोगों की सहायता करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है जो हर समय उनके साथ रहते हैं और जिनके साथ बहुत गहरा लगाव होता है। जैसे घर में बूढ़ी दादी को बीमारी की हालत में बच्चे के हांथ से दवा दिलाई जा सकती है। इससे वह दूसरों की मदद करना सीखेगा और बड़ों का सम्मान करना भी सीखेगा।
     
  • बच्चे चीजों को बांटना तभी सीखते हैं, जब वे अपने से बड़ों को ऐसा करता देखते हैं। अगर वो आपको लालच करते हुए देखेंगे तो कभी भी चीज़ें बांटना नहीं सीख पाएंगे। आज के दौर के छोटे बच्चों में देखा जाता है कि वे अपनी चीजें या खिलौने आदि को शेयर करना बिल्कुल पसंद नहीं करते। ऐसा उनके ज्यादातर अकेले रहने और सामाजिक ना होने के कारण अधिक होता है, और ये उनके भविष्य के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। तो अपने बच्चों के सामने व उनके साथ चीज़ें बांटें।  
     
  • इस मामले में माता और पिता दोनों की अहम भूमिका होती है, खासतौर पर पिता की। पिता होने के नाते आपको अपने बेटे को कई ज़रूरी बातें सिखलानी होती हैं। और एक बढ़ता हुआ बेटा अपने पिता से बहुत कुछ सीखता भी है। इसलिए उसे अच्छी चीजें सिखाने के लिए खुद भी उसके सामने अच्छी चीजों के उदाहरण पेश करें। उसे सिखाएं कि परिवार में कब और किसे आपकी जरुरत है और इसे कैसे समझा जाए और अपनी जिम्मेदारी को निभाएं।
     
  • अक्सर हम जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट या किसी अन्य स्थान पर किसी ज़रूरतमद की मदद करते हैं तो  बहुत खुशी होती है। तो जब आप बस या ट्रेन में सफर कर रहे हों तो इस दौरान अगर कोई गर्भवती महिला या बुर्जुग खड़ा है तो उसे अपनी सीट दें और फिर अपने बच्चों को भी बताएं कि आपने उसकी मदद क्यों की है और उसको भी मौका आने पर ऐसा ही करना चाहिए।
     
  • हमें बच्चों को यह बताना चाहिए कि उसे उन लोगों की देखभाल करनी चाहिए जो बीमार हों, अशक्त हों या तकलीफ में हों। यदि हमें कोई ऐसा व्यक्ति दिखाई दे जो किसी भारी बोझ को उठाने या किसी कठिन काम से जूझ रहा हो तो हमें उसका बोझ हल्का करने के लिए आगे आना चाहिए।
     
  • धर्मार्थ संस्थाओं को दान देना अच्छी बात है, बच्चों को भी इसके लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। बच्चों को इस दिशा में उसकी झिझक छुड़वानी चाहिए, बच्चे को गरीबों और भिखारियों का सम्मान करना सिखाना चाहिए।
     
  • कुछ बच्चों के पास कुछ असाधारण क्षमताएं होती हैं। उसकी क्षमताओं को जानें।  आप उसे बचपन से ही मार्शल आर्ट की ओर ले जाते हैं जिससे आगे चलकर वह स्वयं व दूसरों की मदद कर सके। उसे आप ऐसी फिल्में भी दिखा सकते हैं जिनसे उसे दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिले।
     
  • कहने का अर्थ यह है कि यदि आप अपने बच्चों के अंदर दूसरों की मदद करने का भाव डालते हैं तो बड़ा होने पर उसका जीवन सुखमय बीतेगा। दूसरों की मदद करने के कारण उसका सामाजिक दायरा बड़ा होगा और उसकी भी मदद करने वाले लोगों की संख्या बड़ी होगी। 

तो ये हैं कुछ वैसे उपाय जिन्हें आप रोजमर्रा के जीवन में प्रयोग में लाकर अपने बच्चे को नेक काम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। दरअसल परिवार के माहौल का बच्चे के उपर सबसे अधिक असर होता है। उदाहरण के लिए अगर परिवार के सदस्य धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और प्रतिदिन घर में ईश्वर की आराधना की जाती है तो ये स्वाभाविक है कि बच्चा भी खुद ब खुद ऐसा करना शुरू कर देगा। अगर आप किसी भी तरह के नशे के आदी हैं तो प्रयास ये करिए कि बच्चे के सामने सिगरेट, तंबाकू का सेवन ना करें। आपका बच्चा यही मानकर चलता है कि पापा-मम्मी जो करते हैं वो काम अच्छा ही होगा। 

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