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अपने बच्चे को जहरीली हवा से कैसे बचाएँ ? - जानें क्या हैं सुरक्षा उपाय ?

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Oct 30, 2018

अपने बच्चे को जहरीली हवा से कैसे बचाएँ जानें क्या हैं सुरक्षा उपाय

आए दिन आप लोग भी अखबारों एवं न्यूज चैनलों के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर और देश के अलग-अलग हिस्सों में वायु प्रदूषण से संबंधित खबरें पढ़ते होंगे। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ी और 10 साल पुरानी डीजल वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। WHO की रिपोर्ट में जहां साल 2016 में 5 साल से कम उम्र के तकरीबन 1 लाख बच्चों की मौत होने का आंकड़ा बताया गया है वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा गया है कि तकरीबन 98 फीसदी बच्चे हवा में मौजूद महीन कण से होने वाले वायु प्रदूषण के शिकार हुए। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि खाना पकाने से घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण और घर के बाहर के वायु प्रदूषण से दुनिया भर में भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों में बच्चों के स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रीनपीस नामकी एक और संस्था ने अपनी रिपोर्ट में भारत में प्रदूषण के स्तर को लेकर गहरी चिंता जताई है। ग्रीनपीस की रिपोर्ट के मुताबिक नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के तीन सबसे बड़े हॉटस्पॉट भारत में ही मौजूद हैं।

आज मैं आप लोगों के साथ कुछ ऐसी बातें साझा करना चाहता हूं जो मेरे बच्चे के स्वास्थ्य से भी संबंधित है और आपके बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है। WHO की हाल ही में आई एक रिपोर्ट को पढ़कर मैं सिहर उठा।  WHO यानि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में भारत में पांच साल से कम आयुवर्ग के तकरीबन 1 लाख बच्चों की जहरीली हवा और वायु प्रदूषण के चलते मौत हो गई। आज हम आपको इस ब्लॉग में यही बताने जा रहे है कि अपने देश में वायु प्रदूषण को लेकर स्थिति कितनी खतरनाक होते जा रही है और इसके साथ ही हमें खुद के लिए और अपने परिवार एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए किस तरह के एहतियात बरतने की आवश्यकता है। 

 

कितना खतरनाक है नाइट्रोजन ऑक्साइड? / How Dangerous Is Nitrogen Oxide in Hindi

हमें नाइट्रोजन ऑक्साइड के इन ख़तरनाक़ पहलुओ को जरूर जानना चाहिए। 

  • नाइट्रोजन ऑक्साइड पेट्रोल, डीजल, कोयले को जलाने से उत्पन्न होती है और बिजली कड़कने से समय आसमान में भी बनती है।
     
  •  यह गैस बच्चों को, सर्दियों में साँस की बीमारियों के प्रति, संवेदनशील बनाती है। 
     
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओ2) अपने आप में एक खतरनाक प्रदूषक तत्व है।
     
  •  यह हवा में मौजूद महीन कण (पीएम) 2.5 तथा ओजोन के निर्माण के लिए भी जिम्मेदार होता है जिन्हें सबसे खतरनाक वायु प्रदूषक माना जाता है। 

सच कहूं तो इन रिपोर्ट्स को पढ़ने के बाद मैं चिंतित हो उठा उसके बाद फिर मैंने अपने जानने वाले डॉक्टर्स मित्रों एवं कुछ अनुभवी आयुर्वेद के जानकारों को संपर्क किया। उनसे मैंने यही सवाल पूछा कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए और इससे होने वाले खतरों से बचने के लिए हमें किस तरह के एहतियात को बरतने की आवश्यकता है। इस बातचीत के दौरान इन विशेषज्ञों ने मुझे जो कुछ जानकारी दी उसको मैं नोट करता चला गया। अब मैं आपके साथ भी उन्हीं उपायों और नुस्खों को साझा कर रहा हूं। 

 

प्रदूषित एवं जहरीली हवा से बच्चे और खुद की सुरक्षा के उपाय / Children and Self-protection Measures from Polluted and Poisonous Air in Hindi  

हमें खुद के लिए और अपने परिवार एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए किस तरह के एहतियात बरतने की आवश्यकता है। इसे पढ़ें

  • अपने भोजन में कुछ खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से करें शामिल :-  बढ़ते स्मॉग और प्रदूषण को देखते हुए भोजन में कुछ चीजों को शामिल करना बेहतर साबित हो सकता है। गुड़, शहद, काली मिर्च, लहसुन का रोज खाने में इस्तेमाल करने से प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। खाने में जितना हो सके विटामिन सी, ओमेगा 3 को प्रयोग में लाएं। सब्जियां जैसे धनिए के पत्ते, चौलाई का साग, ड्रमस्टिक, पार्सले, गोभी और शलजम का साग विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। 
  • मास्क पहनें:- बहुत जरूरी होने पर ही बच्चों को घर से बाहर निकलने दें। अगर घर से बाहर निकलें तो बच्चे को भी मास्क पहना दें। मास्क दूषित हवाओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।
  • अपने घर में पौधे लगाएं :- क्या आप जानते हैं कि घर के अंदर भी प्रदूषण होता है। अपने घर को बाहर की दूषित हवा से बचाने के लिए जेड, स्पाइडर जैसे पौधे लगाने चाहिए। इस तरह के पौधे हवा को साफ करने में मददगार साबित होते हैं।
  • सार्वजनिक परिवहन का करें इस्तेमाल :- ये मानकर चलें कि प्रदूषण से निपटने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार और सामाजिक संस्थाओं की नहीं है बल्कि हमें भी अपने तरफ से सहयोग करना होगा। जहां तक संभव हो खुद के निजी वाहन का इस्तेमाल करने की बजाय सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें। बस, मेट्रो का प्रयोग करें। दफ्तर आने जाने के लिए अलग-अलग वाहनों की बजाय एक रूट के सहयोगी एक वाहन का भी प्रयोग कर सकते हैं। 
  • वाहनों की सर्विसिंग जरूरी:- अगर आप अपने गाड़ी की समय-समय पर सर्विसिंग नहीं कराते हैं तो भी ज्यादा धुआं निकलता है और ये पर्यावरण के लिए सबसे अधिक नुकसानदेह साबित होता है। इतना ही नहीं अगर कोई वाहन ज्यादा धुंआ देता दिखाई दे तो इसकी जानकारी ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों को भी दें।
  • बीमारी से कैसे बचे:- जहरीली हवा एवं प्रदूषण के खतरे से बचने में कुछ घरेलु नुस्खे बेहद कारगर साबित हो सकते हैं।  खांसी, जुकाम या फेफड़ों में इन्फेक्शन से राहत पाने के लिए गुड़ की चाय पीने से भी कई फायदे होंगे। ठंड के दिनों में गुड़, अदरक और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीना अच्छा रहता है। अस्थमा के मरीजों को शहद वाले पानी से भाप लेने से जल्द राहत मिलती है। इसके अलावा दिन में तीन बार एक गिलास पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से बीमारी से राहत मिलती है।
  • बिजली के उपकरणों का करें इस्तेमाल:- ठंढ़ से बचने के लिए घरों के अंदर भट्टी या फिर आग जलाने से बचना चाहिए। लकड़ी और कोयले के जलने से धुंआ निकलता है जो प्रदूषण को स्मॉग में तब्दील कर देता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा बिजली से चलने वाले उपकरणों का प्रयोग करना अच्छा विकल्प होगा। 
  • कूड़ा-करकट को जलाए नहीं बल्कि रिसाइकल करें :- कुछ लोग अपने घर से निकलने वाले कूड़े के ढेर को जला देते हैं। कूड़े में प्लास्टिक और लकड़ी होने पर धुंआ निकलने लगता है। ऐसे में घर से निकले कूड़े को फेंकने के बजाय रिसाइकल करने की कोशिश करें। कूड़ों से बनी खाद से न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखती है बल्कि पेड़ों के लिए बेहतर साबित होती है।
  • व्यायाम के समय का रखें ख्याल : आपने नोटिस किया होगा कि सर्दियों के मौसम में लोग व्यायाम के प्रति ज्यादा सजग हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप व्यायाम के लिए बाहर जाने का प्लान कर रहे हैं तो कोशिश करें की सूरज निकलने से पहले व्यायाम खत्म कर लें। दरअसल सूर्य की किरणों के साथ स्मॉग और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। अगर संभव हो सके तो घर के अंदर ही व्यायाम करने की काशिश करें।
  • बाहर से आने के बाद इन बातों का ध्यान रखें: घर आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें। बाहर से आने के बाद भाप भी ले सकते हैं। जब तक प्रदूषण है तब तक बच्चों को बाहर खेलने ना निकलने दें। साइकिलिंग करने से बचें, ज्यादा देर पैदल ना चलें।

 

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